
जन्माष्टमी की तारीख का भ्रम दूर (Img- Pinterest)
New Delhi: श्रीकृष्ण जन्माष्टमी की तारीख को लेकर हर साल की तरह इस बार भी श्रद्धालुओं में असमंजस था, लेकिन अब यह स्थिति पूरी तरह साफ हो चुकी है। इस वर्ष जन्माष्टमी 4 सितंबर (शुक्रवार) को पूरे देश में श्रद्धा और हर्षोल्लास के साथ मनाई जाएगी।
ज्योतिषाचार्यों के अनुसार, इस बार करीब 15 साल बाद एक ऐसा दुर्लभ महासंयोग बन रहा है, जैसा द्वापर युग में भगवान श्रीकृष्ण के जन्म के समय बना था। इस बार गृहस्थ और वैष्णव संप्रदाय दोनों एक ही दिन जन्माष्टमी का पर्व मनाएंगे।
धर्मशास्त्रों के अनुसार, कान्हा का जन्म भाद्रपद कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि और रोहिणी नक्षत्र के संयोग में मध्यरात्रि को हुआ था। पंडित नरेंद्र उपाध्याय के अनुसार, 4 सितंबर को रात 02:25 बजे से अष्टमी तिथि शुरू हो रही है, जबकि रोहिणी नक्षत्र रात 12:29 बजे से लग रहा है। मध्यरात्रि के समय जब ये दोनों शुभ योग एक साथ मिलेंगे, तो लड्डू गोपाल का प्राकट्य उत्सव मनाना अति फलदायी और कल्याणकारी रहेगा।
4 सितंबर की रात निशिता काल में बाल गोपाल का पूजन करने का सबसे शुभ समय रहेगा। पूजा के लिए सबसे उत्तम मुहूर्त रात 11 बजकर 57 मिनट से शुरू होकर रात 12 बजकर 43 मिनट तक रहेगा।
श्रद्धालुओं को भगवान कृष्ण की विधि-विधान से उपासना और अभिषेक करने के लिए कुल 45 मिनट की अवधि मिलेगी। मध्यरात्रि में जन्मोत्सव का मुख्य क्षण रात 12:20 बजे रहेगा, जब चंद्रोदय (रात 11:29) के बाद प्रभु को भोग लगाया जाएगा।
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व्रत का पारण अगले दिन यानी 5 सितंबर को सुबह 06:01 बजे सूर्योदय के बाद किया जा सकेगा। श्रद्धालु चरणामृत और धनिया की पंजीरी का प्रसाद ग्रहण कर अपना व्रत पूरा कर सकते हैं। 15 साल बाद बने इस महासंयोग में बाल गोपाल की सच्चे मन से पूजा करने पर घर में सुख, शांति और समृद्धि का वास होता है।
Location : New Delhi
Published : 3 September 2026, 8:44 AM IST