Dussehra or Vijayadashami (5)

कथा है कि अयोध्या के प्रतापी राजा रघु ने अपनी सारी संपत्ति दान कर दी थी। जब कौत्स नामक ऋषि ने उनसे गुरुदक्षिणा के लिए स्वर्ण मुद्राएं मांगीं, तो राजा ने धन के देवता कुबेर पर आक्रमण करने की योजना बनाई। इससे घबराकर कुबेर ने शमी और अश्मंतक के पेड़ों पर सोने की मुद्राओं की बारिश कर दी। राजा रघु ने वह धन ऋषि को दे दिया और बाकी प्रजा में बांट दिया। इसी कथा के कारण आज भी दशहरे पर लोग एक-दूसरे को शमी के पत्ते 'सोने' के प्रतीक के रूप में देकर शुभकामनाएं देते हैं। डिस्लेमर: इस आलेख में दी गई समस्त जानकारियां और पौराणिक कथाएं विभिन्न धार्मिक मान्यताओं, लोक कथाओं और ग्रंथों पर आधारित हैं। डाइनामाइट न्यूज़ इसकी पुष्टि नहीं करता है। (सोर्स- Pinterest)

Updated : 19 October 2026, 2:57 PM IST
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Published :  19 October 2026, 2:54 PM IST

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