आज शाम आसमान में दिखेगा साल का सबसे अनोखा चांद, जानिए हर जगह क्यों है इसकी चर्चा

आज की शाम आसमान में ऐसा नजारा देखने को मिल सकता है, जिसका इंतजार सालभर किया जाता है। इस खगोलीय घटना को लेकर विज्ञान और परंपरा दोनों में खास चर्चा है। आखिर क्यों आज का चांद इतना अलग माना जा रहा है और इसे देखने का सही समय क्या है, जानिए खबर में।

Post Published By: सौम्या सिंह
Updated : 29 June 2026, 4:23 PM IST

New Delhi: अगर आप आज की शाम कुछ अलग और यादगार देखना चाहते हैं, तो 29 जून 2026 आपके लिए खास होने वाली है। आज आसमान में स्ट्रॉबेरी मून (Strawberry Moon 2026) दिखाई देगा, जिसे साल की सबसे चर्चित खगोलीय घटनाओं में से एक माना जाता है। यह केवल एक सुंदर पूर्णिमा का चांद नहीं है, बल्कि विज्ञान, प्रकृति और भारतीय परंपराओं का अनोखा संगम भी है। इस बार चांद क्षितिज के काफी करीब नजर आएगा, जिससे यह सामान्य दिनों की तुलना में अधिक बड़ा, चमकीला और हल्के सुनहरे या तांबे जैसे रंग का दिखाई देगा। यदि मौसम साफ रहा तो भारत के कई हिस्सों में यह दृश्य बेहद आकर्षक होगा।

क्या होता है स्ट्रॉबेरी मून?

स्ट्रॉबेरी मून नाम सुनकर अक्सर लोगों को लगता है कि चांद गुलाबी या लाल रंग का दिखाई देगा, लेकिन ऐसा नहीं है। इस नाम का संबंध चांद के रंग से नहीं बल्कि उत्तरी अमेरिका की प्राचीन जनजातियों की परंपरा से जुड़ा है। जून के महीने में वहां स्ट्रॉबेरी की फसल तैयार होती थी और लोग पूर्णिमा के आधार पर मौसम और खेती का अनुमान लगाते थे। इसी वजह से जून की पूर्णिमा को स्ट्रॉबेरी मून कहा जाने लगा। समय के साथ यह नाम पूरी दुनिया में लोकप्रिय हो गया। यूरोप के कुछ देशों में इसी पूर्णिमा को रोज़ मून और हनी मून के नाम से भी जाना जाता है।

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इस बार क्यों दिखेगा बड़ा और सुनहरा?

21 जून को हुए ग्रीष्म संक्रांति के बाद जून की पूर्णिमा आसमान में अपेक्षाकृत नीचे दिखाई देती है। जब चांद क्षितिज के करीब होता है, तब उसकी रोशनी पृथ्वी के वायुमंडल की मोटी परत से होकर गुजरती है। इस दौरान नीली रोशनी अधिक बिखर जाती है, जबकि लाल और पीले रंग की रोशनी हमारी आंखों तक पहुंचती है। इसी कारण चांद हल्का सुनहरा, तांबे जैसा या गहरा पीला नजर आता है। वहीं क्षितिज के पास मौजूद पेड़, इमारतें या पहाड़ जैसे दृश्य हमारी आंखों को चांद सामान्य से बड़ा दिखाते हैं। इस प्रभाव को वैज्ञानिक भाषा में 'मून इल्यूजन' कहा जाता है।

भारत में कब और कैसे देखें?

स्ट्रॉबेरी मून देखने के लिए 29 जून 2026 की शाम सबसे उपयुक्त मानी जा रही है। चांद शाम करीब 7:00 बजे से 7:30 बजे के बीच दक्षिण-पूर्व दिशा में दिखाई देगा। चांद निकलने के बाद पहले एक से दो घंटे इसका सबसे सुंदर दृश्य देखने को मिलेगा। हालांकि पूर्णिमा का चरम समय 30 जून की सुबह होगा, लेकिन भारत में सूर्योदय के कारण उसका दृश्य उतना प्रभावशाली नहीं रहेगा।

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वट पूर्णिमा का भी है विशेष महत्व

भारतीय पंचांग के अनुसार यह दिन वट पूर्णिमा के रूप में भी महत्वपूर्ण माना जाता है। महाराष्ट्र, गुजरात और दक्षिण भारत के कई हिस्सों में विवाहित महिलाएं इस दिन व्रत रखती हैं और बरगद के वृक्ष की पूजा कर पति की लंबी आयु तथा सुख-समृद्धि की कामना करती हैं। इस बार वट पूर्णिमा और स्ट्रॉबेरी मून का संयोग इस दिन के धार्मिक महत्व को और बढ़ा रहा है।

बिना टेलिस्कोप भी देख सकेंगे खूबसूरत नजारा

स्ट्रॉबेरी मून को देखने के लिए किसी विशेष उपकरण या टेलिस्कोप की जरूरत नहीं है। इसे नग्न आंखों से आसानी से देखा जा सकता है। बेहतर अनुभव के लिए ऐसी जगह चुनें जहां आसमान साफ दिखाई देता हो और कृत्रिम रोशनी कम हो। यदि आप मोबाइल से तस्वीरें लेना चाहते हैं, तो चांद के साथ किसी पेड़, मंदिर, इमारत या पहाड़ी को फ्रेम में शामिल करने से तस्वीर अधिक आकर्षक नजर आएगी।

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Location :  New Delhi

Published :  29 June 2026, 4:23 PM IST