
पंजाब मुख्यमंत्री भगवंत मान
चंडीगढ़: पंजाब विधानसभा चुनाव 2027 से पहले आम आदमी पार्टी (AAP) की मुश्किलें बढ़ती नजर आ रही हैं। पार्टी के तीन मौजूदा विधायकों ने इस्तीफा देकर भाजपा का दामन थाम लिया है। इस घटनाक्रम के बाद अब पार्टी में और टूट की आशंका जताई जा रही है।
सूत्रों के मुताबिक, आम आदमी पार्टी के कुछ और विधायक भाजपा और कांग्रेस के नेताओं के संपर्क में हैं। ऐसे में फरवरी 2027 में प्रस्तावित विधानसभा चुनाव से पहले मुख्यमंत्री भगवंत मान के नेतृत्व वाली सरकार के सामने संगठन को एकजुट रखने की बड़ी चुनौती खड़ी हो गई है।
पंजाब में आम आदमी पार्टी की राजनीतिक यात्रा पर नजर डालें तो वर्ष 2017 और 2022 के विधानसभा चुनावों में पार्टी का प्रदर्शन काफी अलग रहा था। वर्ष 2017 में आप ने 20 सीटें जीतकर पंजाब की राजनीति में खुद को एक मजबूत विकल्प के रूप में स्थापित किया था। हालांकि, उस समय पार्टी बहुमत के आंकड़े से काफी दूर रह गई थी।
इसके बाद वर्ष 2022 के विधानसभा चुनाव में बदलाव की लहर के बीच आम आदमी पार्टी ने ऐतिहासिक प्रदर्शन किया। कुल 117 विधानसभा सीटों में से 92 पर जीत दर्ज कर पार्टी ने अपने दम पर सरकार बनाई थी। लेकिन इस बार चुनाव से पहले परिस्थितियां पहले जैसी नहीं दिखाई दे रही हैं। विपक्षी दल भी लगातार सरकार को घेरने में जुटे हैं।
फरवरी 2027 में प्रस्तावित विधानसभा चुनाव से पहले पंजाब में नशा और हथियारों की तस्करी, बिगड़ती कानून-व्यवस्था और कर्मचारियों की नाराजगी जैसे मुद्दे आम आदमी पार्टी के लिए चुनौती बन रहे हैं। कर्मचारियों और पेंशनरों के बीच भी सरकार को लेकर असंतोष की चर्चा है।
वहीं, सरकार अपने विकास मॉडल और नई चुनावी गारंटियों के जरिए एक बार फिर मतदाताओं का विश्वास जीतने की तैयारी में है। दूसरी तरफ भाजपा और कांग्रेस भी सत्तारूढ़ दल को घेरने के लिए अपनी रणनीति तैयार कर रही हैं। ऐसे में इस बार का चुनावी मुकाबला पिछले चुनाव की तुलना में अधिक चुनौतीपूर्ण हो सकता है।
आम आदमी पार्टी की मुश्किलों के पीछे टिकट वितरण को लेकर बढ़ती बेचैनी भी एक बड़ी वजह बताई जा रही है। पार्टी की पहली सूची में 40 उम्मीदवारों के नाम घोषित किए गए हैं। बताया जा रहा है कि कई मौजूदा विधायकों को उम्मीद थी कि पार्टी इस बार भी उन्हें चुनाव मैदान में उतारेगी।
कई मंत्री भी अपनी उम्मीदवारी लगभग तय मानकर चल रहे थे, लेकिन पहली सूची में मुख्यमंत्री के अलावा केवल दो मंत्रियों के नाम शामिल किए जाने से पार्टी के भीतर हलचल बढ़ गई। इनमें मंत्री संजीव अरोड़ा का नाम भी शामिल है, जो ईडी से जुड़े एक मामले में गुरुग्राम जेल में बंद हैं।
इसी बीच तीन विधायकों के पार्टी छोड़कर भाजपा में शामिल होने और कुछ अन्य विधायकों के भाजपा-कांग्रेस के संपर्क में होने की चर्चाओं ने आप की चिंता बढ़ा दी है। अब पार्टी के सामने सबसे बड़ी चुनौती नाराज विधायकों और मंत्रियों को साधने के साथ चुनाव से पहले संगठनात्मक एकजुटता बनाए रखने की है।
Location : Chandigarh
Published : 3 November 2026, 9:55 AM IST