Father’s Day 2026: पत्नी की मौत के बाद अकेले पाले 6 बच्चे, बेटी के एक फैसले ने बदल दिया दुनिया का इतिहास!
Father's Day हर साल जून के तीसरे रविवार को मनाया जाता है। इसकी शुरुआत अमेरिका की सोनोरा स्मार्ट डोड ने अपने पिता विलियम जैक्सन के संघर्ष और 6 बच्चों की अकेले परवरिश करने के सम्मान में की थी। 19 जून 1910 को यह पहली बार मनाया गया और 1972 में इसे आधिकारिक मान्यता मिली।
पिता के अनमोल त्याग और समर्पण का उत्सव आज पूरी दुनिया में फादर्स डे (पितृ दिवस) बेहद उत्साह और सम्मान के साथ मनाया जा रहा है। हर साल जून महीने के तीसरे रविवार को मनाया जाने वाला यह खास दिन एक पिता के निस्वार्थ प्यार, अंतहीन त्याग, सही मार्गदर्शन और परिवार के प्रति उनके अद्वितीय समर्पण को सलाम करने का अवसर है। एक बच्चा जब भी मुश्किल में होता है, तो पिता उसकी सुरक्षा की सबसे मजबूत ढाल बनकर खड़ा हो जाता है। उनके इसी मौन प्रेम के प्रति आभार व्यक्त करने के लिए आज का दिन समर्पित है, लेकिन क्या आप जानते हैं कि दुनिया भर में इस दिन को मनाने की शुरुआत कैसे और क्यों हुई थी?
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सोनोरा स्मार्ट डोड के मन में उपजा पहला विचार फादर्स डे मनाने की शुरुआत के पीछे एक बेटी का अपने पिता के प्रति अगाध प्रेम और सम्मान की बेहद भावुक कहानी छिपी है। इस खास दिन को शुरू करने का पूरा श्रेय अमेरिका की रहने वाली सोनोरा स्मार्ट डोड को जाता है। साल 1909 में जब सोनोरा ने चर्च में मदर्स डे (मातृ दिवस) के उपलक्ष्य में एक उपदेश सुना, तो उनके मन में विचार आया कि जिस तरह माताओं के त्याग को सम्मानित करने के लिए एक विशेष दिन समर्पित है, ठीक उसी तरह पिताओं को भी समाज में सार्वजनिक रूप से सम्मान मिलना चाहिए।
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6 बच्चों को अकेले पालने वाले पिता की अनूठी दास्तान सोनोरा के इस विचार के पीछे उनके अपने पिता विलियम जैक्सन स्मार्ट की जिंदगी का संघर्ष था। विलियम एक गृहयुद्ध (Civil War) के अनुभवी सिपाही थे। उनकी पत्नी (सोनोरा की मां) की प्रसव के दौरान असामयिक मृत्यु हो गई थी। इसके बाद विलियम ने दूसरी शादी नहीं की और अकेले ही अपने सभी छह बच्चों को न सिर्फ पाला, बल्कि उन्हें एक बेहतरीन परवरिश और संस्कार भी दिए। पिता की इसी कड़ी मेहनत, अकेलेपन के संघर्ष और असीम समर्पण को देखकर सोनोरा ने पिताओं के सम्मान में एक आंदोलन शुरू करने का फैसला किया।
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19 जून 1910 को पहली बार मनाया गया फादर्स डे सोनोरा की इस नेक कोशिश को स्थानीय लोगों और प्रशासन का जबरदस्त समर्थन मिला। चूंकि उनके पिता विलियम का जन्मदिन जून के महीने में आता था, इसलिए सोनोरा ने इस दिन को मनाने के लिए जून का महीना प्रस्तावित किया। इसके बाद 19 जून 1910 को वाशिंगटन के स्पोकेन शहर में दुनिया का पहला आधिकारिक फादर्स डे मनाया गया।
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आधिकारिक और राष्ट्रीय अवकाश की मान्यता शुरुआत के कई दशकों बाद इस दिन को कानूनी मान्यता मिली। साल 1966 में तत्कालीन अमेरिकी राष्ट्रपति लिंडन बी. जॉनसन ने पहली बार एक राष्ट्रपति घोषणा पत्र जारी कर जून के तीसरे रविवार को आधिकारिक तौर पर फादर्स डे के रूप में घोषित किया। इसके बाद साल 1972 में राष्ट्रपति रिचर्ड निक्सन ने इस पर हस्ताक्षर कर इसे हमेशा के लिए एक राष्ट्रीय अवकाश और आधिकारिक पर्व का दर्जा दे दिया।
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जहां भारत, अमेरिका, ब्रिटेन और कनाडा सहित दुनिया के अधिकांश देशों में जून के तीसरे रविवार को फादर्स डे मनाया जाता है, वहीं पुर्तगाल, स्पेन और इटली जैसे कई यूरोपीय देशों में इसे 19 मार्च को 'सेंट जोसेफ डे' के रूप में मनाया जाता है।
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समय के साथ यह दिन पूरी तरह से एक वैश्विक उत्सव बन चुका है। आज के दिन बच्चे अपने पिताओं को ग्रीटिंग कार्ड्स, कस्टमाइज्ड गिफ्ट्स, घड़ियां और उनके पसंदीदा गैजेट्स उपहार में देकर या उनके लिए विशेष डिनर प्लान करके इस दिन को यादगार बनाते हैं।
पिता के अनमोल त्याग और समर्पण का उत्सव आज पूरी दुनिया में फादर्स डे (पितृ दिवस) बेहद उत्साह और सम्मान के साथ मनाया जा रहा है। हर साल जून महीने के तीसरे रविवार को मनाया जाने वाला यह खास दिन एक पिता के निस्वार्थ प्यार, अंतहीन त्याग, सही मार्गदर्शन और परिवार के प्रति उनके अद्वितीय समर्पण को सलाम करने का अवसर है। एक बच्चा जब भी मुश्किल में होता है, तो पिता उसकी सुरक्षा की सबसे मजबूत ढाल बनकर खड़ा हो जाता है। उनके इसी मौन प्रेम के प्रति आभार व्यक्त करने के लिए आज का दिन समर्पित है, लेकिन क्या आप जानते हैं कि दुनिया भर में इस दिन को मनाने की शुरुआत कैसे और क्यों हुई थी?
