
नई दिल्ली: भारत के पूर्व मुख्य न्यायाधीश डॉक्टर डीवाई चंद्रचूड़ ने कहा कि भारत एक आर्थिक महाशक्ति और दुनिया का सबसे सुदृढ़ लोकतंत्र है। डा चंद्रचूड़ ने इसके साथ ही न्याय प्रणाली के कई मजबूत पक्षों को उजागर किया और भारतीय न्यायिक व संवैधानिक व्यवस्था समेत सुप्रीम कोर्ट के कई ऐतिहासिक फैसलों पर पूछे गये तीखे सवालों का सीधा, तथ्यपूर्ण और मजबूत जवाब दिया।
देश के पूर्व सीजेआई (Former Chief Justice of India) ने BBC HARDtalk को दिये एक इंटरव्यू में पत्रकार स्टीफन सैकर (journalist Stephen Sackur) के साथ बातचीत की।
इस इंटरव्यू में उन्होंने जम्मू कश्मीर से धारा 370 हटाने, अयोध्या राम मंदिर, बड़े राजनेताओं को मानहानि समेत तमाम मामले में जमानत मिलने जैसे सुप्रीम कोर्ट के फैसलों समेत भारतीय न्यायपालिका में लिंगानुपात और न्यायपालिका में वंशवाद से जुड़े सवालों का भी जवाब दिया।
अनुच्छेद 370 का उन्मूलन
बीबीसी हार्डटॉक में जम्मू-कश्मीर को विशेष दर्जा देने से संबंधित अनुच्छेद 370 को हटाने के बारे में पूछे गये एक सवाल के जवाब में डॉ. चंद्रचूड़ ने कहा कि अनुच्छेद 370 को संविधान में संक्रमणकालीन व्यवस्था नामक अध्याय (Titled Transitional Arrangements) में शामिल किया गया था, जिसे बाद में अस्थायी और संक्रमणकालीन व्यवस्था नाम दिया गया। इसका मतलब है कि जो संक्रमणकालीन है, उसे समाप्त किया जाना है और संविधान के समग्र संदर्भ में उसका विलय करना होगा, जो किया गया।
जस्टिस चंद्रचूड़ ने आगे कहा कि धारा 370 को हटाये जाने के बाद जम्मू-कश्मीर में लोकतांत्रिक प्रक्रिया को बहाल किया जाना था। अब वहां लोकतांत्रिक रूप से चुनी गई सरकार स्थापित हो चुकी है। उन्होंने कहा, "एक जम्मू-कश्मीर में ऐसी सरकार को सत्ता का शांतिपूर्ण हस्तांतरण हुआ है, जो एक राजनीतिक दल है और जो दिल्ली में केंद्र सरकार जैसी व्यवस्था के तहत नहीं है। यह एक स्पष्ट संकेत है कि जम्मू-कश्मीर में लोकतंत्र सफल हुआ है।
राम मंदिर पर फैसला
अयोध्या राम मंदिर से जुड़े ऐतिहासिक फैसले के बारे में पूछे जाने पर डॉ. चंद्रचूड़ ने कहा, "मैं भी एक आस्थावान व्यक्ति हूं...और मेरी आस्था मुझे धर्म की सार्वभौमिकता सिखाती है। मेरे न्यायालय में चाहे कोई भी आए, सभी समान होते हैं और यह बात सुप्रीम कोर्ट के सभी अन्य न्यायाधीशों पर भी लागू होती है। सुप्रीम कोर्ट समान और निष्पक्ष न्याय करता है।
एक सवाल के जवाब में उन्होंने आगे कहा, "मेरे लिए ध्यान और प्रार्थना में बिताया गया समय बहुत महत्वपूर्ण है, लेकिन ध्यान और प्रार्थना में बिताया गया समय मुझे देश के हर धार्मिक समूह और समुदाय के प्रति निष्पक्ष रहना सिखाता है।"
न्यायपालिका में वंशवाद?
