कभी अपनों ने ही रोका था रास्ता, अब बनेंगे कर्नाटक के CM, जानिए कैसे डीके शिवकुमार बने कांग्रेस के सबसे भरोसेमंद सिपहसालार

सिद्धारमैया के इस्तीफे के बाद कर्नाटक में डीके शिवकुमार का सीएम बनना लगभग तय है। कभी पार्टी के 16 मंत्रियों ने जिनके खिलाफ मोर्चा खोला था, आज वही शिवकुमार 'पावर सेंटर' कैसे बने? जानिए उनकी एक दशक लंबी राजनीतिक जंग की इनसाइड स्टोरी।

Post Published By: Poonam Rajput
Updated : 30 May 2026, 10:11 AM IST

Bengaluru: कर्नाटक की सियासत में एक बार फिर बड़ा उलटफेर देखने को मिल रहा है। मुख्यमंत्री सिद्धारमैया के इस्तीफे के बाद अब राज्य की कमान डीके शिवकुमार के हाथों में आना लगभग तय माना जा रहा है। कांग्रेस विधायक दल की बैठक में जल्द ही उनके नाम पर मुहर लग सकती है।

लेकिन, डीके शिवकुमार का मुख्यमंत्री की कुर्सी तक पहुँचना कोई अचानक हुआ चमत्कार नहीं है। यह कहानी है एक दशक लंबे कड़े राजनीतिक संघर्ष, रणनीतिक धैर्य और अपनी ही पार्टी के भीतर की गुटबाजी को मात देने की। सिद्धारमैया और शिवकुमार के बीच का राजनीतिक मतभेद और वर्चस्व की जंग करीब दस साल पुरानी है।

जब सिद्धारमैया ने खेल दिया था 'फुटबॉल'

यह किस्सा साल 2016 का है, जब सोनिया गांधी ने अनौपचारिक तौर पर डीके शिवकुमार को कर्नाटक प्रदेश कांग्रेस कमेटी (KPCC) का अध्यक्ष बनाने का संकेत दिया था। शिवकुमार एक महीने के लिए अमेरिका चले गए, लेकिन इसी दौरान सिद्धारमैया ने पार्टी के भीतर उनके खिलाफ तगड़ी घेराबंदी कर दी।

हाईकमान ने जब कर्नाटक के 16 मंत्रियों से राय ली, तो रोशन बेग को छोड़कर किसी ने शिवकुमार का समर्थन नहीं किया। नतीजा यह हुआ कि शिवकुमार का पत्ता कट गया। बाद में एक इंटरव्यू में शिवकुमार ने दर्द बयां करते हुए कहा था, "मैं शतरंज खेलना चाहता था, लेकिन सिद्धारमैया ने फुटबॉल खेल दिया।"

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2013 से शुरू हुई वर्चस्व की जंग

दोनों नेताओं के बीच तनाव की शुरुआत 2013 में ही हो गई थी, जब सिद्धारमैया पहली बार मुख्यमंत्री बने थे। वह अपनी सरकार की साफ-सुथरी छवि चाहते थे और कथित अवैध खनन व जमीन मामलों के आरोपों के कारण शिवकुमार को कैबिनेट में जगह नहीं देना चाहते थे। हालांकि, शिवकुमार ने हार नहीं मानी और हाईकमान पर दबाव बनाकर 2014 में मंत्री पद हासिल कर लिया। उन्हें हमेशा से मालूम था कि 2018 में भले मौका न मिले, लेकिन उनका असली समय आगे आएगा।

तिहाड़ जेल की वो मुलाकात और 'संकटमोचक' का कमबैक

साल 2019 डीके शिवकुमार के जीवन का सबसे कठिन दौर था, जब वे मनी लॉन्ड्रिंग मामले में गिरफ्तार होकर दिल्ली की तिहाड़ जेल पहुंचे। लेकिन इसी संकट ने उनके लिए नए रास्ते खोले। तत्कालीन कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी खुद उनसे मिलने जेल पहुचीं, जिसने एक बड़ा राजनीतिक संदेश दिया। जेल से बाहर आने के बाद शिवकुमार के प्रति जनता और कार्यकर्ताओं में सहानुभूति की लहर दौड़ गई।

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organización को मजबूत कर बने अजेय योद्धा

जुलाई 2020 में KPCC अध्यक्ष का पद संभालने के बाद शिवकुमार ने बूथ स्तर तक संगठन को दोबारा खड़ा किया। उनकी इसी आक्रामक रणनीति का नतीजा था कि 2023 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस ने प्रचंड बहुमत के साथ सत्ता में वापसी की। 2016 में जिस नेता को अपनों ने ही हाशिए पर धकेल दिया था, आज वही डीके शिवकुमार रणनीतिक धैर्य और संघर्ष के दम पर कर्नाटक कांग्रेस का सबसे बड़ा 'पावर सेंटर' बनकर उभरे हैं।

Location :  Bengaluru

Published :  30 May 2026, 8:54 AM IST