UP चुनाव पर बड़ा सियासी मंथन: दिल्ली में राहुल गांधी और अखिलेश यादव की बैठक, सीटों पर चर्चा तेज

इंडिया गठबंधन की बैठक में भाजपा के खिलाफ एकजुटता तो दिखी, लेकिन अंदर ही अंदर कांग्रेस और क्षेत्रीय दलों के बीच शक्ति संतुलन को लेकर मतभेद भी उभरते नजर आए। अखिलेश यादव और तेजस्वी यादव ने कांग्रेस की भूमिका पर सवाल उठाते हुए क्षेत्रीय दलों की ताकत को रेखांकित किया।

Post Published By: Suresh Prajapati
Updated : 9 June 2026, 12:59 PM IST

New Delhi: इंडिया गठबंधन की बैठक में जहां एक ओर भाजपा के खिलाफ मजबूत एकजुटता का संदेश दिया गया, वहीं दूसरी ओर अंदरूनी राजनीति की झलक भी साफ नजर आई। बैठक के दौरान कांग्रेस और क्षेत्रीय दलों के बीच भविष्य के शक्ति संतुलन को लेकर असहमति के संकेत सामने आए। समाजवादी पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव और राष्ट्रीय जनता दल के नेता तेजस्वी यादव ने कांग्रेस नेतृत्व को स्पष्ट संदेश देते हुए कहा कि विपक्षी एकता तभी मजबूत रह सकती है जब क्षेत्रीय दलों की राजनीतिक ताकत को उचित सम्मान मिले।

कांग्रेस को मिला स्पष्ट संदेश

बैठक में अखिलेश यादव ने यह मुद्दा उठाया कि विपक्षी गठबंधन में कांग्रेस को अधिक समन्वयकारी और उदार भूमिका निभानी चाहिए। उन्होंने कहा कि गठबंधन को मजबूत बनाए रखने की जिम्मेदारी सबसे बड़ी राष्ट्रीय पार्टी होने के नाते कांग्रेस की है। साथ ही उन्होंने द्रमुक और आम आदमी पार्टी की अनुपस्थिति का भी मुद्दा उठाते हुए संगठनात्मक एकजुटता पर सवाल खड़े किए।

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राजनीतिक गणित बना चर्चा का केंद्र

अखिलेश यादव ने बैठक में उत्तर प्रदेश का उदाहरण देते हुए पिछले लोकसभा चुनाव के आंकड़ों का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि समाजवादी पार्टी ने गठबंधन के तहत कांग्रेस को 17 सीटें दी थीं, जिनमें कांग्रेस 6 सीटें जीतने में सफल रही। उनका संकेत था कि गठबंधन की सफलता केवल किसी एक दल की वजह से नहीं, बल्कि क्षेत्रीय दलों के मजबूत आधार और संगठनात्मक ताकत के कारण संभव हुई।

सपा की रणनीति

लोकसभा चुनाव में 37 सीटें जीतकर समाजवादी पार्टी उत्तर प्रदेश में सबसे बड़ी विपक्षी ताकत बनकर उभरी थी। इसी आधार पर पार्टी नेतृत्व यह संदेश देने की कोशिश कर रहा है कि यूपी की राजनीति में उसकी भूमिका निर्णायक है। 2027 विधानसभा चुनाव से पहले सपा अपनी स्थिति को और मजबूत करने के लिए गठबंधन में अपने महत्व को लगातार रेखांकित कर रही है।

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कांग्रेस का प्रदर्शन और गठबंधन की राजनीति का समीकरण

2022 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस ने 399 सीटों पर चुनाव लड़ा था, लेकिन केवल 2 सीटों पर जीत हासिल कर सकी थी। हालांकि गठबंधन राजनीति में शामिल होने के बाद लोकसभा चुनाव में उसका प्रदर्शन बेहतर रहा। इसी अनुभव के आधार पर क्षेत्रीय दल यह तर्क दे रहे हैं कि उनकी जमीनी ताकत ही गठबंधन की वास्तविक नींव है।

एकता के साथ दबाव की राजनीति भी जारी

गठबंधन के भीतर यह भी साफ दिख रहा है कि जहां एक ओर भाजपा के खिलाफ संयुक्त मोर्चा बनाने की बात हो रही है, वहीं दूसरी ओर क्षेत्रीय दल अपने-अपने राज्यों में कांग्रेस की भूमिका को सीमित रखना चाहते हैं। तृणमूल कांग्रेस, द्रमुक, राजद और सपा जैसे दल अपने राज्यों में नेतृत्वकारी भूमिका बनाए रखना चाहते हैं, जबकि कांग्रेस को सहयोगी के रूप में देखना चाहते हैं।

Location :  New Delhi

Published :  9 June 2026, 12:59 PM IST