नवरात्रि के पांचवें दिन मां स्कंदमाता की पूजा, जानें महत्व, पूजा विधि और शुभ भोग

नवरात्रि के पांचवें दिन मां स्कंदमाता की पूजा की जाती है। जानें 23 मार्च 2026 को पूजा का महत्व, विधि, मंत्र, आरती और क्या भोग लगाना शुभ होता है। पढ़ें पूरी जानकारी सरल हिंदी में।

Post Published By: Sapna Srivastava
Updated : 23 March 2026, 8:32 AM IST

New Delhi: नवरात्रि के पावन पर्व के पांचवें दिन मां स्कंदमाता की पूजा की जाती है। 23 मार्च 2026 को भक्त पूरे श्रद्धा भाव से इस स्वरूप की उपासना करेंगे। मां स्कंदमाता को माता दुर्गा की पांचवीं शक्ति माना जाता है। “स्कंदमाता” का अर्थ है भगवान स्कंद यानी कार्तिकेय की माता। उनकी गोद में बाल रूप में भगवान कार्तिकेय विराजमान रहते हैं, इसलिए यह स्वरूप मातृत्व, करुणा और संरक्षण का प्रतीक माना जाता है।

मां स्कंदमाता का दिव्य स्वरूप

मां स्कंदमाता का रूप अत्यंत शांत और कल्याणकारी है। उनकी चार भुजाएं होती हैं, जिनमें दो हाथों में कमल पुष्प होते हैं। एक हाथ में वे बाल स्कंद (कार्तिकेय) को धारण करती हैं और एक हाथ वरमुद्रा में रहता है। उनका वाहन सिंह है और वे कमल के आसन पर विराजमान रहती हैं, इसी कारण उन्हें “पद्मासना” भी कहा जाता है। यह स्वरूप शक्ति और ममता का अद्भुत संगम है।

पूजा करने से मिलने वाले लाभ

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार मां स्कंदमाता की पूजा करने से जीवन में सुख-शांति और समृद्धि आती है। संतान प्राप्ति में आ रही बाधाएं दूर होती हैं और परिवार में खुशहाली आती है। उनकी कृपा से भक्तों को भय, कष्ट और नकारात्मक ऊर्जा से मुक्ति मिलती है। यह स्वरूप हमें जीवन में एकाग्रता और संतुलन बनाए रखने की प्रेरणा देता है। स्कंदमाता यह संदेश देती हैं कि जीवन में अच्छे और बुरे के बीच संघर्ष चलता रहता है और हमें स्वयं अपने जीवन का नेतृत्व करना चाहिए।

मां स्कंदमाता की पूजा विधि

नवरात्रि के पांचवें दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और स्वच्छ, विशेष रूप से हल्के या सिल्वर रंग के वस्त्र धारण करें। इसके बाद पूजा स्थल को साफ करके मां स्कंदमाता की प्रतिमा या तस्वीर स्थापित करें। माता को कुमकुम, रोली और अक्षत से तिलक करें।

इसके बाद “ॐ देवी स्कंदमातायै नमः” मंत्र का 108 बार जाप करें। पूजा के दौरान कपूर या घी का दीपक जलाकर आरती करें और “या देवी सर्वभूतेषु मा स्कंदमाता रूपेण संस्थिता” स्तुति का पाठ करें। शाम के समय गोधूलि बेला में पुनः माता की पूजा करना विशेष फलदायी माना जाता है।

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भोग और मंत्र

इस दिन मां स्कंदमाता को केला या केले से बनी मिठाइयों का भोग लगाना शुभ माना जाता है। ऐसा करने से स्वास्थ्य और सुख-समृद्धि की प्राप्ति होती है।

पूजा मंत्र:
ॐ देवी स्कंदमातायै नमः

ध्यान मंत्र:
सिंहासनगता नित्यं पद्माञ्चित करद्वया।
शुभदास्तु सदा देवी स्कन्दमाता यशस्विनी।।

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मां स्कंदमाता की आरती और संदेश

मां स्कंदमाता की आरती करने से भक्तों को मानसिक शांति और आध्यात्मिक ऊर्जा मिलती है। उनका यह स्वरूप हमें सिखाता है कि मोह-माया में रहते हुए भी बुद्धि और विवेक से जीवन की चुनौतियों का सामना किया जा सकता है।

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Published : 
  • 23 March 2026, 8:32 AM IST