
भारतीय ओलंपिक संघ के रवैये पर आनंदेश्वर का बड़ा दावा (Img: Dynamite News)
New Delhi News: भारतीय ओलंपिक संघ आपसी अंतर्कलह से जूझ रहा है। यही कारण है कि हम 2026 के एशियाई खेलों में अपेक्षा के अनुरूप पदक नहीं जुटा सके। ओलंपिक संघ के मनमाने रवैये के बावजूद खिलाड़ियों ने जो प्रदर्शन किया, वह काबिले तारीफ है। पिछले चार वर्षों से खिलाड़ियों पर जो मेहनत की जानी चाहिए थी, वह नहीं की गई। यही कारण है कि हम प्रधानमंत्री और खेल मंत्री की योजना को धरातल पर नहीं उतार सके। यह बात भारतीय ओलंपिक संघ के पूर्व कोषाध्यक्ष आनंदेश्वर पाण्डेय ने डाइनामाइट न्यूज़ से खास बातचीत में कही।
उत्तर प्रदेश ओलंपिक संघ के सचिव आनंदेश्वर का कहना है कि भारतीय ओलंपिक संघ चार सालों से अंतर्कलह से जूझ रहा है। आपसी विवाद के कारण खेल संगठनों और खिलाड़ियों पर ध्यान नहीं दिया गया, जिससे हम प्रधानमंत्री की अपेक्षा के अनुरूप अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर खिलाड़ी पैदा नहीं कर सके।
आनंदेश्वर ने कहा कि इस बार जो तैयारी होनी चाहिए थी, उस तरह की तैयारी देखने को नहीं मिली। बहुत सी तैयारियों में टॉप लेवल पर काम ठीक नहीं किया गया था और जितने दिन की तैयारी के लिए उन्होंने रिक्वेस्ट दी, खिलाड़ियों की संख्या कम कर दी गई। बहुत से ऐसे खेलों में पदक आए, जिनमें उम्मीद नहीं थी कि इसमें पदक भी आ सकते हैं।
दूसरी चीज यह है कि पहले फेडरेशनों को तीन-चार साल तक तैयारी करने के लिए इंडियन ओलंपिक एसोसिएशन की तरफ से पैसे दिए जाते थे। पिछली बार फेडरेशनों को 15 लाख रुपये और स्टेट ओलंपिक को 10 लाख रुपये दिए गए थे। इससे वे खिलाड़ियों के लिए थोड़ी ज्यादा व्यवस्था कराते थे और उनकी तैयारी कराते थे। इंडियन ओलंपिक एसोसिएशन चार साल विवादों में घिरा रहा। अध्यक्ष और कार्यकारिणी के सदस्यों की कभी नहीं पटती थी। दोनों में मतभेद रहे, जिसकी वजह से 44 करोड़ रुपये इंडियन ओलंपिक के पास सरप्लस पड़े हैं।
अब अगर उसका उपयोग नहीं होता है तो उस पर टैक्स लगेगा। जो पैसा खिलाड़ियों के विकास में खर्च होना चाहिए, वह टैक्स में चला जाएगा। उसका कोई सदुपयोग नहीं होगा।
यूपी ओलंपिक संघ के सचिव ने कहा कि प्रधानमंत्री और खेल मंत्री की बड़ी स्पष्ट बात यह थी कि हम तैयारी कर रहे हैं। पिछले बार जितने पदक मिले हैं, उससे अधिक लाने के लिए ओलंपिक खेलों की तैयारी कर रहे हैं। लेकिन हमने हर खेल में विवाद देखे हैं। बॉक्सिंग में विवाद है, रेसलिंग में विवाद है, बॉक्सिंग में विवाद के चलते। उसके बाद भी बॉक्सिंग में तीन गोल्ड मेडल आ गए। आज तक इंडियन ओलंपिक ने बॉक्सिंग एसोसिएशन को मान्यता नहीं दी, जबकि भारत सरकार ने मान्यता दे दी है।
इसी तरह और भी तमाम खेल हैं, जिन पर इन्होंने उतना ध्यान नहीं दिया। अगर भारत को 2036 का ओलंपिक खेल करना है तो जो ओलंपिक खेलों के फेडरेशन हैं, उनके साथ तालमेल बनाना पड़ेगा और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उनके संगठनों को मोटिवेट करना पड़ेगा। अगर यह नहीं करते हैं तो हमें नहीं लगता कि हम मेजबानी हासिल कर पाएंगे। अगर कतर और कोई दूसरा देश दावा करता है तो कतर का पलड़ा भारी पड़ सकता है।
