Amarnath Yatra 2026: सातवें दिन ही लुप्त हुआ हिम शिवलिंग, पर आस्था पड़ी भारी, पवित्र गुफा के दर्शन को उमड़े भक्त

अमरनाथ यात्रा के 7वें दिन बाबा बर्फानी अंतर्धान! हिम शिवलिंग पिघलने के बाद भी श्रद्धालुओं की आस्था अडिग। आगरा के शिवभक्त पवित्र गुफा की मिट्टी और अमरगंगा के जल का दर्शन करने पूरे उत्साह के साथ रवाना होने को तैयार।

Post Published By: Suresh Prajapati
Updated : 10 July 2026, 3:04 PM IST

New Delhi: पवित्र अमरनाथ यात्रा शुरू होने के महज सातवें दिन ही बाबा बर्फानी के अंतर्धान (पिघलने) होने की खबर सामने आई है। इस खबर से शुरुआती दौर में देश भर के श्रद्धालुओं और शिवभक्तों में थोड़ी निराशा जरूर देखी गई थी, लेकिन अब आस्था की शक्ति इस विपरीत परिस्थिति पर भारी पड़ती नजर आ रही है।

हिम शिवलिंग के समय से पहले पिघल जाने के बाद भी श्रद्धालुओं के उत्साह में कोई कमी नहीं आई है। उत्तर प्रदेश के आगरा से बाबा के दरबार जाने वाले और इसके लिए नया पंजीकरण करा रहे तीर्थयात्रियों ने अपने कदम पीछे नहीं खींचे हैं। शिवभक्तों का जज्बा यह साफ बयां कर रहा है कि महादेव के प्रति उनका प्रेम किसी आकार का मोहताज नहीं है।

प्राकृतिक और आध्यात्मिक प्रक्रिया है शिवलिंग का पिघलना

अमरनाथ जाने वाले तीर्थयात्रियों का साफ कहना है कि बाबा बर्फानी की पवित्र गुफा का दर्शन ही अपने आप में मोक्षदायक और जीवन को धन्य करने वाला है। श्रद्धालुओं के मुताबिक, हिम शिवलिंग का पिघलना एक प्राकृतिक मौसमी बदलाव और आध्यात्मिक प्रक्रिया है, जिससे उनकी सदियों पुरानी अटूट आस्था पर कोई नकारात्मक प्रभाव नहीं पड़ता। वे बाबा के साक्षात स्वरूप के दर्शन न हो पाने के मलाल को भूल चुके हैं। अब उनका एकमात्र लक्ष्य पवित्र गुफा की पावन मिट्टी को चूमना और वहां प्रवाहित होने वाली अमरगंगा के पवित्र जल को अपने माथे से लगाकर आत्मिक संतोष प्राप्त करना है।

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गुफा की पावन मिट्टी और अलौकिक ऊर्जा में ही बसते हैं शिव

आगरा के आवास विकास क्षेत्र के रहने वाले श्रद्धालु दीपक का कहना है कि बाबा बर्फानी के अंतर्धान होने की खबर से उनका दिल जरूर थोड़ा बैठ गया था, लेकिन इससे महादेव को पाने का उत्साह कम नहीं हुआ। अमरनाथ गुफा की पावन मिट्टी और वहां की पहाड़ियों में जो अलौकिक ऊर्जा है, उसमें आज भी साक्षात शिव का वास महसूस होता है। उन्होंने बताया कि वे अपने पहले से तय कार्यक्रम के अनुसार ही यात्रा पर रवाना होंगे और अमरगंगा के जल का आचमन कर अपनी इस कठिन धार्मिक यात्रा को सफल और सार्थक बनाएंगे।

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यह तो भाव की भक्ति है, भोलेनाथ किसी आकार में नहीं बंधे

इसी तरह मधुनगर निवासी मनीष ने भक्ति का एक अनूठा पहलू सामने रखा। उन्होंने बताया कि भोलेनाथ की खोज किसी निश्चित भौतिक आकार में नहीं, बल्कि भक्त के सच्चे भाव में होती है। यह पूरी तरह से भाव की भक्ति है। बाबा बर्फानी के अदृश्य या लुप्त होने के बाद भी उस ऐतिहासिक और पौराणिक स्थान की दिव्यता रत्ती भर भी कम नहीं होती है। आगरा और इसके आस-पास के क्षेत्रों के सभी शिवभक्त पूरे गाजे-बाजे और पारंपरिक उत्साह के साथ इस साल भी अपनी यात्रा पूरी करने के लिए पूरी तरह तैयार हैं।

Location :  New Delhi

Published :  10 July 2026, 3:04 PM IST