उत्तर प्रदेश में हजारों सरकारी स्कूलों के मर्जर पर समाजवादी पार्टी ने संसद में मोर्चा खोल दिया है। सपा नेताओं का आरोप है कि ये फैसला शिक्षा से गरीबों, दलितों और बेटियों को दूर करने की साजिश है। क्या ये मर्जर नीति विकास है या सामाजिक पिछड़ेपन की नई इबारत?

सपा का UP सरकार पर हमला (सोर्स इंटरनेट)
Lucknow: उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा सरकारी प्राथमिक विद्यालयों को मर्ज करने की नीति को लेकर समाजवादी पार्टी ने संसद से सड़क तक विरोध की जंग छेड़ दी है। पार्टी सांसद धर्मेंद्र यादव, लालजी वर्मा, नरेश उत्तम पटेल सहित अन्य नेताओं ने सरकार पर शिक्षा के अधिकार अधिनियम (RTE Act) के उल्लंघन का आरोप लगाया है और इस फैसले को तत्काल वापस लेने की मांग की है।
"बाबा साहेब अंबेडकर ने कहा था, जिस समाज को कमजोर करना हो, उसे शिक्षा से वंचित करो। यही नीति उत्तर प्रदेश सरकार अपना रही है। 5000 से ज्यादा स्कूलों का मर्जर कर दिया गया है और 2 लाख से अधिक शिक्षकों की भर्ती रोक दी गई है। ये गरीब, दलित, पिछड़े, आदिवासी, बुनकर और मजदूरों को शिक्षा से दूर करने की साजिश है।"
धर्मेंद्र यादव ने यह भी कहा कि जहां स्कूल बंद किए जा रहे हैं, वहीं 27 हजार से ज्यादा शराब की दुकानें उन इलाकों में खोल दी गई हैं। उन्होंने चेतावनी दी कि सपा सरकार बनने पर "पीडीए पाठशालाएं" शुरू कर शिक्षा के अधिकार की रक्षा की जाएगी और इस नीति के खिलाफ आंदोलन छेड़ा जाएगा।
"RTE अधिनियम के तहत हर एक किलोमीटर पर विद्यालय की अनिवार्यता है, लेकिन यूपी सरकार उल्टा कर रही है। स्कूल बंद होने से बच्चों की पढ़ाई ही नहीं रुकेगी, बल्कि रसोइयों, शिक्षामित्रों और सहायक कर्मचारियों का रोजगार भी छिन जाएगा।"
"स्कूलों को कम बच्चों की संख्या का हवाला देकर बंद किया जा रहा है, लेकिन गांव-गांव शराब के ठेके खोल दिए गए हैं। बेटियों को दो-तीन किलोमीटर दूर पढ़ने भेजना किस तरह की ‘बेटी पढ़ाओ’ नीति है? यह बाल श्रम, ड्रॉपआउट दर और सामाजिक असमानता को बढ़ावा देगा।"
नेताओं का कहना है कि यूपी की यह मर्जर नीति न केवल शिक्षा के अधिकार को ठेस पहुंचा रही है बल्कि सामाजिक विषमता को और गहरा कर रही है। विपक्ष का तर्क है कि यह कदम न सिर्फ आरटीई कानून का उल्लंघन है, बल्कि भारत के संवैधानिक मूल्यों पर भी सीधा हमला है।
इसी मामले को लेकर शून्यकाल में यह मुद्दा उठाते हुए समाजवादी पार्टी के धर्मेंद्र यादव ने आरोप लगाया कि ऐसे समय में जब पूरा देश आज़ादी की 75वीं वर्षगांठ मना रहा है, राज्य में निरंकुशता व्याप्त है। यादव ने कहा, "हमारे पास शिक्षा का अधिकार कानून होने के बावजूद, उत्तर प्रदेश में 1.26 लाख स्कूल बंद किए जा रहे हैं और 5,000 स्कूलों का विलय किया जा रहा है। 2 लाख से ज़्यादा शिक्षकों की भर्ती भी रुकी हुई है।"
उत्तर प्रदेश सरकार की 'स्कूल पेयरिंग' नीति के कारण जहाँ दलितों और गरीब परिवारों के बच्चे प्राथमिक शिक्षा से वंचित हो रहे हैं, वहीं राज्य में 27,000 से ज़्यादा शराब की दुकानें खुल रही हैं। नीरज मौर्य ने दुख जताया कि उत्तर प्रदेश में सरकारी स्कूलों की हालत "गंभीर" है और उन्हें बंद किया जा रहा है। मौर्य ने कहा, "जब अखिलेश यादव उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री थे, तब छात्रों को लैपटॉप दिए जा रहे थे। अब राज्य में शराब की दुकानें खुल रही हैं।"