MLC चुनाव की वोटर लिस्ट पर सपा का बड़ा सवाल, कहीं एक नाम 5 बार तो कहीं 3 बार दर्ज होने का आरोप; चुनाव आयोग से की ये मांग

उत्तर प्रदेश में विधान परिषद चुनाव से पहले मतदाता सूची को लेकर सियासी हलचल तेज हो गई है। समाजवादी पार्टी ने कहीं एक नाम तीन बार तो कहीं पांच बार दर्ज होने का आरोप लगाते हुए चुनाव आयोग से शिकायत की है।

Post Published By: Suresh Prajapati
Updated : 18 October 2026, 9:02 PM IST

Lucknow: उत्तर प्रदेश में विधान परिषद की 11 सीटों के चुनाव को लेकर समाजवादी पार्टी ने मतदाता सूची और सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल उठाए हैं। पार्टी ने मुख्य निर्वाचन अधिकारी, उत्तर प्रदेश को ज्ञापन सौंपकर कथित डुप्लीकेट मतदाताओं के नामों की जांच कराने और मतदान से लेकर मतगणना तक कड़ी निगरानी रखने की मांग की है। सपा का आरोप है कि कुछ मतदाताओं के नाम सूची में एक से ज्यादा बार दर्ज हैं।

276 पन्नों के दस्तावेज के साथ शिकायत

सपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के निर्देश पर प्रदेश अध्यक्ष श्याम लाल पाल ने मुख्य निर्वाचन अधिकारी को संबोधित ज्ञापन सौंपा। केके श्रीवास्तव, डॉ. हरिश्चन्द्र सिंह यादव और राधेश्याम सिंह ने भी इस ज्ञापन के जरिए कार्रवाई की मांग की।

पार्टी का आरोप है कि भाजपा के कुछ पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं के नाम मतदाता सूची में कई जगह दर्ज हैं। सपा ने दावा किया कि शिकायत के समर्थन में कथित डुप्लीकेट मतदाताओं का विवरण 276 पन्नों में संलग्न किया गया है।

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मिर्जापुर में एक नाम पांच बार दर्ज होने का दावा

सपा ने मिर्जापुर जिले की मतदाता सूची के कुछ उदाहरण देकर गड़बड़ियों का आरोप लगाया है। ज्ञापन के मुताबिक, बूथ संख्या 226 पर मतदाता क्रमांक 862, 863 और 864 पर रविशंकर पांडेय का नाम तीन बार दर्ज है। पार्टी ने उन्हें भाजपा का जिला मंत्री बताते हुए संबंधित फोटो और सूची का विवरण देने की बात कही है।

इसी तरह बूथ संख्या 242 पर अंजली मौर्या का नाम क्रमांक 15 से 19 तक पांच बार दर्ज होने का आरोप लगाया गया है। इसी बूथ पर स्मृति सिंह का नाम क्रमांक 582 से 584 तक तीन बार होने की शिकायत है। पवन कुमार गुप्ता का नाम क्रमांक 320 और 321 पर, जबकि बूथ संख्या 245 पर जितेंद्र कुमार सरोज का नाम क्रमांक 215 और 216 पर दो-दो बार दर्ज होने का दावा किया गया है।

सपा ने आयोग से ऐसे मामलों की जांच कर यह सुनिश्चित करने की मांग की है कि कोई मतदाता एक से अधिक बार वोट न डाल सके।

लखनऊ खंड के 102 मतदान केंद्रों पर सुरक्षा की मांग

पार्टी ने लखनऊ खंड स्नातक निर्वाचन क्षेत्र के सात जिलों में 102 मतदान केंद्रों को संवेदनशील बताते हुए अतिरिक्त सुरक्षा की मांग की है। इनमें लखीमपुर के 31, सीतापुर के 14, रायबरेली के 19, बाराबंकी के 7, हरदोई के 11, प्रतापगढ़ के 7 और लखनऊ के 13 केंद्र शामिल हैं।

