July Shivratri 2026: 12 या 13 जुलाई कब है आषाढ़ मासिक शिवरात्रि? नोट कर लें सही तारीख और पूजा का शुभ मुहूर्त

July Shivratri 2026: आषाढ़ मासिक शिवरात्रि 12 जुलाई को मनाई जाएगी। इस दिन वृद्धि और ध्रुव योग का महा-संयोग बन रहा है। जानें पूजा का सही निशिता मुहूर्त, तारीख और रात में लगने वाली भद्रा का पूरा सच।

Post Published By: Suresh Prajapati
Updated : 1 July 2026, 2:55 PM IST

New Delhi: सनातन धर्म में मासिक शिवरात्रि का व्रत भगवान शिव को प्रसन्न करने के लिए बेहद कल्याणकारी माना गया है। हर माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि को देवों के देव महादेव और माता पार्वती की विशेष पूजा-अर्चना की जाती है। इस क्रम में जुलाई 2026 में आने वाली मासिक शिवरात्रि को आषाढ़ शिवरात्रि के नाम से जाना जाएगा।

मान्यता है कि जो भक्त इस दिन पूरी श्रद्धा से व्रत रखकर भोलेनाथ की उपासना करते हैं, उनके जीवन के सभी दुख-कष्ट और पाप मिट जाते हैं। इस बार जुलाई की मासिक शिवरात्रि पर दो बेहद शुभ संयोगों का निर्माण हो रहा है, हालांकि रात के समय भद्रा का साया भी रहेगा। आइए जानते हैं आषाढ़ मासिक शिवरात्रि की सही तारीख, शुभ मुहूर्त और भद्रा का समय।

आषाढ़ शिवरात्रि 2026 की सही तारीख और पंचांग गणना

वैदिक पंचांग के अनुसार, आषाढ़ माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि की शुरुआत 12 जुलाई 2026 को रात 10 बजकर 29 मिनट पर होने जा रही है। वहीं, इस तिथि का समापन अगले दिन यानी 13 जुलाई 2026 को शाम 6 बजकर 49 मिनट पर होगा। चूंकि हिंदू धर्म में मासिक शिवरात्रि की पूजा मध्यरात्रि (निशिता काल) में करने का विधान है, इसलिए तिथि की गणना के आधार पर आषाढ़ मासिक शिवरात्रि का व्रत 12 जुलाई 2026, दिन रविवार को ही रखा जाएगा। श्रद्धालु इसी दिन उपवास रखकर महादेव की भक्ति में लीन रहेंगे।

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शिवरात्रि पर 2 शुभ योगों का महा-संयोग

इस साल जुलाई की मासिक शिवरात्रि धार्मिक दृष्टि से बेहद खास होने वाली है क्योंकि इस दिन दो बड़े शुभ योग बन रहे हैं:

वृद्धि योग: 12 जुलाई को सुबह से लेकर रात 08 बजकर 06 मिनट तक वृद्धि योग रहेगा। ज्योतिष शास्त्र में माना जाता है कि इस योग में किए गए पूजा-पाठ और शुभ कार्यों के पुण्य फल में कई गुना बढ़ोतरी होती है।

ध्रुव योग: रात 08 बजकर 06 मिनट के बाद ध्रुव योग शुरू हो जाएगा, जो अगले दिन शाम 4 बजे तक रहेगा। यह योग किसी भी स्थिर या दीर्घकालिक कार्यों को शुरू करने के लिए अत्यंत शुभ माना जाता है।
इसके अलावा, इस दिन सुबह 08 बजकर 29 मिनट तक रोहिणी नक्षत्र रहेगा और उसके बाद मृगशिरा नक्षत्र की शुरुआत हो जाएगी, जो पूजा के महत्व को और अधिक बढ़ा देता है।

निशिता काल पूजा का सबसे उत्तम मुहूर्त

यूं तो शिवभक्त रविवार को सुबह से ही मंदिरों में जाकर जलाभिषेक और पूजा कर सकते हैं, लेकिन तांत्रिक और विशेष फलदाई निशिता पूजा का एक निश्चित समय होता है। आषाढ़ शिवरात्रि की निशिता काल पूजा का महा-मुहूर्त 13 जुलाई की मध्यरात्रि 12 बजकर 07 मिनट से लेकर 12 बजकर 47 मिनट तक रहेगा। श्रद्धालुओं को भगवान शिव का विशेष अभिषेक करने के लिए कुल 40 मिनट का समय मिलेगा, जिसमें की गई आराधना तुरंत स्वीकार होती है।

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क्या पड़ेगा पृथ्वी पर असर?

इस बार की आषाढ़ शिवरात्रि पर भद्रा का साया भी देखने को मिलेगा। 12 जुलाई की रात 10 बजकर 29 मिनट से भद्रा का प्रारंभ होगा, जो अगले दिन 13 जुलाई को सुबह 05 बजकर 32 मिनट तक रहेगी। भद्रा काल में आमतौर पर शुभ कार्यों की मनाही होती है, लेकिन ज्योतिष गणना के अनुसार इस भद्रा का वास स्वर्ग लोक में है।

जब भद्रा स्वर्ग में होती है, तो उसका कोई भी अशुभ या नकारात्मक प्रभाव पृथ्वी लोक पर नहीं पड़ता है। इसलिए श्रद्धालुओं को डरने की बिल्कुल आवश्यकता नहीं है, वे पूरे दिन बिना किसी बाधा के अपनी पूजा और शुभ कार्य संपन्न कर सकते हैं।

Location :  New Delhi

Published :  1 July 2026, 2:55 PM IST