Rajya Sabha Election: जयंत चौधरी का नाम BJP की लिस्ट से गायब, क्या अखिलेश यादव अब बदलेंगे सियासी रुख?

Rajya Sabha Election में भाजपा की आठ उम्मीदवारों की सूची में जयंत चौधरी का नाम नहीं है। इससे उन्हें दोबारा उच्च सदन भेजे जाने की चर्चाओं पर फिलहाल विराम लगा है। जयंत पहले सपा के समर्थन से राज्यसभा पहुंचे थे। अब भाजपा की सूची के बाद अखिलेश-जयंत रिश्तों को लेकर चर्चा तेज है।

Post Published By: Suresh Prajapati
Updated : 7 October 2026, 10:38 AM IST

Lucknow: उत्तर प्रदेश में राज्यसभा चुनाव को लेकर सियासी तस्वीर अब काफी हद तक साफ हो गई है। भाजपा ने यूपी कोटे की राज्यसभा सीटों के लिए अपने आठ उम्मीदवारों का ऐलान कर दिया और सभी ने नामांकन भी दाखिल कर दिया। इस सूची में राष्ट्रीय लोकदल (रालोद) अध्यक्ष और केंद्रीय मंत्री जयंत चौधरी का नाम नहीं है। इससे उन चर्चाओं पर फिलहाल विराम लग गया है, जिनमें भाजपा के सहयोग से जयंत को दोबारा राज्यसभा भेजे जाने की संभावना जताई जा रही थी।

सपा के समर्थन से राज्यसभा पहुंचे थे जयंत

जयंत चौधरी जुलाई 2022 में सपा-रालोद के संयुक्त उम्मीदवार के तौर पर राज्यसभा पहुंचे थे। उस समय उत्तर प्रदेश विधानसभा में रालोद के आठ विधायक थे, जबकि सपा और उसके सहयोगी दलों के समर्थन से गठबंधन के पास तीन उम्मीदवार जिताने की स्थिति थी। जयंत को तीसरे उम्मीदवार के तौर पर राज्यसभा भेजा गया था।

इसके बाद खतौली उपचुनाव में जीत के साथ रालोद के विधायकों की संख्या नौ हो गई। हालांकि, 2024 के लोकसभा चुनाव से पहले रालोद ने सपा का साथ छोड़कर एनडीए का दामन थाम लिया।

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भाजपा की लिस्ट से बदला समीकरण

रालोद के एनडीए में जाने के बाद यह चर्चा शुरू हुई थी कि जिस राज्यसभा सीट तक जयंत सपा के समर्थन से पहुंचे थे, उसका सियासी ‘एहसान’ भाजपा के सहयोग से चुकाया जा सकता है। लेकिन भाजपा की घोषित सूची में जयंत का नाम नहीं आया। पार्टी ने धर्मपाल सिंह, राधाकांत ओझा, प्रकाश पाल, विद्यासागर सोनकर, गोपी कृष्ण पांडेय, प्रियंका सिंह रावत, राम प्रताप सिंह चौहान और श्रुति गंगवार को उम्मीदवार बनाया है।

हालांकि, जयंत की मौजूदा राज्यसभा सदस्यता जुलाई 2028 तक है। ऐसे में इस चुनाव में नाम न आने का मतलब उनकी मौजूदा सदस्यता खत्म होना नहीं है।

अब अखिलेश यादव के रुख पर नजर

जयंत और अखिलेश के रिश्तों में पिछले कुछ समय में तल्खी की चर्चा रही है। अखिलेश यादव ने बिना नाम लिए ‘चवन्नी का रुपया’ बनने के बाद साथ छोड़ने की टिप्पणी की थी। इसके जवाब में जयंत चौधरी ने इसे जाट समाज के अपमान से जोड़कर पलटवार किया था।

अब भाजपा की राज्यसभा सूची में जयंत का नाम नहीं होने के बाद दोनों नेताओं के पुराने राजनीतिक समीकरण एक बार फिर चर्चा में हैं। हालांकि, इससे आगे अखिलेश यादव क्या रुख अपनाते हैं, इसे लेकर फिलहाल कोई आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है। राज्यसभा चुनाव के साथ-साथ 2027 के यूपी विधानसभा चुनाव की तैयारियां भी इस पूरे घटनाक्रम को और अहम बना रही हैं।

Location :  Lucknow

Published :  7 October 2026, 10:38 AM IST