Pitru Paksha 2026: तरक्की से लेकर संतान सुख तक, भविष्य पुराण में बताए गए हैं 12 तरह के श्राद्ध, जानिए इनके अचूक लाभ

पितृ पक्ष में पूर्वजों के तर्पण और आशीर्वाद से जुड़े 12 प्रकार के श्राद्धों का भविष्य पुराण में विस्तार से वर्णन किया गया है। नित्य, काम्य, और पार्वण जैसे ये सभी श्राद्ध व्यक्ति की तरक्की, अच्छे स्वास्थ्य, सुख-समृद्धि और संतान सुख की प्राप्ति में बेहद मददगार माने जाते हैं।

Post Published By: सौम्या सिंह
Updated : 25 September 2026, 2:32 PM IST

New Delhi: वैदिक पंचांग के अनुसार, इस बार पितृ पक्ष (Pitru Paksha) की शुरुआत 26 सितंबर से होने जा रही है। पितृ पक्ष का यह पूरा समय पूर्वजों को याद करने, उनका तर्पण करने और उनका आशीर्वाद पाने के लिए बेहद खास माना जाता है। धार्मिक मान्यता है कि इस अवधि में विधि-विधान से श्राद्ध करने से पितर प्रसन्न होते हैं और उनकी आत्मा को तृप्ति मिलती है।

लेकिन क्या आप जानते हैं कि हमारी धार्मिक आस्था और ग्रंथों में श्राद्ध के भी अलग-अलग प्रकार बताए गए हैं? भविष्य पुराण के अनुसार, श्राद्ध कुल 12 प्रकार के होते हैं। हर एक श्राद्ध का अपना अलग महत्व और विशेष फल है, जिसे व्यक्ति अपनी मनोकामना और जरूरत के अनुसार कर सकता है। आइए सरल भाषा में जानते हैं इन 12 प्रकार के श्राद्धों के बारे में-

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भविष्य पुराण में वर्णित 12 प्रकार के श्राद्ध और उनके लाभ

1. नित्य श्राद्ध: इस प्रकार के श्राद्ध में मुख्य रूप से जल, अन्न या काले तिलों के माध्यम से पितरों को तृप्त किया जाता है। मान्यता है कि इसे करने वाले व्यक्ति के जीवन में खूब तरक्की होती है।

2. नैमित्तिक श्राद्ध: इसे 'एकोद्दिष्ट श्राद्ध' भी कहा जाता है। यह किसी विशेष तिथि या अवसर पर, परिवार के किसी एक विशिष्ट व्यक्ति के निमित्त किया जाता है।

3. काम्य श्राद्ध: यदि आपके मन में कोई खास मनोकामना है, तो उसे पूरा करने के लिए यह श्राद्ध किया जाता है। इसे करने से जीवन में बड़ी उपलब्धियां हासिल होती हैं।

4. पार्वण श्राद्ध: यह मुख्य रूप से अमावस्या तिथि या पितृ पक्ष के दिनों में किया जाता है। इसमें पिता, पितामह और प्रपितामह (तीन पीढ़ियों) का तर्पण करने का विधान है।

5. वृद्धि श्राद्ध: घर में किसी विवाह या मांगलिक उत्सव के दौरान पितरों का आशीर्वाद पाने के लिए यह श्राद्ध किया जाता है। किसी भी शुभ कार्य की शुरुआत से पहले इसे करना शुभ माना जाता है।

6. सपिण्डीकरण श्राद्ध: यह किसी प्रियजन की मृत्यु के 12वें दिन या फिर उनकी बरसी पर किया जाता है। इसे परिवार और समाज में मान-सम्मान व प्रतिष्ठा बनाए रखने के लिए महत्वपूर्ण माना गया है।

7. गोष्ठी श्राद्ध: यह कोई अकेला व्यक्ति नहीं करता, बल्कि परिवार के लोग या समाज के विद्वान एक साथ समूह में मिलकर इस श्राद्ध को संपन्न करते हैं।

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8. शुद्धि श्राद्ध: किसी भी प्रकार की अशुद्धि या सूतक-पातक का समय समाप्त होने के बाद, शरीर और आत्मा की पवित्रता के लिए यह श्राद्ध किया जाता है।

9. कर्मांग श्राद्ध: किसी बड़े धार्मिक अनुष्ठान या संस्कार की शुरुआत करने से पहले यह श्राद्ध किया जाता है। मान्यता है कि इसे करने से संतान बुढ़ापे में आपका पूरा सहारा बनती है।

10. दैविक श्राद्ध: यह श्राद्ध विशेष रूप से देवताओं को प्रसन्न करने और उनका आशीर्वाद प्राप्त करने के उद्देश्य से किया जाता है।

11. यात्रा श्राद्ध: यदि आप किसी लंबी यात्रा पर जा रहे हैं या किसी तीर्थ यात्रा का प्लान बना रहे हैं, तो घर से निकलने से पहले यह श्राद्ध किया जाता है। इससे यात्रा सफल और सुरक्षित रहती है।

12. पुष्टि श्राद्ध: अपने और अपने पूरे परिवार के अच्छे शारीरिक स्वास्थ्य, सुख और समृद्धि की प्राप्ति के लिए यह श्राद्ध किया जाता है।

Disclaimer: इस लेख में दी गई समस्त जानकारी और मान्यताएं केवल सामान्य सूचना पर आधारित हैं।

Location :  New Delhi

Published :  25 September 2026, 2:32 PM IST