PAC की पहली बैठक में कांग्रेस नेता केसी वेणुगोपाल को झेलना पड़ा भाजपा सांसदों का विरोध

शुक्रवार को संसद भवन एनेक्सी में सत्ता और विपक्ष के सांसदों की गहमा-गहमी विभिन्न समितियों की बैठकों में दिखी। पूरी खबर डाइनामाइट न्यूज़ पर

Post Published By: Nitin Parashar
Updated : 22 May 2026, 6:05 PM IST

New Delhi : संसद का सत्र भले ही इस समय नहीं चल रहा हो, लेकिन संसद की विभिन्न समितियों की बैठकें लगातार जारी हैं। इसी कड़ी में शुक्रवार को संसद भवन एनेक्सी में लोक लेखा समिति 2026-27 की पहली बैठक आयोजित हुई। बैठक में “नियामक संस्थाओं की कार्यप्रणाली की समीक्षा” तथा “बैंकिंग और बीमा क्षेत्र में सुधार” जैसे विषयों पर चर्चा प्रस्तावित थी।

बैठक में सेबी प्रमुख, आरबीआई गवर्नर, IRDAI अध्यक्ष और PFRDA चेयरमैन जैसे नियामक संस्थाओं के प्रमुखों को बुलाने के प्रस्ताव पर चर्चा हुई लेकिन भाजपा के वरिष्ठ सांसद डॉ. निशिकांत दुबे, जगदंबिका पाल, अपराजिता सारंगी, सुधांशु त्रिवेदी, के. लक्ष्मण और बालाशौरी वल्लभनेनी ने इसका कड़ा विरोध किया।

डाइनामाइट न्यूज़ संवाददाता के अनुसार इन सांसदों का तर्क था कि यह लोक लेखा समिति के अधिकार क्षेत्र से बाहर है। उनका कहना था कि पीएसी किसी भी रेग्युलेटर को तलब नहीं कर सकती, क्योंकि यह अधिकार संसदीय स्थायी समिति ऑन फाइनेंस के पास है। इस समिति में लोकसभा और राज्यसभा के कुल 22 सदस्य शामिल हैं। समिति के अध्यक्ष कांग्रेस सांसद के.सी. वेणुगोपाल हैं।

बैठक के बाद वेणुगोपाल ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर लिखा, “सार्वजनिक लेखा समिति (2026-27) की पहली बैठक की अध्यक्षता की। पिछली सार्वजनिक लेखा समिति (2025-26) ने सफलतापूर्वक संसद में 26 रिपोर्ट प्रस्तुत की थीं। ऑडिट पैरा मॉनिटरिंग सिस्टम में लंबित मामलों का भारी बैकलॉग गंभीर चिंता का विषय है।

वर्तमान में विभिन्न मंत्रालयों और विभागों के पास 1500 से अधिक एटीएन (Action Taken Notes) लंबित हैं। देश में सार्वजनिक व्यय की जटिल प्रकृति को देखते हुए, नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (C&AG) की ऑडिट टिप्पणियों पर अधिक सहयोगात्मक और त्वरित प्रतिक्रिया समय की आवश्यकता है।”

लोक लेखा समिति (PAC) संसद की एक महत्वपूर्ण स्थायी समिति है, जिसकी स्थापना वर्ष 1919 के भारत सरकार अधिनियम के तहत हुई थी। समिति का मुख्य कार्य नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) की ऑडिट रिपोर्टों की जांच करना होता है। यह समिति सुनिश्चित करती है कि सरकार द्वारा किया गया व्यय संसद द्वारा स्वीकृत अनुदानों और कानूनी प्रावधानों के अनुरूप हो तथा कहीं धन का दुरुपयोग, अपव्यय या अनियमित खर्च न हुआ हो।

लोक लेखा समिति वित्तीय अनियमितताओं, अतिरिक्त व्यय, सार्वजनिक उपक्रमों के वित्तीय विवरणों तथा प्रशासनिक कार्यकुशलता की भी समीक्षा करती है। इसके आधार पर समिति सरकार को सुझाव और सिफारिशें देती है, जिससे वित्तीय जवाबदेही मजबूत हो तथा सुशासन को बढ़ावा मिले। इस प्रकार PAC संसद की वित्तीय निगरानी व्यवस्था का एक प्रमुख स्तंभ मानी जाती है।

उधर, तृणमूल कांग्रेस सांसद डोला सेन की अध्यक्षता वाली संसदीय स्थायी समिति ऑन कॉमर्स की एक अन्य बैठक भी संसद भवन में आयोजित हुई।

बैठक में भारत-अमेरिका व्यापार समझौते और अमेरिकी टैरिफ जैसे मुद्दों पर चर्चा के लिए FICCI, CII, FIEO के प्रतिनिधियों तथा कौशल विकास डाइनामाइट न्यूज़ संवाददाता के अनुसार, विरोधस्वरूप भाजपा के किसी भी सांसद ने इन प्रतिनिधियों से कोई प्रश्न नहीं पूछा। इस समिति में अध्यक्ष सहित सत्ता पक्ष और विपक्ष के कुल 29 सांसद शामिल हैं।

बैठक के बाद डोला सेन ने भारत-अमेरिका संबंधों पर कहा, “संभावनाएं काफी हैं, लेकिन कुछ सीमाएं भी हैं। वाणिज्य संबंधी संसदीय स्थायी समिति की अध्यक्ष होने के नाते हम दोनों पहलुओं पर काम कर रहे हैं। अभी सभी हितधारकों के साथ हमारी चर्चा और संवाद प्रक्रिया पूरी नहीं हुई है। इसके बाद हम अपनी रिपोर्ट तैयार कर उसे सार्वजनिक डोमेन में जारी करेंगे और संसद पटल पर रखेंगे।”

Location :  New Delhi

Published :  22 May 2026, 5:58 PM IST