दूसरी चीज है कि आज बिना खेल अनुभव के लोग, जो पढ़े-लिखे हैं और असिस्टेंट डायरेक्टर, डिप्टी डायरेक्टर आदि हैं, जिन्हें खेल के प्रति कोई अनुभव नहीं है, वे अकादमी/करियर से आ जाते हैं। और जो सीनियर, पहले अनुभवी लोग थे, जो खेल के बारे में जानकार थे, वे धीरे-धीरे कम हो गए। तो हमें पहले जो खेल के बैकग्राउंड के लोग हैं, उनकी एक कमेटी बनानी चाहिए और उन्हें रखना चाहिए। यह ठीक है कि आर्मी के लोग बहुत बढ़िया होते हैं। आर्मी के लोग शीघ्र ट्रेन होकर अच्छे अधिकारी बन जाएंगे और वे लोग बड़े अनुशासन से काम करेंगे।
लेकिन अनुशासन और खेल के खिलाड़ियों की भावनाओं को समझना एक अलग बात है और खेल की प्लानिंग बनाना अलग बात है। केवल कागज देखकर या ऑफिस की कार्रवाई से खेल का विकास नहीं होता।
मैक्सिमम पदक देखिए, आपको ऐसे खिलाड़ियों से मिले हैं जिनके पिता गरीब थे, बच्चे मुश्किल परिस्थितियों से आते थे और ऐसे खिलाड़ी कई वर्षों की मेहनत से आगे आए। वही खिलाड़ी गोल्ड मेडल ले रहा है।इसलिए हमें एक नई और दूसरी पंक्ति के खिलाड़ी तैयार करने की रणनीति बनानी पड़ेगी।
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उन्होंने आगे बताया कि अब कल खेल मंत्री ने कहा कि सारे स्कूलों को हम कॉर्पोरेट से शारीरिक शिक्षा को... स्पॉन्सर करेंगे। मैंने 2001 में खेल यात्रा निकाली थी। शारीरिक शिक्षा को लेकर 1990 में भी खेल यात्रा निकाली थी और खेल को शारीरिक शिक्षा से जोड़ने के लिए कहा था। आज मैं महसूस कर रहा हूँ कि जो भी खिलाड़ी आता है, वह गाँव से आता है। प्राइमरी या मिडिल क्लास में जो खिलाड़ी निकलकर आता है, उसका जो पीटी टीचर होता है, गेम टीचर होता है, वह उन खिलाड़ियों को मोटिवेट करके और उन्हें ट्रेनिंग देकर आगे भेजता है।
तो ऐसे में अगर आप उस ग्रासरूट पर ध्यान नहीं देंगे, तब तो आप टॉप लेवल पर ध्यान देकर मेडल नहीं ला सकते। जो खिलाड़ी दो बार खेल चुके हैं, उनका विकल्प तैयार नहीं करेंगे और उन्हीं को रिपीट करते जाएंगे, तो भी आपको मेडल नहीं मिलेगा।
नीरज चोपड़ा को देखिए, उन्होंने अपना बेस्ट परफॉर्मेंस ओलंपिक में गोल्ड मेडल देकर दिखाया है। दो बार दिया है। अब उनसे यह उम्मीद करना कि वह ताउम्र गोल्ड देते रहेंगे, यह नाइंसाफी है। हमें पैरलल लाइन तैयार करनी पड़ेगी। हर खिलाड़ी का सब्स्टिट्यूट तैयार करना पड़ेगा, ताकि वह और बेहतर परफॉर्मेंस दिखा सके। अगर खेल के स्तर पर भारत को खेलों में आगे बढ़ाना है, खेल जगत को बढ़ाना है, तो ग्रासरूट से, ग्रासरूट लेवल से और निचले स्तर से इसको आगे बढ़ाना पड़ेगा। ग्रासरूट के खिलाड़ियों को ट्रेनिंग देनी पड़ेगी। वहीं से एटमॉसफेयर की शुरुआत करेंगे, तब जाकर अधिक पदक प्राप्त कर लेंगे।
Location : New Delhi
Published : 3 October 2026, 1:41 PM IST