
प्रयागराज: बॉलीवुड अभिनेत्री रही ममता कुलकर्णी को महामंडलेश्वर की पदवी दिए जाने को लेकर विवाद बढ़ता जा रहा है। एक्ट्रेस को यह पदवी दिए जाने को लेकर किन्नर अखाड़े के अंदर ही विरोध शुरू हो गया है। कुल मिलाकर किन्नर अखाड़े में जबरदस्त उथलपुथल मची हुई है। वहीं संत समाज ने भी इस पर कड़ी आपत्ति जतायी है।
डाइनामाइट न्यूज़ संवाददाता के अनुसार किन्नर अखाड़े के संस्थापक अजय दास और आचार्य महामंडलेश्वर डॉ. लक्ष्मी नारायण त्रिपाठी इस मसले पर आमने-सामने आ गए हैं।
जानकारी के अनुसार अजय दास ने यहां तक कह दिया है कि वह आज लक्ष्मी नारायण त्रिपाठी को उनके पद से हटा देंगे।। लेकिन इसके उलट लक्ष्मी नारायण का बयान नया विवाद खड़ा करता है, जिसमें उन्होंने दास के ही पद पर न होने की बात कह डाली है।
किन्नर अखाड़े की ओर से आज दोपहर में एक बड़ा फैसला लिया जा सकता है। अखाड़े के भीतर लक्ष्मी नारायण त्रिपाठी को आचार्य महामंडलेश्वर पद से हटाने की तैयारी हो रही है। इसको लेकर किन्नर अखाड़े के संतों में चर्चा तेज हो गई है।
किन्नर अखाड़े के संस्थापक अजय दास ने इस मामले में बड़ा एक्शन लेने का इशारा किया है। उन्होंने दावा किया कि वह आज लक्ष्मी नारायण त्रिपाठी को आचार्य महामंडलेश्वर के पद से हटा देंगे और इसका ऐलान आज दोपहर में किया जाएगा।
महामंडलेश्वर रामकृष्णानंद गिरि ने भी किन्नर अखाड़े के इस फैसले पर आपत्ति जताई। उन्होंने कहा कि इस ऊंचे पद पर पहुंचने के लिए व्यक्ति को अच्छे नैतिक चरित्र वाला होना चाहिए। ज्ञान वाला होना चाहिए। इस पद बैठकर व्यक्ति समाज का नेतृत्व करता है। हम ऐसे ही किसी को इस पद पर नहीं बैठा सकते।
बाबा रामदेव ने कहा कि एक दिन में कोई संत नहीं बन जाता। इसके लिए वर्षों की तपस्या करनी पड़ती है। हम लोगों को साधुता पाने में 50 वर्ष का तप लगा है। साधु होना बड़ी बात है। और महामंडलेश्वर होना उससे बड़ी बात है। उन्होंने कहा कि आजकल मैं देख रहा हूं कि किसी को भी पकड़ कर महामंडलेश्वर बना दिया जाता है। ऐसा नहीं होना चाहिए।
बागेश्वर धाम के बाबा यानी धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने कहा कि किसी भी तरह के प्रभाव में आकर किसी को संत या महामंडलेश्वर कैसे बनाया जा सकता है? हम खुद अभी तक महामंडलेश्वर नहीं बन पाए हैं।
ट्रांसजेंडर कथावाचक जगतगुरु हिमांगी सखी ने भी ममता कुलकर्णी के महामंडलेश्वर बनाए जाने पर कड़ी आपत्ति जताई थी। उन्होंने कहा कि किन्नर अखाड़ा ने सिर्फ पब्लिसिटी के लिए ऐसा किया है। समाज को उनका अतीत पहले से पता है। अचानक वह महाकुंभ में आती हैं। और उनको महामंडलेश्वर का पद दे दिया जाता है। इसकी जांच होनी चाहिए।
कथावाचक देवकीनंदन ठाकुर ने कहा कि धर्म और मंदिरों की सुरक्षा के लिए सनातन बोर्ड का गठन जरूरी है। कहा कि यदि धर्म का सही मार्गदर्शन नहीं हुआ तो समाज और देश को दोनों को इससे नुकसान होगा।
Published : 31 January 2025, 10:53 AM IST
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