पितृ पक्ष में श्राद्ध की तिथि पर आ जाएं पीरियड्स, तो क्या पूर्वजों के लिए बना सकते हैं भोजन?

हिंदू धर्म में पितृ पक्ष के दौरान पूर्वजों के निमित्त भोजन बनाने और तर्पण करने का विशेष महत्व है। यदि श्राद्ध की मुख्य तिथि के दौरान महिलाओं को पीरियड्स आ जाएं, तो आइए जानते हैं क्या करें या नहीं और इससे जुड़े जरूरी नियम।

Post Published By: Priyam Kashyap
Updated : 27 September 2026, 7:06 PM IST

New Delhi: पितृ पक्ष के दौरान एक सवाल कई महिलाओं के मन में आता है... अगर श्राद्ध की तिथि वाले दिन ही मासिक धर्म यानी पीरियड्स शुरू हो जाए तो क्या करें? क्या पूर्वजों के लिए भोजन बनाया जा सकता है या फिर कोई दूसरा रास्ता अपनाना चाहिए? धार्मिक परंपराओं में इस स्थिति के लिए कुछ विशेष नियम बताए गए हैं।

पितृ पक्ष में क्यों खास होता है भोजन का महत्व?

हिंदू मान्यताओं के अनुसार, पितृ पक्ष के 16 दिन पूर्वजों को समर्पित होते हैं। इस दौरान तर्पण, पिंड दान और श्राद्ध जैसी रस्मों के जरिए पूर्वजों को श्रद्धांजलि दी जाती है। माना जाता है कि श्राद्ध के लिए बनाया गया भोजन सिर्फ खाना नहीं, बल्कि पूर्वजों के प्रति सम्मान और आभार का प्रतीक होता है। इसलिए इसे बनाते समय पवित्रता बनाए रखने और धार्मिक नियमों का पालन करने का बहुत ध्यान रखा जाता है।

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पीरियड्स के दौरान श्राद्ध भोजन बनाने को लेकर क्या है मान्यता?

पारंपरिक मान्यताओं के अनुसार, अगर मुख्य श्राद्ध की रस्म वाले दिन किसी महिला को मासिक धर्म हो रहा हो तो उसे पूर्वजों के लिए भोजन नहीं बनाना चाहिए। इसके पीछे धार्मिक तर्क यह है कि श्राद्ध समारोह के लिए पवित्रता और धार्मिक नियमों का सख्ती से पालन करना जरूरी माना जाता है। साथ ही कुछ लोग इस प्रथा को उस पुरानी परंपरा से भी जोड़कर देखते हैं जिसके तहत महिलाओं को इस समय शारीरिक आराम दिया जाता है।

मनुस्मृति में भी मिलता है उल्लेख

धार्मिक ग्रंथ मनुस्मृति में श्राद्ध के भोजन से जुड़े नियम बताए गए हैं। इसमें कहा गया है कि श्राद्ध के लिए तैयार भोजन को मासिक धर्म वाली महिला को नहीं देखना चाहिए। इसी आधार पर कई परंपराओं में ऐसी महिलाओं को श्राद्ध का भोजन बनाने से मना किया जाता है।

तो फिर कौन बनाएगा पितरों का भोजन?

अगर श्राद्ध वाले दिन किसी महिला को मासिक धर्म हो रहा हो, तो परिवार की कोई दूसरी महिला सदस्य भोजन बना सकती है। अगर ऐसा संभव न हो, तो घर का कोई पुरुष सदस्य भी यह जिम्मेदारी उठा सकता है। हालांकि, अगर किसी भी कारण से भोजन बनाना संभव न हो, तब भी पूरी श्रद्धा के साथ तर्पण (पूर्वजों को जल अर्पित करना) किया जा सकता है; इसके अलावा कई जगहों पर जरूरतमंदों या ब्राह्मणों को दान देने की परंपरा भी निभाई जाती है।

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आस्था का विषय है ये नियम

पितृ पक्ष से जुड़े रीति-रिवाज धार्मिक मान्यताओं और पारिवारिक परंपराओं पर आधारित हैं। अलग-अलग इलाकों में इन्हें मनाने के तरीके अलग-अलग हो सकते हैं। जहां कुछ परिवार आज भी इन नियमों का सख्ती से पालन करते हैं, वहीं कुछ अन्य परिवार बदलते समय के साथ इन्हें व्यक्तिगत आस्था का मामला मानते हैं।

Location :  New Delhi

Published :  27 September 2026, 7:06 PM IST