
बलरामपुर: चैत्र नवरात्रि के पांचवें दिन शक्तिपीठ देवीपाटन मंदिर पहुंचने वाली पीर रतन नाथ बाबा की यात्रा इस साल 3 अप्रैल को मंदिर पहुंचेगी। इस यात्रा के लिए मंदिर प्रशासन ने सभी तैयारियां पूरी कर ली हैं।
नेपाल-भारत की सांस्कृतिक एकता का प्रतीक
डाइनामाइट न्यूज़ संवाददाता के अनुसार, नेपाल से आने वाली यह यात्रा न सिर्फ आस्था का प्रतीक है, बल्कि भारत और नेपाल के बीच रोटी-बेटी और मैत्री संबंधों को भी मजबूत करती है. संवत 809 में शुरू हुई यह परंपरा आज भी जीवंत है. हर साल नेपाल के डांग जिले से शुरू होकर यह यात्रा चैत्र नवरात्रि के पांचवें दिन देवीपाटन पहुंचती है और दसवें दिन वापस लौटती है.
यात्रा की धार्मिक मान्यता
नेपाल के चौखरा से शुरू होने वाली इस यात्रा का गहरा धार्मिक महत्व है. कहा जाता है कि गुरु गोरक्षनाथ ने शक्तिपीठ देवीपाटन मंदिर का निर्माण कराया था और उनके शिष्य रतन नाथ बाबा नेपाल से यहां मां की पूजा करने आते थे। मां ने प्रसन्न होकर उन्हें आशीर्वाद दिया था कि चैत्र नवरात्रि में उनकी भी पूजा होगी। तब से यह यात्रा परंपरागत रूप से निकाली जाती है। इस यात्रा के दौरान अमृत कलश लाया जाता है, जिसे बाबा के दिव्य आशीर्वाद का प्रतीक माना जाता है।
पीर की उपाधि का गौरव
मान्यता के अनुसार बाबा रतन नाथ अपने विश्व भ्रमण के दौरान मक्का-मदीना भी गए थे, जहां उन्होंने मोहम्मद साहब को ज्ञान दिया था। उनसे प्रभावित होकर मोहम्मद साहब ने उन्हें 'पीर' की उपाधि से सम्मानित किया था।
यात्रा की तैयारियां पूरी
देवीपाटन मंदिर के महंत मिथिलेश नाथ योगी ने बताया कि नेपाल से आने वाली इस यात्रा के लिए व्यापक तैयारियां की गई हैं। मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं के ठहरने और खाने-पीने की पर्याप्त व्यवस्था की गई है।यह यात्रा 2 अप्रैल को कोयलबास सीमा से भारत में प्रवेश करेगी, जहां इसका भव्य स्वागत किया जाएगा।
Published : 28 March 2025, 2:09 PM IST
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