Ram Mandir Donation Scam: चंदा चोरी पर नया खुलासा; करोड़ों के दान और लालच के जाल में कैसे फंसे चंपत राय और अफसर

अयोध्या राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले में SIT ने 15 पन्नों की प्रारंभिक रिपोर्ट सौंपी है। जांच में ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय समेत कई अधिकारियों की भूमिका संदिग्ध मिली है। रिपोर्ट के अनुसार, श्रद्धालुओं की संख्या बढ़ने पर भी चढ़ावा कम हुआ और कर्मचारियों की संपत्ति 5 साल में कई गुना बढ़ी।

Post Published By: Subhash Raturi
Updated : 24 June 2026, 1:04 PM IST

Ayodhya: अयोध्या के प्रसिद्ध राम मंदिर में हुए कथित चढ़ावा चोरी मामले में विशेष जांच टीम (SIT) ने अपनी प्रारंभिक जांच रिपोर्ट सौंप दी है। 15 पन्नों की इस रिपोर्ट में मंदिर प्रबंधन और चढ़ावे के हिसाब-किताब में कई बड़ी गड़बड़ियों और लापरवाहियों का खुलासा किया गया है। SIT की इस रिपोर्ट के बाद राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय समेत कई पदाधिकारियों और कर्मचारियों की भूमिका संदेह के घेरे में आ गई है।

श्रद्धालुओं की भारी संख्या और चढ़ावे का गणित

SIT ने राम मंदिर ट्रस्ट के बैंक खातों की जांच और पूछताछ के आधार पर श्रद्धालुओं के आगमन का पूरा ब्योरा निकाला है। रिपोर्ट के अनुसार, मंदिर में औसतन हर महीने 25 लाख श्रद्धालु दर्शन के लिए आते हैं। वहीं, कुंभ के दौरान श्रद्धालुओं की संख्या में भारी उछाल देखा गया और महज एक महीने में करीब एक करोड़ श्रद्धालु अयोध्या पहुंचे।

जांच में सामने आया है कि प्रति श्रद्धालु औसतन 15 से 18 रुपये का चढ़ावा आता है। हालांकि, इस आंकड़े में अनाज, तेल, घी और सोने-चांदी के आभूषणों से मिलने वाले दान को शामिल नहीं किया गया है, क्योंकि इनके दान का कोई ठोस सबूत और साक्ष्य जांच टीम को नहीं मिला।

Ram Mandir Donation Scam: अयोध्या राम मंदिर की दानराशि में गबन का आरोप, आखिर श्रद्धालुओं का दान कहां गया?

बैक स्टेटमेंट और चढ़ावे में बड़ा उतार-चढ़ाव

SIT ने बैंक स्टेटमेंट और श्रद्धालुओं की संख्या का बारीकी से मिलान किया, जिसमें बड़ा उतार-चढ़ाव देखने को मिला है। रिपोर्ट में इस बात पर गहरा आश्चर्य जताया गया है कि कई महीने ऐसे रहे जिनमें आने वाले श्रद्धालुओं की संख्या तो बढ़ी, लेकिन बैंक खातों में दर्ज होने वाला चढ़ावा कम हो गया।

जब SIT ने इस विसंगति को लेकर संबंधित लोगों से पूछताछ की, तो दलील दी गई कि उस दौरान श्रद्धालुओं द्वारा नोट कम और सिक्के ज्यादा चढ़ाए गए थे, जिसकी वजह से यह अंतर दिख रहा है।

चंपत राय की भूमिका संदिग्ध और निगरानी कमेटी की लापरवाही

SIT की रिपोर्ट ने मंदिर के आंतरिक प्रशासन पर भी गंभीर सवाल खड़े किए हैं। चढ़ावे की गिनती करने वाली और उसकी देखरेख के लिए जिम्मेदार 'चढ़ावा निगरानी कमेटी' की घोर लापरवाही उजागर हुई है। रिपोर्ट में सीधे तौर पर ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय सहित कई बड़े पदाधिकारियों और कर्मचारियों की भूमिका को संदिग्ध माना गया है। इसके अलावा, मंदिर में कर्मचारियों की नियुक्ति प्रक्रिया में भी बड़े पैमाने पर गड़बड़ियां पाई गई हैं। जांच में यह भी सामने आया कि मंदिर में कई ऐसे कर्मचारी काम कर रहे थे, जिनके पास कार्य करने का कोई लिखित आदेश तक नहीं था।

5 वर्षों में कर्मचारियों की संपत्ति में भारी उछाल

जांच टीम ने पाया कि मंदिर से जुड़े कई कर्मचारियों की संपत्ति और आमदनी में पिछले 5 वर्षों के दौरान अप्रत्याशित और तेजी से बढ़ोतरी हुई है। इस पूरे मामले की तह तक जाने के लिए SIT अब तक 60 से अधिक लोगों से पूछताछ कर चुकी है। जांच में सीसीटीवी फुटेज (CCTV Footage) का भी हवाला दिया गया है, जो प्रबंधन पर कई गंभीर सवाल खड़े करता है।

अयोध्या राम मंदिर के दान पात्र से कब से हो रही थी चोरी, किस किसका हाथ है इन सबके पीछे; जानिये सब कुछ 

चोरी के सटीक आंकड़ों का प्रमाण नहीं

रिपोर्ट के मुताबिक, मंदिर में चढ़ावा कितना आया और वह किस स्रोत (हुंडी, ऑनलाइन या कैश काउंटर रसीद) से आया, इसका कोई ठोस प्रमाण और रिकॉर्ड मौजूद नहीं है। प्रत्येक श्रद्धालु द्वारा चढ़ाए गए पैसे का कोई सटीक हिसाब न होने के कारण, SIT ने स्पष्ट किया है कि चढ़ावा चोरी तो हुआ है, लेकिन कितनी रकम की चोरी हुई है, इसे सबूतों के साथ सटीक रूप से बता पाना फिलहाल संभव नहीं है।

SIT ने इस प्रारंभिक जांच रिपोर्ट को सौंपने के साथ ही ट्रस्ट की व्यवस्था को मजबूत करने के लिए कई महत्वपूर्ण सुझाव भी दिए हैं। SIT ने कहा है कि एक सप्ताह में प्रारंभिक रिपोर्ट के बाद, अगले 15 दिनों के भीतर इस पूरे मामले की विस्तृत और पूर्ण रिपोर्ट सौंप दी जाएगी।

Location :  Ayodhya

Published :  24 June 2026, 1:04 PM IST