
क्यों मशहूर हैं बाबा बर्फानी? (Img: AI)
New Delhi: हर साल लाखों श्रद्धालु जम्मू-कश्मीर स्थित अमरनाथ गुफा में बनने वाले प्राकृतिक बर्फ के शिवलिंग, जिन्हें श्रद्धालु बाबा बर्फानी के नाम से जानते हैं, के दर्शन के लिए कठिन यात्रा करते हैं। समुद्र तल से करीब 3,888 मीटर (12,756 फीट) की ऊंचाई पर स्थित यह पवित्र गुफा धार्मिक आस्था, प्राकृतिक रहस्य और ऐतिहासिक महत्व के कारण पूरी दुनिया में प्रसिद्ध है। हर वर्ष यात्रा शुरू होने से पहले श्रद्धालुओं की सुरक्षा के लिए भारतीय सेना का 'ऑपरेशन शिवा (Operation Shiva)' भी चलाया जाता है।
अमरनाथ गुफा के भीतर हर साल प्राकृतिक रूप से बर्फ का शिवलिंग बनता है। श्रद्धालुओं की मान्यता है कि यह स्वयं भगवान शिव का स्वरूप है। बर्फ से बनने के कारण इसे 'बाबा बर्फानी' कहा जाता है। मौसम में बदलाव के साथ इसका आकार बढ़ता और घटता रहता है।
पौराणिक मान्यताओं के अनुसार भगवान शिव ने माता पार्वती को अमरत्व का रहस्य (अमर कथा) इसी गुफा में सुनाया था। कथा सुनाने से पहले उन्होंने अपने सभी प्रतीकों और साथियों को अलग-अलग स्थानों पर छोड़ दिया था। आज ये स्थान पहलगाम, चंदनवाड़ी, शेषनाग, महागुणस टॉप और पंचतरणी जैसे प्रमुख पड़ावों के रूप में जाने जाते हैं।
अमरनाथ यात्रा शुरू होने से पहले भारतीय सेना हर वर्ष 'ऑपरेशन शिवा (Operation Shiva)' चलाती है। इसका उद्देश्य यात्रा मार्ग और श्रद्धालुओं की सुरक्षा सुनिश्चित करना होता है।
Operation Shiva
इस दौरान यात्रा मार्ग पर हजारों सैनिक तैनात किए जाते हैं। ऊंची पहाड़ियों और संवेदनशील इलाकों में निगरानी बढ़ाई जाती है। ड्रोन, आधुनिक निगरानी उपकरण और हाई-टेक सर्विलांस सिस्टम का इस्तेमाल किया जाता है। आतंकवादी गतिविधियों और घुसपैठ की आशंका वाले क्षेत्रों में विशेष अभियान चलाए जाते हैं। सेना, जम्मू-कश्मीर पुलिस, सीआरपीएफ, बीएसएफ और अन्य सुरक्षा एजेंसियां मिलकर सुरक्षा व्यवस्था संभालती हैं। हर साल यात्रा शुरू होने से पहले पूरे मार्ग का सुरक्षा ऑडिट भी किया जाता है ताकि श्रद्धालु सुरक्षित दर्शन कर सकें।
बाबा बर्फानी का बर्फ का शिवलिंग हर वर्ष अलग आकार का होता है। तापमान, बर्फबारी और मौसम के प्रभाव से यह कभी बड़ा तो कभी छोटा दिखाई देता है। यात्रा के दौरान मौसम गर्म होने पर इसका आकार धीरे-धीरे कम होने लगता है।
बर्फ के शिवलिंग का रहस्य
लोककथाओं के अनुसार कई सौ वर्ष पहले बुटा मलिक नामक एक गड़रिये को यह गुफा मिली थी। कहा जाता है कि एक साधु ने उसे कोयले से भरी थैली दी, जो बाद में सोने में बदल गई। जब वह साधु को खोजने लौटा तो उसे अमरनाथ गुफा और प्राकृतिक बर्फ का शिवलिंग दिखाई दिया। तभी से यह स्थान करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र बन गया।
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अमरनाथ यात्रा देश की सबसे कठिन धार्मिक यात्राओं में गिनी जाती है। ऊंचे पहाड़, बर्फीले रास्ते, कम ऑक्सीजन और बदलते मौसम के बावजूद हर साल लाखों श्रद्धालु बाबा बर्फानी के दर्शन के लिए पहुंचते हैं। धार्मिक आस्था के साथ यह यात्रा जम्मू-कश्मीर के पर्यटन और स्थानीय अर्थव्यवस्था के लिए भी बेहद महत्वपूर्ण मानी जाती है।
Location : New Delhi
Published : 5 July 2026, 11:31 AM IST