सोनोरा स्मार्ट डोड के मन में उपजा पहला विचार फादर्स डे मनाने की शुरुआत के पीछे एक बेटी का अपने पिता के प्रति अगाध प्रेम और सम्मान की बेहद भावुक कहानी छिपी है। इस खास दिन को शुरू करने का पूरा श्रेय अमेरिका की रहने वाली सोनोरा स्मार्ट डोड को जाता है। साल 1909 में जब सोनोरा ने चर्च में मदर्स डे (मातृ दिवस) के उपलक्ष्य में एक उपदेश सुना, तो उनके मन में विचार आया कि जिस तरह माताओं के त्याग को सम्मानित करने के लिए एक विशेष दिन समर्पित है, ठीक उसी तरह पिताओं को भी समाज में सार्वजनिक रूप से सम्मान मिलना चाहिए।
6 बच्चों को अकेले पालने वाले पिता की अनूठी दास्तान सोनोरा के इस विचार के पीछे उनके अपने पिता विलियम जैक्सन स्मार्ट की जिंदगी का संघर्ष था। विलियम एक गृहयुद्ध (Civil War) के अनुभवी सिपाही थे। उनकी पत्नी (सोनोरा की मां) की प्रसव के दौरान असामयिक मृत्यु हो गई थी। इसके बाद विलियम ने दूसरी शादी नहीं की और अकेले ही अपने सभी छह बच्चों को न सिर्फ पाला, बल्कि उन्हें एक बेहतरीन परवरिश और संस्कार भी दिए। पिता की इसी कड़ी मेहनत, अकेलेपन के संघर्ष और असीम समर्पण को देखकर सोनोरा ने पिताओं के सम्मान में एक आंदोलन शुरू करने का फैसला किया।
19 जून 1910 को पहली बार मनाया गया फादर्स डे सोनोरा की इस नेक कोशिश को स्थानीय लोगों और प्रशासन का जबरदस्त समर्थन मिला। चूंकि उनके पिता विलियम का जन्मदिन जून के महीने में आता था, इसलिए सोनोरा ने इस दिन को मनाने के लिए जून का महीना प्रस्तावित किया। इसके बाद 19 जून 1910 को वाशिंगटन के स्पोकेन शहर में दुनिया का पहला आधिकारिक फादर्स डे मनाया गया।
आधिकारिक और राष्ट्रीय अवकाश की मान्यता शुरुआत के कई दशकों बाद इस दिन को कानूनी मान्यता मिली। साल 1966 में तत्कालीन अमेरिकी राष्ट्रपति लिंडन बी. जॉनसन ने पहली बार एक राष्ट्रपति घोषणा पत्र जारी कर जून के तीसरे रविवार को आधिकारिक तौर पर फादर्स डे के रूप में घोषित किया। इसके बाद साल 1972 में राष्ट्रपति रिचर्ड निक्सन ने इस पर हस्ताक्षर कर इसे हमेशा के लिए एक राष्ट्रीय अवकाश और आधिकारिक पर्व का दर्जा दे दिया।
जहां भारत, अमेरिका, ब्रिटेन और कनाडा सहित दुनिया के अधिकांश देशों में जून के तीसरे रविवार को फादर्स डे मनाया जाता है, वहीं पुर्तगाल, स्पेन और इटली जैसे कई यूरोपीय देशों में इसे 19 मार्च को ‘सेंट जोसेफ डे’ के रूप में मनाया जाता है।
समय के साथ यह दिन पूरी तरह से एक वैश्विक उत्सव बन चुका है। आज के दिन बच्चे अपने पिताओं को ग्रीटिंग कार्ड्स, कस्टमाइज्ड गिफ्ट्स, घड़ियां और उनके पसंदीदा गैजेट्स उपहार में देकर या उनके लिए विशेष डिनर प्लान करके इस दिन को यादगार बनाते हैं।