Devshayani Ekadashi 2026: आज है देवशयनी एकादशी, रात में करें इस महामंत्र का जाप, जानें पूजा का सही मुहूर्त

देवशयनी एकादशी पर भगवान विष्णु चार महीने के लिए योगनिद्रा में चले जाते हैं। 25 जुलाई को इस पावन पर्व पर जानें शुभ मुहूर्त, सही पूजा विधि, क्या खाएं और मानसिक शांति के लिए रात में किस महामंत्र का 108 बार जाप करना सबसे शुभ माना जाता है।

Post Published By: Suresh Prajapati
Updated : 25 July 2026, 12:07 PM IST

New Delhi: 25 जुलाई 2026 को देवशयनी एकादशी का पावन पर्व पूरे देश में श्रद्धा और भक्ति के साथ मनाया जा रहा है। सनातन परंपरा में इस दिन का विशेष आध्यात्मिक महत्व है। मान्यता है कि इसी तिथि से जगत के पालनहार भगवान विष्णु अगले चार महीनों के लिए क्षीरसागर में योगनिद्रा में चले जाते हैं और चातुर्मास का आरंभ होता है। यह समय बाहरी धार्मिक अनुष्ठानों से ज्यादा अपनी आंतरिक चेतना, संयम और साधना को मजबूत करने का माना जाता है।

शुभ मुहूर्त और पूजा की सबसे सरल विधि

इस पावन दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और पीले वस्त्र धारण करें। घर के मंदिर में भगवान विष्णु की प्रतिमा के समक्ष घी का दीपक जलाएं। श्रीहरि को पीले फूल, पंचामृत और विशेष रूप से तुलसी दल अर्पित करें। ध्यान रखें कि भगवान विष्णु के भोग में तुलसी जरूर शामिल हो। इसके बाद व्रत का संकल्प लें और दिनभर सात्विक विचार बनाए रखें।

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रात में महामंत्र का जाप: मानसिक शांति की कुंजी

एस्ट्रोलॉजर नीतिका शर्मा के अनुसार, देवशयनी एकादशी की रात भगवान विष्णु की कृपा पाने का सबसे उत्तम समय होता है। रात में सोने से पहले हाथ-पैर धोकर शुद्ध हो जाएं और शांत मन से "ॐ नमो भगवते वासुदेवाय" मंत्र का कम से कम 108 बार जाप करें। यह द्वादशाक्षरी मंत्र मन को शांत करता है, तनाव दूर करता है और जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार करता है।

व्रत में क्या खाएं और किन चीजों से बनाएं दूरी?

क्या खाएं: एकादशी व्रत के दौरान कुट्टू का आटा, सिंघाड़ा, साबूदाना, सेंधा नमक, दूध, दही, फल और मेवे (ड्राई फ्रूट्स) का सेवन किया जा सकता है। जल का पर्याप्त सेवन करें ताकि शरीर में ऊर्जा बनी रहे।

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क्या न खाएं: इस दिन चावल (भात) खाना पूरी तरह वर्जित माना गया है। इसके अलावा गेहूं, जौ, दालें, तामसिक भोजन (प्याज, लहसुन) और मांसाहार का सेवन भूलकर भी न करें।

सच्ची भक्ति के साथ अच्छे कर्म भी हैं जरूरी

विशेषज्ञों का मानना है कि केवल अनुष्ठान ही नहीं, बल्कि मन की पवित्रता और सद्कर्म ही पूजा को सफल बनाते हैं। इस दिन जरूरतमंदों को अन्न, वस्त्र या सामर्थ्य अनुसार दान करना चाहिए। क्रोध, झूठ और किसी की निंदा करने से बचें। जब आपकी नीयत और कर्म शुद्ध होंगे, तभी मंत्र जाप का वास्तविक फल प्राप्त होगा।

Location :  New Delhi

Published :  25 July 2026, 12:07 PM IST