क्यों जमीन पर आ गई आसमान छूने वाली Drone Didi Yojana? जानें इसके पीछे की बड़ी वजहें

ग्रामीण महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने के लिए शुरू की गई 'ड्रोन दीदी योजना' शुरुआती दौर में तकनीकी दिक्कतों और भारी खर्च के कारण सफल नहीं हो पाई। खंदौली और फतेहाबाद की महिलाओं को ड्रोन का रोजाना का खर्च उठाना भारी पड़ा।

Post Published By: Suresh Prajapati
Updated : 10 July 2026, 3:00 PM IST

Agra: ग्रामीण महिलाओं को रोजगार देने और खेती में नई टेक्नोलॉजी के इस्तेमाल को बढ़ावा देने के लिए शुरू की गई 'ड्रोन दीदी' योजना अभी तक सफल नहीं हो पाई है। तीन साल पहले, खेतों में खाद और कीटनाशक छिड़कने के लिए खंडौली, फतेहाबाद और बाह इलाकों की तीन महिलाओं को ड्रोन दिए गए थे; लेकिन कई चुनौतियों की वजह से यह योजना आगे नहीं बढ़ सकी।

ड्रोन चलाना पड़ा महंगा

योजना की सबसे बड़ी समस्या ड्रोन का खर्च था। महिलाओं को रोज ड्रोन खेत तक ले जाने और वापस लाने में करीब 1,000 से 1,500 रुपये खर्च करने पड़ते थे। इतना खर्च उठाना उनके लिए आसान नहीं था। इसी कारण कई महिलाओं ने ड्रोन का इस्तेमाल बंद कर दिया।

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तकनीकी दिक्कतों ने भी बढ़ाई परेशानी

ड्रोन की बैटरी ज्यादा देर तक नहीं चलती थी। साथ ही इसमें कीटनाशक या उर्वरक भी कम मात्रा में भरा जा सकता था। बार-बार बैटरी चार्ज करने और दवा भरने में समय लगता था, जिससे काम प्रभावित होता था।

अब फिर से शुरू हुई तैयारी

योजना को दोबारा सफल बनाने के लिए प्रशासन ने नई शुरुआत की है। करीब छह महीने पहले 10 से 15 नई महिलाओं को ड्रोन चलाने की ट्रेनिंग दी गई है। उम्मीद है कि इस बार योजना बेहतर तरीके से आगे बढ़ेगी।

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अधिकारियों ने जताई उम्मीद

जिला मिशन प्रबंधक मयंक सिंह ने बताया कि शुरुआत में खर्च और तकनीकी समस्याओं के कारण महिलाओं को काफी मुश्किलों का सामना करना पड़ा। अब इन कमियों को दूर करने की कोशिश की जा रही है, ताकि ज्यादा से ज्यादा महिलाएं इस योजना से जुड़ें और खेती में ड्रोन तकनीक का फायदा किसानों तक पहुंच सके।

Location :  Agra

Published :  10 July 2026, 3:00 PM IST