खराब बोर्ड नतीजों पर पंजाब सरकार सख्त, पंजाब के 68 स्कूल प्रिंसिपलों के खिलाफ विभागीय कार्रवाई शुरू, तय होगी जवाबदेही

पंजाब के 68 सरकारी स्कूलों के प्रिंसिपलों पर लगातार खराब बोर्ड परीक्षा परिणाम देने के कारण गाज गिरने वाली है। शिक्षा विभाग ने स्पष्टीकरण की समीक्षा के बाद आगे की कार्रवाई शुरू कर दी है। विभाग का साफ कहना है कि बच्चों के भविष्य से खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं होगा।

Post Published By: सौम्या सिंह
Updated : 19 July 2026, 3:32 PM IST

Chandigarh: पंजाब के सरकारी स्कूलों में शिक्षा का स्तर सुधारने और बोर्ड परीक्षाओं के नतीजों को बेहतर करने के लिए शिक्षा विभाग ने अब कड़ा रुख अख्तियार कर लिया है। राज्य के जिन सरकारी स्कूलों का प्रदर्शन लगातार उम्मीद से बेहद कमजोर और खराब रहा है, उनके प्रमुखों पर अब कार्रवाई की तलवार लटक गई है। विभाग ने ऐसे 68 सरकारी स्कूलों के प्रिंसिपलों के खिलाफ विभागीय कार्रवाई की प्रक्रिया को हरी झंडी दे दी है। इन स्कूलों में दसवीं और बारहवीं कक्षा के बोर्ड परीक्षा परिणाम पिछले कुछ समय से लगातार निराशाजनक आ रहे थे, जिसके बाद विभाग को यह कड़ा फैसला लेना पड़ा।

स्पष्टीकरण की जांच के बाद होगा अंतिम फैसला

मिली जानकारी के अनुसार, इस कार्रवाई से पहले शिक्षा विभाग ने पूरी प्रक्रिया का पालन किया है। विभाग ने सबसे पहले इन सभी 68 स्कूलों के प्रिंसिपलों को नोटिस भेजकर उनसे इस खराब प्रदर्शन का कारण पूछा था। स्कूल प्रमुखों की तरफ से जो लिखित स्पष्टीकरण (जवाब) विभाग को मिले हैं, अब उच्च अधिकारियों द्वारा उनकी गहन समीक्षा और जांच की जा रही है। इस जांच के तुरंत बाद विभाग अंतिम रूप से जवाबदेही तय करेगा और लापरवाही बरतने वाले प्रिंसिपलों पर कड़ी प्रशासनिक कार्रवाई की जाएगी।

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बच्चों के भविष्य से लापरवाही बर्दाश्त नहीं

शिक्षा विभाग के अधिकारियों ने दो टूक शब्दों में कहा है कि स्कूलों में पढ़ रहे छात्र-छात्राओं का बेहतर और गुणवत्तापूर्ण परिणाम सुनिश्चित करना सीधे तौर पर स्कूल प्रमुख यानी प्रिंसिपल की जिम्मेदारी है। बच्चों की पढ़ाई और उनके भविष्य के मामले में किसी भी स्तर पर ढिलाई को स्वीकार नहीं किया जाएगा। विभाग की नीति साफ है- अच्छा काम करने वाले और बेहतरीन नतीजे देने वाले स्कूलों को जहां प्रोत्साहित और सम्मानित किया जाएगा, वहीं लगातार खराब प्रदर्शन करने वाले स्कूलों के लिए एक विशेष सुधार योजना लागू कर वहां का माहौल बदला जाएगा।

परीक्षा परिणाम के अलावा इन बातों पर भी कड़ा पहरा

विभाग का मुख्य फोकस केवल सालाना परीक्षा के अंकों पर ही नहीं है, बल्कि वह स्कूलों की पूरी व्यवस्था को अंदर से बदलना चाहता है। यही वजह है कि अब स्कूलों में विद्यार्थियों की रोजाना उपस्थिति, क्लास में पढ़ाई का स्तर, शिक्षकों का तरीका और स्कूल के ओवरऑल मैनेजमेंट की भी लगातार मॉनिटरिंग की जा रही है। जिन स्कूलों को शैक्षणिक रूप से कमजोर पाया जाएगा, उन्हें विभाग की ओर से अतिरिक्त गाइडेंस और जरूरी संसाधन भी दिए जाएंगे ताकि वे आने वाले समय में अपने प्रदर्शन को सुधार सकें।

जिला शिक्षा अधिकारियों को नियमित निगरानी के आदेश

इस व्यवस्था को और मजबूत करने के लिए शिक्षा विभाग ने जिला शिक्षा अधिकारियों (DEOs) को भी विशेष जिम्मेदारी सौंपी है। मुख्यालय ने निर्देश दिए हैं कि वे अपने जिलों के ऐसे कमजोर स्कूलों का लगातार निरीक्षण करें और वहां हो रहे सुधारों की एक प्रोग्रेस रिपोर्ट समय-समय पर मुख्य कार्यालय को भेजते रहें। विभाग ने यह भी साफ कर दिया है कि यदि अगले शैक्षणिक सत्र में भी इन स्कूलों के नतीजों में कोई सकारात्मक बदलाव नहीं दिखा, तो स्कूल प्रमुखों के साथ-साथ संबंधित अधिकारियों के खिलाफ भी और ज्यादा सख्त कदम उठाए जा सकते हैं।

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जवाबदेही से सुधरेगा सरकारी स्कूलों का स्तर

विभागीय अधिकारियों का मानना है कि जब तक स्कूल प्रमुखों की जवाबदेही तय नहीं होगी, तब तक व्यवस्था में बड़ा सुधार संभव नहीं है। इस तरह के कड़े कदमों से सरकारी स्कूलों में पढ़ाई का माहौल बदलेगा और बच्चों के परीक्षा परिणामों में भी बड़ा और सकारात्मक बदलाव देखने को मिलेगा। विभाग ने सभी स्कूल प्रमुखों को कड़े निर्देश दिए हैं कि वे अपना पूरा ध्यान केवल और केवल बच्चों को अच्छी शिक्षा देने और उनके नियमित मूल्यांकन पर लगाएं।

Location :  Chandigarh

Published :  19 July 2026, 3:32 PM IST