
श्रीकृष्ण के बड़े भाई बलराम जयंती आज (Img- AI)
New Delhi: भगवान श्रीकृष्ण के बड़े भाई, जिन्हें भक्त प्रेम से दाऊजी, हलधर, बलदेव और बलभद्र पुकारते हैं, उनका जन्मोत्सव आज यानी बुधवार, 16 सितंबर 2026 को पूरे देश में श्रद्धा के साथ मनाया जा रहा है।
पंचांग के अनुसार यह पर्व भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की षष्ठी तिथि को पड़ता है। पर अकसर लोग हलछठ और बलराम जयंती में कंफ्यूज हो जाते हैं कि यह एक ही है या अलग-अलग। अगर आपकों भी इन दोनों को लेकर कंफ्यूजन है तो यह खबर पूरी जरूर पढ़ें, क्योंकि आज हम इस लेख में लोगों की यही उलझन खत्म करने वाले हैं।
अकसर हाथ में हल और मूसल होने के कारण लोग हलछठ और बलराम जयंती को एक ही पर्व मान लेते हैं, जबकि दोनों की तिथियों और उद्देश्यों में बड़ा अंतर है। हलछठ का पर्व भाद्रपद महीने के कृष्ण पक्ष की षष्ठी तिथि को मनाया जा चुका है, जो इस साल 2 सितंबर 2026 को था। हलछठ का व्रत मुख्य रूप से माताएं अपनी संतान की लंबी उम्र और अच्छी सेहत के लिए रखती हैं।
इसमें हल से जुते हुए खेत का अनाज और गाय के दूध से बनी चीजों का परहेज किया जाता है। इसके विपरीत, आज यानी 16 सितंबर को मनाया जा रहा पर्व भाद्रपद शुक्ल षष्ठी का बलराम जन्मोत्सव है, जिसमें भगवान के अवतार दिवस का आनंद मनाया जाता है।
बलराम जयंती पर व्रत-पूजन का विधान अत्यंत सरल और भक्तिमय है। इस दिन भगवान बलराम की प्रतिमा या चित्र को चौकी पर स्थापित करके पंचामृत से अभिषेक कराया जाता है। इसके बाद उन्हें नए वस्त्र, फूल, चंदन, तुलसीदल और सात्विक भोग अर्पित किया जाता है।
पूजा के दौरान गर्ग संहिता में वर्णित बलराम जन्म कथा पढ़ने और सुनने का विशेष महत्व माना गया है। ब्रज क्षेत्र के प्रसिद्ध बलदेव स्थित दाऊजी मंदिर में इस दिन अद्भुत उल्लास देखने को मिलता है, जहाँ भगवान का भव्य शृंगार और अभिषेक कर जन्मोत्सव मनाया जाता है।
बलराम जी को शेषनाग का अवतार और शक्ति व कृषि का प्रतीक माना गया है। धार्मिक मान्यता है कि आज के दिन दाऊजी की भक्तिभाव से पूजा करने से साधक को बल, बुद्धि और सुख-समृद्धि की प्राप्ति होती है। जो भक्त निष्काम भाव से भगवान बलराम और श्रीकृष्ण का ध्यान करते हैं, उनके जीवन से भय और रुकावटें दूर हो जाती हैं।
Location : New Delhi
Published : 16 September 2026, 10:53 AM IST