ज्येष्ठ का पहला मंगलवार क्यों होते हैं खास? जानिए बड़ा मंगल और बुढ़वा मंगल की पूरी कहानी

ज्येष्ठ महीने के पहले मंगलवार को बड़ा मंगल कहा जाता है। मान्यता है कि इसी महीने भगवान राम और हनुमान जी का मिलन हुआ था। बुढ़वा मंगल की कथा भी भीम के अहंकार और हनुमान जी के रूप से जुड़ी है। इस दिन पूजा, व्रत और दान का विशेष महत्व होता है।

Post Published By: Suresh Prajapati
Updated : 5 May 2026, 12:44 PM IST

New Delhi: महाकुंभ के दौरान सुर्खियों में आईं साध्वी हर्षा रिछारिया इन दिनों एक बार फिर सोशल मीडिया पर चर्चा में हैं। हाल ही में उन्होंने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर ‘बड़ा मंगल’ यानी ‘बुढ़वा मंगल’ से जुड़ी जानकारी साझा की, जिसे लोग लगातार शेयर कर रहे हैं। साध्वी ने सरल भाषा में बताया कि ज्येष्ठ महीने के मंगलवार क्यों विशेष माने जाते हैं और इन दिनों पूजा-पाठ करने से क्या धार्मिक लाभ प्राप्त होते हैं।

बड़ा मंगल क्या है और क्यों मनाया जाता है?

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, ज्येष्ठ महीने के पहले मंगलवार को ‘बड़ा मंगल’ कहा जाता है। इस दिन को हनुमान जी की आराधना के लिए बेहद शुभ माना जाता है। साध्वी हर्षा रिछारिया के अनुसार, मान्यता है कि त्रेता युग में ज्येष्ठ मास के एक मंगलवार को भगवान श्रीराम और हनुमान जी का प्रथम मिलन हुआ था। इसी वजह से इस महीने के सभी मंगलवारों का विशेष महत्व माना जाता है और भक्त इसे श्रद्धा और भक्ति के साथ मनाते हैं।

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‘बुढ़वा मंगल’ नाम के पीछे की कथा

‘बुढ़वा मंगल’ नाम से जुड़ी एक रोचक कथा भी प्रचलित है। बताया जाता है कि द्वापर युग में भीम को अपनी शक्ति पर घमंड हो गया था। तब हनुमान जी ने एक बूढ़े वानर का रूप धारण कर भीम के अहंकार को समाप्त किया। इसी घटना के कारण इस दिन को ‘बुढ़वा मंगल’ के नाम से भी जाना जाता है। यह कथा अहंकार के नाश और विनम्रता के महत्व को दर्शाती है।

इस दिन पूजा का धार्मिक महत्व

बड़ा मंगल के दिन हनुमान जी की पूजा का विशेष महत्व बताया गया है। मान्यता है कि इस दिन श्रद्धा और सच्चे मन से की गई पूजा से जीवन की परेशानियां कम होती हैं और व्यक्ति को मानसिक शांति मिलती है। लोग इस दिन व्रत रखते हैं, हनुमान मंदिरों में जाकर दर्शन करते हैं और हनुमान चालीसा का पाठ करते हैं। धार्मिक विश्वास के अनुसार इस दिन की गई भक्ति का फल शीघ्र प्राप्त होता है।

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बड़ा मंगल पर किए जाने वाले शुभ कार्य

साध्वी हर्षा रिछारिया के अनुसार, बड़ा मंगल केवल पूजा-पाठ तक सीमित नहीं है, बल्कि इस दिन सेवा और परोपकार के कार्यों को भी विशेष महत्व दिया जाता है। इस दिन भंडारा कराना, मंदिरों में पूजा या यज्ञ करवाना और जरूरतमंदों की मदद करना अत्यंत शुभ माना जाता है। मान्यता है कि ऐसे छोटे-छोटे अच्छे कार्य भी बड़ा फल प्रदान करते हैं और जीवन में सकारात्मक ऊर्जा लाते हैं।

जीवन में सकारात्मक बदलाव की मान्यता

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, यदि बड़ा मंगल के दिन सच्चे मन से हनुमान जी की आराधना की जाए, तो जीवन में सकारात्मक बदलाव आने लगते हैं। इससे न केवल मानसिक शांति मिलती है बल्कि जीवन की कठिनाइयों का सामना करने की शक्ति भी बढ़ती है। भक्तों का विश्वास है कि यह दिन आत्मिक शुद्धि और भक्ति के मार्ग को मजबूत करता है।

डिस्क्लेमर: यह जानकारी धार्मिक मान्यताओं और साध्वी हर्षा रिछारिया के विचारों पर आधारित है और केवल सामान्य सूचना के उद्देश्य से प्रस्तुत की गई है। डाइनामाइट न्यूज़ इसकी पुष्टि नहीं करता है।

Location :  New Delhi

Published :  5 May 2026, 12:44 PM IST