Dhanteras 2026: 6 या 7 नवंबर, आखिर किस दिन मनाया जाएगा धनतेरस? जानें पूजा का शुभ मुहूर्त और यम दीपक की खास कहानी

धनतेरस 2026 की तारीख को लेकर उलझन में हैं कि पर्व 6 नवंबर को मनाया जाएगा या 7 नवंबर को? यहां जानिए धनतेरस की तारीख, पूजा का शुभ मुहूर्त, सोना-चांदी खरीदने का समय और झाड़ू खरीदने की परंपरा का महत्व।

Post Published By: Nidhi Kushwaha
Updated : 24 October 2026, 1:21 PM IST

New Delhi: दिवाली की रौनक धनतेरस से ही शुरू हो जाती है। बाजारों में सोने-चांदी के गहनों, बर्तनों और घर की नई चीजों की खरीदारी होने लगती है। घरों में साफ-सफाई के साथ पूजा की तैयारियां भी शुरू हो जाती हैं। लेकिन इस बार कई लोगों के मन में एक सवाल है कि धनतेरस 6 नवंबर को मनाई जाएगी या 7 नवंबर को? अगर आप भी तारीख को लेकर उलझन में हैं, तो आइए जानते हैं धनतेरस 2026 की तारीख, पूजा का शुभ मुहूर्त, खरीदारी का समय और इससे जुड़ी खास धार्मिक मान्यताएं।

धनतेरस 2026: 6 या 7 नवंबर को मनाया जाएगा पर्व?

पंचांग में त्रयोदशी तिथि के समय को देखकर धनतेरस की तारीख तय की जाती है। दिए गए पंचांग विवरण के अनुसार, साल 2026 में धनतेरस शुक्रवार, 6 नवंबर को मनाई जाएगी। कार्तिक महीने के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि 6 नवंबर को सुबह 10:30 बजे शुरू होगी और 7 नवंबर को सुबह 10:47 बजे समाप्त होगी। शाम के समय त्रयोदशी तिथि रहने के कारण 6 नवंबर को धनतेरस मनाने का उल्लेख किया गया है।

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धनतेरस पूजा का शुभ मुहूर्त क्या है?

धनतेरस पर भगवान धन्वंतरि, मां लक्ष्मी और भगवान कुबेर की पूजा की जाती है। धार्मिक मान्यता है कि इस दिन पूजा करने से परिवार में सुख-समृद्धि और अच्छे स्वास्थ्य की कामना पूरी होती है। दिए गए पंचांग के अनुसार, 6 नवंबर को पूजा का शुभ समय शाम 6:19 बजे से रात 8:17 बजे तक बताया गया है। इस दौरान श्रद्धालु दीप जलाकर पूजा कर सकते हैं और परिवार की खुशहाली की प्रार्थना कर सकते हैं।

धनतेरस पर खरीदारी का शुभ समय?

धनतेरस पर नई चीजें खरीदने की परंपरा काफी पुरानी है। सोना, चांदी, चांदी के सिक्के और पीतल या तांबे के बर्तन खरीदना शुभ माना जाता है। इसके अलावा लोग घर की जरूरत के सामान और नई झाड़ू भी खरीदते हैं। दी गई जानकारी के अनुसार, 6 नवंबर को सुबह 10:30 बजे के बाद खरीदारी की जा सकती है। हालांकि, किसी खास वस्तु के लिए खरीदारी का मुहूर्त जानना हो तो स्थानीय पंचांग देखना बेहतर रहेगा।

धनतेरस पर यम दीपक की खास कहानी (Img: AI Generated)

धार्मिक मान्यता है कि धनतेरस पर घर में नई चीजें लाने से समृद्धि आती है। लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि शुभता के लिए महंगी खरीदारी करना जरूरी है। अपनी जरूरत और बजट के अनुसार सामान खरीदना भी एक अच्छा विकल्प है।

धनतेरस पर झाड़ू खरीदने की परंपरा क्यों है?

धनतेरस पर झाड़ू खरीदने की परंपरा भी कई घरों में निभाई जाती है। इसके पीछे मान्यता है कि झाड़ू घर की गंदगी दूर करती है और साफ-सफाई सुख-समृद्धि का प्रतीक है। कुछ परिवारों में नई झाड़ू के हैंडल पर सफेद धागा बांधने की परंपरा भी है। इसे शुभ माना जाता है। हालांकि, ये धार्मिक और पारिवारिक मान्यताएं हैं, जिनका पालन अलग-अलग क्षेत्रों में अलग तरीके से किया जाता है।

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भगवान धन्वंतरि और यमराज के दीपक की क्या है कहानी?

पौराणिक कथा के अनुसार, समुद्र मंथन के दौरान भगवान धन्वंतरि अमृत कलश लेकर प्रकट हुए थे। उन्हें आयुर्वेद और स्वास्थ्य का देवता माना जाता है। इसी वजह से धनतेरस पर उनकी पूजा करके लोग अपने और परिवार के अच्छे स्वास्थ्य की कामना करते हैं।

इस दिन शाम को यमराज के नाम का दीपक जलाने की भी परंपरा है, जिसे यम दीपदान कहा जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, यह दीपक परिवार को अकाल मृत्यु के भय से बचाने की प्रार्थना के लिए जलाया जाता है। कई घरों में यह दीपक घर के मुख्य द्वार के पास या बाहर सुरक्षित स्थान पर रखा जाता है। इसे जलाते समय आग से बचाव का ध्यान रखना जरूरी है।

ध्यान दें: पूजा का समय अपने शहर के स्थानीय पंचांग से जरूर मिलाएं, क्योंकि अलग-अलग स्थानों पर मुहूर्त में अंतर हो सकता है। यहां दी गई जानकारी

डिसक्लेमर- इस लेख में दी गई किसी भी जानकारी की डाइनामाइट न्यूज़ पुष्टि नहीं करता। दी गई जानकारी विभिन्न माध्यमों जैसे ज्योतिषियों, पंचांग, मान्यताओं या फिर धर्मग्रंथों से संग्रहित से जुटाई गई हैं। किसी भी तरह के उपयोग करने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें।

Location :  New Delhi

Published :  24 October 2026, 1:15 PM IST