पितृ दोष और कालसर्प से पाना है छुटकारा? तो कौवे को भोजन कराते समय तुरंत सुधारें अपनी ये एक गलती

कौवे को भोजन देते समय जाने-अनजाने की गई एक गलती आपके पुण्य को कम कर सकती है। गरुड़ पुराण के अनुसार जानें कौवे को भोजन कराने की सही वैदिक विधि, जिससे पितृ शांत होंगे और कालसर्प दोष से भी मुक्ति मिलेगी।

Post Published By: Tanya Chand
Updated : 30 September 2026, 11:28 AM IST

New Delhi: सनातन धर्म और ज्योतिष शास्त्र में पक्षियों, विशेषकर कौवे को भोजन कराना बेहद शुभ और फलदायी माना गया है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, कौवे को यमराज का प्रतीक और पितरों का संदेशवाहक माना जाता है।

यही कारण है कि पितृपक्ष हो या सामान्य दिन, लोग अपने घर की रसोई से कौवे के लिए भोजन का हिस्सा जरूर निकालते हैं। हालांकि, गरुड़ पुराण के अनुसार यदि कौवे को भोजन देते समय सही वैदिक विधि का पालन न किया जाए, तो इसका पूरा पुण्य लाभ नहीं मिल पाता है।

कौवे को भोजन देते समय भूलकर भी न करें ये गलतियां

अक्सर लोग अपनी सुविधा के अनुसार रात का बचा हुआ या झूठा भोजन कौवे के आगे डाल देते हैं, जो कि धार्मिक दृष्टि से अत्यंत अनुचित माना गया है। गरुड़ पुराण में स्पष्ट उल्लेख है कि कौवे को हमेशा सात्विक, ताजा और शुद्ध भोजन ही अर्पित करना चाहिए।

इसके अलावा, कौवे को कभी भी प्लास्टिक की थैलियों में या गंदे स्थान पर खाना नहीं फेंकना चाहिए। भोजन को हमेशा किसी साफ बर्तन या दक्षिण दिशा में साफ पत्ते पर ही रखना चाहिए, क्योंकि दक्षिण दिशा को पितरों की दिशा माना गया है।

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इस वैदिक विधि से मिलेगा पूर्ण फल

कौवे को भोजन कराने की सबसे उत्तम विधि पंचबलि कर्म से जुड़ी हुई है। सुबह के समय जब घर में भोजन बने, तो सबसे पहले गाय, कुत्ते और कौवे के लिए अंश निकालें। भोजन परोसी जाने वाली रोटी या ग्रास पर थोड़ा सा घी और गुड़ अवश्य रखें।

इसके बाद हाथ में जल लेकर संकल्प करें और अपने पितरों का ध्यान करते हुए भोजन कौवे के लिए किसी ऊंचे व साफ स्थान पर रखें। इस विधि से दिया गया भोजन सीधे पितरों तक पहुंचता है और वे तृप्त होकर आशीर्वाद देते हैं।

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शांत होंगे पितृ और मिटेगा कालसर्प दोष

वैदिक मान्यताओं के मुताबिक, जो व्यक्ति नियमित रूप से और सही नियमों का पालन करते हुए कौवे को अन्न-जल अर्पित करता है, उसकी कुंडली से पितृ दोष का प्रभाव धीरे-धीरे समाप्त होने लगता है।

इसके साथ ही, शनि देव की ढैय्या या साढ़ेसाती से जूझ रहे लोगों के लिए भी यह उपाय अचूक माना जाता है। राहु-केतु के अशुभ प्रभाव से बनने वाला कालसर्प दोष भी इस वैदिक कार्य से शांत होता है और जीवन में आ रही रुकावटें दूर होने लगती हैं।

Location :  New Delhi

Published :  30 September 2026, 11:28 AM IST