साथ छोड़ू ना तेरा! जिस दोस्त को अंतिम विदाई देने आया था, उसी की चिता के पास थम गई सांसें; दोस्ती का ऐसा अंत देख गांव रो पड़ा

अमरोहा के शहबाजपुर गुर्जर गांव से दोस्ती की एक बेहद भावुक कहानी सामने आई है। 65 वर्षीय बद्रीनारायण और 60 वर्षीय जयपाल सैनी की वर्षों पुरानी दोस्ती पूरे गांव में मिसाल थी। बद्रीनारायण की मौत के बाद जयपाल उनकी अंतिम यात्रा में तिगरी धाम पहुंचे थे।

Post Published By: Asmita Patel
Updated : 13 September 2026, 12:25 PM IST

Amroha: दोस्ती की मिसाल आपने कई बार सुनी होगी, लेकिन अमरोहा से सामने आई यह कहानी दिल को छू लेने वाली है। यहां 65 वर्षीय बद्रीनारायण और 60 वर्षीय जयपाल सैनी की दोस्ती की ऐसी तस्वीर सामने आई, जिसने पूरे गांव को भावुक कर दिया। दोनों ने जिंदगी का लंबा सफर एक-दूसरे के साथ बिताया और किस्मत का संयोग देखिए कि एक दोस्त की अंतिम विदाई के दौरान दूसरे दोस्त की भी सांसें थम गईं। बद्रीनारायण की चिता के पास उनकी अस्थियां चुन रहे जयपाल अचानक बेहोश होकर गिर पड़े।

रोज हाल जानने पहुंचते थे जयपाल

शहबाजपुर गुर्जर निवासी बद्रीनारायण पिछले कुछ दिनों से बीमार चल रहे थे। परिवार के लोगों के मुताबिक, बीमारी के दौरान उनके पुराने दोस्त जयपाल सैनी रोज उनका हाल जानने घर पहुंचते थे। दोनों के बीच सिर्फ दोस्ती ही नहीं, बल्कि पारिवारिक रिश्ते भी थे। गांव के लोगों के लिए दोनों की दोस्ती कोई नई बात नहीं थी। बताया जाता है कि दोनों लंबे समय से एक-दूसरे के सुख-दुख में साथ खड़े रहते थे।

मौत के बाद अंतिम यात्रा में पहुंचे थे जयपाल

गुरुवार शाम बद्रीनारायण का निधन हो गया। अगले दिन शुक्रवार को परिवार और ग्रामीण उनके अंतिम संस्कार के लिए तिगरी धाम पहुंचे। दोस्त की मौत की खबर के बाद जयपाल भी अंतिम यात्रा में शामिल होने तिगरी धाम पहुंचे थे। दोस्त को अंतिम विदाई देने के दौरान जयपाल उनके परिवार और ग्रामीणों के साथ मौजूद रहे। अंतिम संस्कार की प्रक्रिया पूरी होने के बाद जब परिजन गंगा तट पर अस्थियां एकत्र करने लगे तो जयपाल भी अपने दोस्त की अस्थियां चुनने में मदद कर रहे थे। लेकिन किसी को अंदाजा नहीं था कि कुछ ही देर में वहां एक और मौत होने वाली है।

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चिता के पास अचानक गिरे जयपाल

अस्थियां एकत्र करने के दौरान अचानक जयपाल सैनी की तबीयत बिगड़ गई। वह चिता के पास ही गश खाकर गिर पड़े। आसपास मौजूद परिजनों और ग्रामीणों ने उन्हें उठाने और होश में लाने की कोशिश की, लेकिन उनकी ओर से कोई प्रतिक्रिया नहीं मिली। इसके बाद ग्रामीण आनन-फानन में जयपाल को गजरौला के एक निजी अस्पताल लेकर पहुंचे। वहां चिकित्सकों ने जांच के बाद उन्हें मृत घोषित कर दिया।

दो दोस्तों की मौत से मातम

जयपाल की मौत की खबर जैसे ही शहबाजपुर गुर्जर पहुंची, गांव में मातम पसर गया। एक तरफ बद्रीनारायण के परिवार वाले अपने बुजुर्ग को खोने के गम में थे, वहीं दूसरी तरफ जयपाल के परिवार में भी कोहराम मच गया। गांव के लोगों के लिए यह घटना इसलिए भी भावुक करने वाली थी क्योंकि दोनों की दोस्ती कई दशकों पुरानी बताई जा रही है। लोगों के मुताबिक दोनों ने जीवन के सुख-दुख एक साथ देखे थे।

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ग्राम प्रशासक ने बताया दोस्ती की मिसाल

ग्राम प्रशासक जितेंद्र सैनी ने बताया कि बद्रीनारायण और जयपाल की दोस्ती पूरे गांव में मिसाल थी। दोनों एक-दूसरे के सुख-दुख में हमेशा साथ खड़े रहते थे। उन्होंने कहा कि किसी ने कल्पना भी नहीं की थी कि बद्रीनारायण की अंतिम विदाई के लिए तिगरी धाम पहुंचे जयपाल खुद भी वहीं दुनिया को अलविदा कह देंगे।

दोनों के बीच पारिवारिक रिश्ता था

बद्रीनारायण के बेटे चंद्रपाल ने बताया कि जयपाल सैनी और उनके पिता की पुरानी दोस्ती थी। दोनों के बीच पारिवारिक रिश्ते भी थे। उन्होंने कहा कि ऐसा कोई दिन नहीं बीतता था, जब दोनों की मुलाकात न होती हो। चंद्रपाल के मुताबिक, दोनों दोस्त एक-दूसरे से अपनी सभी बातें साझा करते थे और हर सुख-दुख में साथ रहते थे। यही वजह है कि गांव में उनकी दोस्ती को एक मिसाल के तौर पर देखा जाता था।

Location :  Amroha

Published :  13 September 2026, 12:24 PM IST