अयोध्या राम मंदिर महादान विवाद मामले में जल्द बेनकाब होंगे चेहरे, नृपेंद्र मिश्र के बड़े खुलासे से मंचा हड़कंप

अयोध्या राम मंदिर में चढ़ावा और दान चोरी मामले में ट्रस्ट के पदाधिकारियों के बीच भारी विरोधाभास सामने आया है। महासचिव चंपत राय ने जहाँ गड़बड़ी को नकारा, वहीं निर्माण समिति अध्यक्ष नृपेंद्र मिश्र ने इसे 'डाका' करार देकर प्रशासनिक ढांचे पर सवाल उठाए हैं। मामले की एसआईटी (SIT) जांच जारी है।

Post Published By: Suresh Prajapati
Updated : 21 June 2026, 8:06 AM IST

Ayodhya: अयोध्या के भव्य राम मंदिर में श्रद्धालुओं द्वारा अर्पित किए गए चढ़ावे और दानराशि में कथित हेराफेरी का मामला गहराता जा रहा है। इस संवेदनशील मामले में श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के शीर्ष पदाधिकारियों के बयानों में खुलकर विरोधाभास सामने आ चुका है। जब जून की शुरुआत में चोरी का मामला पहली बार उजागर हुआ, तब प्रशासनिक हलकों में हड़कंप मच गया। शुरुआत में ट्रस्ट के कुछ जिम्मेदार लोग इस मामले पर पर्दा डालने और इसे रफा-दफा करने की कोशिश में जुटे थे, लेकिन वे इसमें कामयाब नहीं हो सके।

चंपत राय का दावा बनाम नृपेंद्र मिश्र की 'डाका' थ्योरी

मामले ने जब तूल पकड़ा, तब ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय ने एक वीडियो बयान जारी कर सभी आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया था। उन्होंने दावा किया था कि स्टेट बैंक (SBI) के कर्मचारियों और न्यासियों की देखरेख में नियमित ऑडिट और काउंटिंग होती है और कोई भी संदिग्ध बात सामने नहीं आई है। इसके ठीक विपरीत, राम मंदिर निर्माण समिति के अध्यक्ष नृपेंद्र मिश्र ने एक के बाद एक कई बयानों में गड़बड़ी की बात को न केवल सही बताया, बल्कि इसे मंदिर के खजाने पर 'डाका' तक करार दिया। पदाधिकारियों के इस खुले टकराव ने मामले को और संदेहास्पद बना दिया है।

प्रबंधन पर उठे सवाल: 'मिनी सिटी' को चाहिए पेशेवर हाथ

नृपेंद्र मिश्र ने मंदिर के वर्तमान प्रशासनिक ढांचे पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि मंदिर परिसर में लगभग 1500 लोग अनौपचारिक रूप से काम कर रहे हैं, जो एक 'मिनी सिटी' (छोटे शहर) की तरह है। वर्तमान में यहाँ काम का कोई स्पष्ट बंटवारा या ढांचा नहीं है। उन्होंने सुझाव दिया कि मंदिर का प्रबंधन पूरी तरह से अनुभवी और पेशेवर लोगों के हाथों में सौंपा जाना चाहिए, जहाँ नियम, जवाबदेही और निश्चित वेतन की व्यवस्था हो।

मौसम का बदला मिजाज: दिल्ली-UP समेत 23 राज्यों में भारी बारिश का अलर्ट, 90 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से चलेंगी हवाएं

सुरक्षा घेरे और आगामी समारोह पर संशय के बादल

इस पूरे विवाद और चल रही विशेष जांच दल (SIT) की तफ्तीश के बीच, 23 जून को शेषावतार मंदिर में एक भव्य ध्वजारोहण समारोह प्रस्तावित है। इस धार्मिक अनुष्ठान में कई वीवीआईपी (VVIP) और हजारों श्रद्धालुओं को आमंत्रित किया गया है। लेकिन वित्तीय गड़बड़ी के आरोपों के साये में अब सबसे बड़ी चर्चा इस बात को लेकर है कि क्या ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय इस सरकारी व धार्मिक मंच पर नजर आएंगे या वे जांच पूरी होने तक दूरी बनाए रखेंगे।

CJP vs Delhi Police : रातभर पुलिस कहती रही जंतर-मंतर खाली करो, प्रदर्शनकारी कहते रहे- पहले…

सुरक्षा और तकनीक अपग्रेडेशन

सूत्रों के अनुसार, इस घटना के बाद राम जन्मभूमि परिसर के स्ट्रॉन्ग रूम और काउंटिंग रूम की सुरक्षा को कड़ा कर दिया गया है। अब नोट गिनने वाले कमरों में हाई-डेफिनिशन (HD) सीसीटीवी कैमरे लगाए जा रहे हैं, जिनकी लाइव मॉनिटरिंग सीधे वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों द्वारा की जा रही है।

 ट्रस्ट के अंदरूनी सूत्रों का कहना है कि भविष्य में ऐसी किसी भी गड़बड़ी से बचने के लिए श्रद्धालुओं को नकद के बजाय डिजिटल माध्यमों (क्यूआर कोड, यूपीआई और बैंक ट्रांसफर) से अधिक से अधिक दान करने के लिए प्रोत्साहित करने की योजना बनाई जा रही है।

Location :  Ayodhya

Published :  21 June 2026, 8:06 AM IST