पूर्व सीजेआई डा. चंद्रचूड़ से भारतीय न्यायपालिका में वंशवाद की समस्या, लिंगानुपात और उनके जैसे कुलीन, पुरुष, हिंदू उच्च जाति के पुरुषों के वर्चस्व के बारे में भी जटिल सवाल किया गया।
डॉ. चंद्रचूड़ ने भारतीय न्यायपालिका में वंशवाद पर असहमति जताते हुए कहा कि भारतीय न्यायपालिका का एक तरह से न्याय पिरामिड के सबसे मूल स्तर के जिला न्यायालय हैं, उस स्तर पर भी आप पाएंगे कि नई भर्तियों में 50 प्रतिशत से अधिक संख्या महिलाओं की है। जहां तक सवाल लैंगिक संतुलन का है, आप पाएंगे कि जिला न्यायपालिका में आने वाली महिलाओं की संख्या बढ़ती जा रही है और महिलाओं की संख्या अगले चरणों में आगे बढ़ेंगी।
भारत के पूर्व मुख्य न्यायाधीश वाई.वी. चंद्रचूड़ के बेटे होने से जुड़े पूछे गए सवाल के जवाब में डा डीवाई चंद्रचूड़ ने कहा कि उनके पिता, ने उनसे कहा था कि जब तक वे भारत के मुख्य न्यायाधीश हैं, तब तक वे कानून की अदालत में प्रवेश न करें। "इसीलिए... मैंने उनके सेवानिवृत्त होने के बाद पहली बार न्यायालय में प्रवेश किया। यदि आप भारतीय न्यायपालिका के समग्र स्वरूप को देखेंगें तो आपको पता चलेगा कि अधिकांश वकील और न्यायाधीश पहली बार कानूनी पेशे में प्रवेश करते हैं। इसलिए आपने जो वंशवाद की बात की हकीकत उसके बिल्कुल विपरीत। ऐसा भी हरगिज नहीं है कि हमारी न्यायपालिका में उच्च जाति के ही लोग ही आते हैं। ऐसा हरगिज नहीं है।
न्यायपालिका और राजनीति
पूर्व मुख्य न्यायाधीश से पूछा गया कि क्या उन्हें अपने कार्यकाल के दौरान किसी तरह के राजनीतिक दबाव से निपटना पड़ा? इस सवाल के जवाब में डॉ चंद्रचूड़ ने कहा कि 2024 के आम चुनाव के नतीजों ने इस मिथक को खारिज कर दिया है कि भारत एक दलीय राज्य की ओर बढ़ रहा है।
उन्होंने कहा कि अगर आप भारत के राज्यों को देखें, तो ये वे राज्य हैं, जहाँ क्षेत्रीय अपेक्षाएं और पहचान सामने आई हैं, और भारत में हमारे कई राज्यों में क्षेत्रीय राजनीतिक दल हैं, जिन्होंने असाधारण रूप से अच्छा प्रदर्शन किया है और वे उन राज्यों पर शासन कर रहे हैं। यहां केंद्र और राज्यों के बीच सबसे अधिक लोकतांत्रिक संतुलन है।
प्रधानमंत्री के डॉ. चंद्रचूड़ के घर जाने पर
गणेश चतुर्थी के अवसर पर तत्कालीन मुख्य न्यायाधीश के घर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जाने के बारे में पूछे गए सवाल पर डॉ. चंद्रचूड़ ने कहा कि "इस पर संवैधानिक पद के प्राथमिक शिष्टाचार" के अलावा कुछ नहीं कहा जाना चाहिए।
उन्होंने कहा, "मुझे लगता है कि हमारी व्यवस्था बहुत परिपक्व है। यह आसानी से समझा जा सकता है कि उच्च संवैधानिक पदाधिकारियों के बीच जो प्राथमिक शिष्टाचार होता है, उसका न्यायिक मामलों के निपटारे के तरीकों से कोई लेना-देना नहीं है।"
व्यक्तिगत स्वतंत्रता की रक्षा
जमानत पाने वाले लोगों में कई राजनीतिक नेता होने से जुड़े सवाल के जवाब में पूर्व सीजेआई ने कहा, "उच्च न्यायालयों और विशेष रूप से सर्वोच्च न्यायालय ने स्पष्ट संदेश दिया है कि हम व्यक्तिगत स्वतंत्रता की रक्षा के लिए हैं। व्यक्तिगत मामलों में और व्यक्तिगत राय में अंतर हो सकता है, लेकिन न्यायिक मामले का तथ्य यह है कि सर्वोच्च न्यायालय हमेशा व्यक्तिगत स्वतंत्रता की रक्षा के मामले में हमेशा अग्रणी रहा है। यही कारण है कि हमें लोगों का विश्वास प्राप्त है और हमारी न्याय व्यवस्था पर हर कोई भरोसा करता है।
Published : 13 February 2025, 6:34 PM IST
Topics : BBC HARDtalk Dr DY Chandrachud Interview Dr DY Chandrachud on BBC HARDtalk Ex CJI DY Chandrachud India and Indian democracy new dehli Stephen Sackur