
आप सांसद संजय सिंह (सोर्स इंटरनेट)
Lucknow: उत्तर प्रदेश में चल रहे स्कूल विलय विवाद पर सरकार को आखिरकार आंशिक रूप से झुकना पड़ा है। अब सरकार ने साफ निर्देश दिए हैं कि ऐसे स्कूल जिनमें 50 से कम छात्र नहीं हैं या जो एक किलोमीटर से अधिक दूर नहीं हैं, उनका विलय नहीं किया जाएगा। इस फैसले को आम आदमी पार्टी (AAP) और अभिभावकों ने “आंशिक जीत” करार दिया है। आप सांसद संजय सिंह ने इस मुद्दे पर सरकार को घेरते हुए कहा, “यह बच्चों, उनके माता-पिता और आंदोलनरत आम आदमी पार्टी के कार्यकर्ताओं की जीत है। सरकार अब बैकफुट पर है। लेकिन यह लड़ाई अभी खत्म नहीं हुई है।”
आप पार्टी लंबे समय से इस मुद्दे को लेकर ‘स्कूल बचाओ आंदोलन’ चला रही है। संजय सिंह ने बताया कि उन्होंने खुद कई प्रभावित स्कूलों का दौरा किया, जहां के छात्रों को 3-3 किलोमीटर दूर स्कूल भेजा जा रहा था। उन्होंने कहा, “ऐसे इलाकों में जंगल और जंगली जानवरों का खतरा है। ये बच्चों की सुरक्षा के साथ खिलवाड़ है।”
उन्होंने यह भी कहा कि इस विषय को सुप्रीम कोर्ट तक ले जाया गया और राज्यभर में आमजन के साथ मिलकर पैदल यात्राएं और धरने किए गए। संजय सिंह ने कहा कि जिन गांवों में स्कूल बंद किए जा रहे थे, वहां के बच्चे, मां-बाप और बुजुर्ग तक सड़क पर उतर आए।
सरकार ने अब शर्तों के साथ स्कूलों के विलय पर फिलहाल रोक लगा दी है, लेकिन सभी स्कूल नहीं बच पाएंगे। अभी भी सैकड़ों स्कूलों पर तलवार लटकी हुई है, जिन्हें “कम छात्रों की संख्या” या “निकटता” के आधार पर बंद किया जा सकता है।
संजय सिंह ने कहा, “हम सरकार के इस आंशिक फैसले का स्वागत करते हैं, लेकिन सभी स्कूलों को बचाने की लड़ाई जारी रहेगी।” उन्होंने एलान किया कि 2 अगस्त को लखनऊ में बड़ा ‘स्कूल बचाओ आंदोलन’ किया जाएगा, जिसमें प्रदेश भर के अभिभावक और छात्र शामिल होंगे।
इस फैसले से यह तो साफ हो गया कि जन दबाव और जनआंदोलन से सरकारें नीतियों में बदलाव कर सकती हैं। लेकिन क्या ये बदलाव स्थायी होंगे? क्या हजारों ग्रामीण बच्चों का भविष्य अब भी सुरक्षित है? यह आंदोलन के अगले चरणों से ही स्पष्ट हो पाएगा।
Location : Lucknow
Published : 31 July 2025, 9:24 PM IST
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