सपा ने सभी केंद्रों पर वीडियो कैमरे लगाने और रिकॉर्डिंग सुरक्षित रखने की मांग की है। साथ ही मतपेटियों को सील करने के बाद सीसीटीवी कैमरों और सुरक्षा बलों की निगरानी में रखने की बात कही है। मतगणना के दौरान बिजली की निर्बाध आपूर्ति और जनरेटर की व्यवस्था सुनिश्चित करने की मांग भी की गई है।

पार्टी चाहती है कि मतगणना शुरू होने के बाद बिना रुकावट पूरी की जाए। केवल निर्धारित संख्या में अधिकृत एजेंटों को प्रवेश मिले और अनधिकृत लोगों को केंद्रों से दूर रखा जाए। सपा ने सिविल पुलिस के अतिरिक्त पर्याप्त सुरक्षा बल तैनात करने की मांग भी उठाई है।

पहचान पत्र में मामूली अंतर पर वोट न रोकने की मांग

सपा ने आशंका जताई है कि पते या अंग्रेजी में नाम की स्पेलिंग के मामूली अंतर के कारण मतदाताओं को वोट डालने से रोका जा सकता है। ज्ञापन में कहा गया है कि चुनाव आयोग के प्रारूप-18 और ऑनलाइन सॉफ्टवेयर में ब्लॉक या वार्ड का कॉलम नहीं होने से मतदान केंद्र तय करने में परेशानी हो सकती है।

नाम की स्पेलिंग के अंतर पर भी सपा ने स्पष्ट निर्देश जारी करने की मांग की है। ज्ञापन में रीता सिंह का उदाहरण दिया गया है, जिनका नाम पहचान पत्र में ‘RITA SINGH’ और मतदाता सूची में ‘REETA SINGH’ दर्ज होने की बात कही गई है। पार्टी का कहना है कि उच्चारण समान होने पर ऐसे मामूली अंतर को मतदान रोकने का आधार नहीं बनाया जाना चाहिए।

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प्रतापगढ़ और शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र को लेकर भी शिकायत

सपा ने प्रतापगढ़ के कुछ मतदान केंद्रों पर 11 अक्टूबर को मतदाता सूची के क्रमांक बदले जाने का आरोप लगाया है। पार्टी के मुताबिक, 10 अक्टूबर तक उपलब्ध सूची के आधार पर मतदाता पर्चियां बांटी जा चुकी थीं। ऐसे में केवल क्रमांक बदलने के कारण किसी मतदाता को वोट डालने से नहीं रोका जाना चाहिए।

वाराणसी खंड शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र की मतदाता सूची के दोबारा सत्यापन पर भी पार्टी ने आपत्ति जताई है। सपा का आरोप है कि अंतिम सूची जारी होने और निरंतर पुनरीक्षण के तहत शामिल मतदाताओं की सूची प्रकाशित होने के बाद भी कुछ जिलों में जिलाधिकारी और जिला विद्यालय निरीक्षक विद्यालयों से फिर जांच करा रहे हैं।

पार्टी का कहना है कि प्रधानाचार्यों के प्रमाणपत्रों पर जिला विद्यालय निरीक्षकों के हस्ताक्षर के बाद ही नाम शामिल किए गए थे। इसके बावजूद विद्यालयों, प्रबंधकों और कर्मचारियों को परेशान किया जा रहा है। सपा ने इस प्रक्रिया पर रोक लगाने और संबंधित अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है।

ज्ञापन के अंत में पार्टी ने चुनाव आयोग से सभी संबंधित निर्वाचन क्षेत्रों में मतदान और मतगणना को स्वतंत्र, निष्पक्ष, पारदर्शी और भयमुक्त तरीके से संपन्न कराने के लिए जरूरी कदम उठाने का आग्रह किया है। अब इन शिकायतों पर आयोग की ओर से होने वाली कार्रवाई पर नजर रहेगी।

Location :  Lucknow

Published :  18 October 2026, 8:52 PM IST