Govardhan Puja 2026: 9 या 10 नवंबर, कब मनाई जाएगी गोवर्धन पूजा? जानें सही तारीख और शुभ मुहूर्त

गोवर्धन पूजा 2026 की तारीख को लेकर असमंजस है कि पर्व 9 या 10 नवंबर को मनाया जाएगा। जानें पंचांग के अनुसार सही तिथि, प्रातःकाल, अभिजीत और गोधूलि मुहूर्त, पूजा विधि, सात परिक्रमा और गायों की पूजा का महत्व।

Post Published By: Suresh Prajapati
Updated : 5 November 2026, 10:42 AM IST

New Delhi: दिवाली के अगले दिन गोवर्धन पूजा करने की परंपरा है। हालांकि, इस बार कार्तिक शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि दो दिन तक रहने के कारण लोगों के मन में इसकी तारीख को लेकर असमंजस है। कई लोग जानना चाहते हैं कि गोवर्धन पूजा 9 नवंबर को होगी या 10 नवंबर को। पंचांग के अनुसार, इस साल यह पर्व 10 नवंबर 2026, मंगलवार को मनाया जाएगा। इस दिन भगवान श्रीकृष्ण की पूजा के साथ गोवर्धन पर्वत की आराधना की जाती है।

पंचांग के अनुसार 10 नवंबर को मनाया जाएगा पर्व

सनातन धर्म में गोवर्धन पूजा का विशेष धार्मिक महत्व माना जाता है। यह त्योहार हर साल कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि को मनाया जाता है। मान्यता है कि इसी दिन भगवान श्रीकृष्ण ने ब्रजवासियों को इंद्र के प्रकोप से बचाने के लिए गोवर्धन पर्वत अपनी छोटी उंगली पर उठाया था।

पंचांग के अनुसार, कार्तिक शुक्ल प्रतिपदा तिथि 9 नवंबर 2026 को दोपहर 12 बजकर 32 मिनट पर शुरू होगी। इसका समापन 10 नवंबर को दोपहर 2 बजकर 1 मिनट पर होगा। उदया तिथि के आधार पर गोवर्धन पूजा 10 नवंबर को की जाएगी।

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गोवर्धन पूजा के लिए तीन शुभ मुहूर्त

इस बार गोवर्धन पूजा के लिए सुबह से शाम तक तीन शुभ समय बताए गए हैं। श्रद्धालु अपनी सुविधा और स्थानीय पंचांग के अनुसार इनमें से किसी भी मुहूर्त में पूजा कर सकते हैं।

प्रातःकाल पूजा मुहूर्त: सुबह 6:41 बजे से 8:51 बजे तक
अभिजीत मुहूर्त: सुबह 11:44 बजे से दोपहर 12:27 बजे तक
गोधूलि मुहूर्त: शाम 5:31 बजे से 5:57 बजे तक

गोवर्धन पूजा (Img- Pinterest)

इस विधि से करें भगवान श्रीकृष्ण और गोवर्धन की पूजा

गोवर्धन पूजा के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और स्वच्छ कपड़े पहनें। इसके बाद घर के आंगन या पूजा स्थल पर गाय के गोबर से गोवर्धन पर्वत की आकृति बनाएं। इसे फूलों, रोली, अक्षत और दीपक से सजाएं। शुभ मुहूर्त में भगवान श्रीकृष्ण और अपने इष्ट देव का ध्यान करते हुए पूजा शुरू करें। उन्हें धूप, दीप, फल, फूल, चंदन और नैवेद्य अर्पित करें। इस दिन अन्नकूट, मिठाई और घर में बने पकवानों का भोग लगाने की भी परंपरा है।

सात बार परिक्रमा और गायों की पूजा का विधान

गोवर्धन पूजा के दौरान गोबर से बनाई गई पर्वत की आकृति की सात बार परिक्रमा करने का विधान है। परिक्रमा करते समय हाथ में जल से भरा लोटा लेकर जौ बोए जाते हैं। मान्यता के अनुसार, गोवर्धन की आकृति के नाभि वाले स्थान पर दीपक रखकर दूध, दही, गंगाजल, शहद और बताशे अर्पित किए जाते हैं। पूजा के बाद इन्हें प्रसाद के रूप में बांटा जाता है।

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इस दिन गाय और बैल जैसे पशुधन की पूजा भी की जाती है। गाय को तिलक लगाकर फूलों से सजाते हैं और गुड़ तथा हरा चारा खिलाते हैं। धार्मिक मान्यता है कि इस पूजा से भगवान श्रीकृष्ण की कृपा और परिवार की सुख-समृद्धि का आशीर्वाद मिलता है।

Location :  New Delhi

Published :  5 November 2026, 10:42 AM IST