
मनीष सिसोदिया, संजय सिंह और अरविंद केजरीवाल को नोटिस
New Delhi : दिल्ली की राजनीति और न्यायपालिका के बीच टकराव अब खुलकर सामने आता दिख रहा है। आबकारी नीति मामले की सुनवाई के बीच आम आदमी पार्टी और दिल्ली हाई कोर्ट के बीच बढ़ा विवाद अब कानूनी और राजनीतिक दोनों स्तरों पर बड़ा मुद्दा बन गया है। अदालत ने इस पूरे घटनाक्रम को न्यायपालिका की गरिमा से जुड़ा गंभीर मामला मानते हुए सख्त रुख अपनाया है।
दिल्ली हाई कोर्ट ने आपराधिक अवमानना (क्रिमिनल कॉन्टेम्प्ट) के एक स्वत संज्ञान मामले में आम आदमी पार्टी (आप) के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल, पूर्व उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया, सांसद संजय सिंह सहित अन्य आप नेताओं को नोटिस जारी किया है। न्यायमूर्ति स्वराना कांता शर्मा द्वारा शुरू किए गए इस मामले में आरोप है कि शराब नीति मामले में न्यायमूर्ति शर्मा की अदालत से रिक्यूजल याचिका खारिज होने के बाद 20 अप्रैल को आप नेताओं ने अदालत का बहिष्कार किया और सोशल मीडिया पोस्ट, वीडियो तथा पत्रों के माध्यम से उनके खिलाफ अपमानजनक और मानहानिकारक टिप्पणियां कीं।
दो-न्यायाधीशों की पीठ, जिसमें न्यायमूर्ति नवीन चावला और न्यायमूर्ति रवींद्र डुडेजा शामिल हैं, ने सभी आरोपियों को जवाब दाखिल करने के लिए चार सप्ताह का समय दिया है। अदालत ने मामले में न्याय मित्र नियुक्त किया है तथा सभी इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड्स को संरक्षित रखने का आदेश दिया है। मामले की अगली सुनवाई 4 अगस्त को होगी।
आप नेताओं पर आरोप है कि उन्होंने न्यायाधीश की निष्पक्षता पर सवाल उठाते हुए अपमानजनक भाषा का प्रयोग किया, जिसे अदालत ने न्यायपालिका की गरिमा के खिलाफ माना है। अदालत ने साफ संकेत दिए हैं कि न्यायिक संस्थाओं के खिलाफ सार्वजनिक मंचों पर की गई टिप्पणियों को हल्के में नहीं लिया जाएगा।
न्यायमूर्ति स्वर्णकांता शर्मा ने कहा था कि वे आबकारी नीति मामले के कुछ बरी किए गए आरोपियों द्वारा सोशल मीडिया पर उनके और अदालत के खिलाफ की गई अत्यंत अपमानजनक, मानहानिकारक और घृणित टिप्पणियों पर चुप नहीं रह सकती हैं। न्यायमूर्ति ने कहा कि उनके संज्ञान में आया है कि कुछ प्रत्यर्थी अदालत और न्यायाधीश के खिलाफ अवमाननापूर्ण सामग्री पोस्ट कर रहे हैं। जिसे नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।
Location : New Delhi
Published : 19 May 2026, 2:03 PM IST