
लखनऊः कहावत है की बच्चे देश का भविष्य हैं और शिक्षक देश का भविष्य बनाते हैं, मगर जब शिक्षक की डिग्री पर ही सवाल उठने लगे, तब आप आसानी से अंदाजा लगा सकते हैं की देश के भविष्य के साथ किस कदर खिलावाड़ किया जा रहा है।
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यूपी में ऐसा ही मामला सामने आया है, जहां शिक्षकों की डिग्री को लेकर फर्जीवाड़ा सामने आया है। इस दौरान कई ऐसे टीचर सामने आए हैं, जो या तो किसी और के नाम पर नौकरी कर रहे थें, या फिर जाली दस्तावेजों का इस्तेमाल कर रहे थे।
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आप आसानी से अंदाजा लगा सकते हैं की देश के भविष्य के साथ किसी कदर खिलावाड़ किया जा रहा है। खास बात यह है की जब यूपी एसटीएफ को इस मामले की जांच सौंपी गई तो यह एक छोटा मामला लगा। जैसे-जैसे तफ्तीश आगे बढ़ी।चौंकाने वाले खुलासें होते चले गए।
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गौरतलब है की यूपी सरकार का प्राइमरी शिक्षा का बजट 65 हजार करोड़ रुपए है। जिसमें से 10 हजार करोड़ रुपए के करीब इन फर्जी डिग्रीधारियों के वेतन-भत्तों पर खर्च हो जाता है। यूपी एसटीएफ के आईजी अमिताभ यश ने बताया की पकड़े गए फर्जी शिक्षकों ने कई तरीकों से फर्जीवाड़े को अंजाम देकर नौकरियां हासिल की हैं। जैसे की दूसरे की डिग्री और पहचान का इस्तेमाल से, फर्जी नियुक्ति पत्र के माध्यम से, जाली दस्तावेजों से, माइनॉरिटी संस्थाओं में प्रभाव का इस्तेमाल करके।
यूपी एसटीएफ को अंदेशा है की फर्जी शिक्षकों की तादाद 50 हजार के आसपास हो सकती है। वहीं शिक्षा विभाग के कुछ अफसरों और बाबुओं की भी इस फर्जीवाड़े में मिलीभगत सामने आई है। दरअसल यूपी एसटीएफ के पास गोरखपुर निवासी अनिल यादव नामक शिक्षक ने शिकायत दर्ज करवाई थी की उसके नाम और पहचान पर कुछ लोग फर्जी तरीको से कुछ जिलों में नौकरी कर रहे हैं। जिस पर एसटीएफ ने अपनी जांच शुरू की तो इस फर्जीवाड़े का दायरा काफी बड़ा निकला।
एसटीएफ की जांच के दौरान पकड़े जाने के डर से कुछ फर्जी शिक्षकों ने अपनी नौकरी से त्यागपत्र भी दे दिया है।अब तक यूपी के मथुरा जिला में सबसे अधिक 197 फर्जी दस्तावेज वाले शिक्षक सामने आये हैं।
Published : 21 January 2020, 3:34 PM IST
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