‘धन ही इनका धर्म है’, विवादित कथाकारों पर अखिलेश यादव का तीखा हमला, आयोजकों को चेतावनी

समाज में वैमनस्य फैलाने वाले कथाकारों पर अखिलेश यादव ने तीखा हमला बोला है। सपा अध्यक्ष ने आयोजकों और प्रायोजकों को चेतावनी देते हुए कहा कि ऐसे लोगों को मंच देने से जनता का आक्रोश झेलना पड़ सकता है। उन्होंने सच्चे विचारकों और विद्वानों को धार्मिक आयोजनों में आमंत्रित करने की अपील की।

Post Published By: Suresh Prajapati
Updated : 5 November 2026, 4:35 PM IST

Lucknow: समाज में धार्मिक आयोजनों के मंच से विवादित बयान देने वाले कथाकारों और कथावाचकों को लेकर सियासी घमासान तेज हो गया है। समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने ऐसे कथाकारों को बुलाने वाले आयोजकों और प्रायोजकों को सीधे चेतावनी दी है। उन्होंने कहा कि अपने बयानों से सामाजिक वैमनस्य पैदा करने वाले तथाकथित कथाकारों को मंच देने वालों को जनता के आक्रोश का सामना करना पड़ सकता है। अखिलेश ने दावा किया कि ऐसे लोगों को बुलाने से राजनीतिक लाभ की उम्मीद रखने वालों को उल्टा सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक नुकसान उठाना पड़ सकता है।

विवादित बयानों वाले कथाकारों से दूर रहने की अपील

अखिलेश यादव ने बयान जारी कर 'दुष्मुखी' लोगों के संबंध में शासन-प्रशासन के साथ ही उनके कार्यक्रम आयोजित करने वाले आयोजकों और प्रायोजकों से विनम्र आग्रह किया कि वे ऐसे तथाकथित कथाकारों से दूर रहें। उन्होंने कहा कि कुछ लोग बोलने और पहनने के तरीके से कथावाचक दिखाई देते हैं, लेकिन उनके लिए कथा और प्रवचन व्यवसाय बन चुके हैं। अखिलेश के मुताबिक, ऐसे लोग समय-समय पर अपनी भौतिक उपलब्धियों का भोंडा प्रदर्शन करते रहते हैं और सस्ती लोकप्रियता हासिल करने के लिए अनर्गल बातें करते हैं।

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प्रायोजकों को भुगतना पड़ सकता है जनता का आक्रोश

अखिलेश यादव ने कहा कि ऐसे कथाकार अपने विवादित बयानों के बाद राजनीतिक प्रश्रय पाकर बच निकल सकते हैं, लेकिन आयोजकों और प्रायोजकों को उसी शहर में जनता के बीच रहना होता है। उनके अनुसार, इन कथाकारों के बयानों से पैदा होने वाले सामाजिक वैमनस्य का सामना स्थानीय आयोजकों और प्रायोजकों को करना पड़ सकता है। उन्होंने कहा कि जब जनता ऐसे कथाकारों को सीधे जवाब नहीं दे पाएगी, तो वह उन्हें आमंत्रित करने वाले आयोजकों और प्रायोजकों को ही अपने आक्रोश का निशाना बना सकती है।

अखिलेश के मुताबिक, आस्थावान और श्रद्धालु लोगों को यह लग सकता है कि भगवान के बारे में अपशब्द या गलत विचार व्यक्त करने वाले कथाकारों के विचारों से कार्यक्रम आयोजित करने वाले लोग भी सहमत हैं। इससे स्थानीय स्तर पर आयोजकों और प्रायोजकों के प्रति विरोध की भावना पैदा हो सकती है। सपा अध्यक्ष ने चेताया कि ऐसे लोगों को बुलाकर स्थानीय स्तर पर अपनी धाक जमाने की कोशिश करने वालों को सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक नुकसान उठाना पड़ सकता है। उन्होंने कहा कि जनता की नजर में ऐसे आयोजकों की धर्म और भगवान विरोधी छवि बन सकती है।

'खाई पैदा करने वालों को बढ़ावा न दें'

अखिलेश यादव ने आयोजकों और प्रायोजकों से दोबारा आग्रह किया कि वे समाज और सनातन के बीच खाई पैदा करने वाले लोगों को बढ़ावा न दें। उन्होंने कहा कि ऐसे लोगों को मंच और समर्थन देकर उनकी 'विषबेल' को बढ़ाने से बचना चाहिए। सपा अध्यक्ष ने यह भी कहा कि आयोजकों और प्रायोजकों को ऐसे कथाकारों के विवादित बयानों का भागीदार नहीं बनना चाहिए।

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सच्चे विचारकों और विद्वानों को मंच देने की अपील

अखिलेश यादव ने अपने बयान में यह भी कहा कि देश में ऐसे अनेक सच्चे विचारक और वाचक उपलब्ध हैं, जो वैदिक और औपनिषदिक ज्ञान की गहराइयों को समझते हैं तथा महाकाव्यों के संदेशों की ऊंचाइयों तक पहुंच रखते हैं। उन्होंने ऐसे सहृदय, सुभाषी और विद्वान लोगों को धार्मिक आयोजनों में आमंत्रित करने की अपील की। सपा अध्यक्ष ने कहा कि आयोजकों और प्रायोजकों को ऐसे लोगों को मंच देना चाहिए, जो मानवीय जीवन को बेहतर बनाने में योगदान कर सकें। उनके मुताबिक, धार्मिक आयोजनों में ऐसे विद्वानों की भागीदारी से समाज को सकारात्मक संदेश मिल सकता है और लोगों के बीच सद्भाव कायम रखने में मदद मिल सकती है।

Location :  Lucknow

Published :  5 November 2026, 4:35 PM IST