CJP नेताओं सौरव दास और आशुतोष रांका को राहत मिलेगी या नहीं? आज हाईकोर्ट में सुनवाई

दिल्ली में जंतर-मंतर प्रदर्शन के बाद CJP नेताओं सौरव दास और आशुतोष रांका की मुश्किलें बढ़ गई हैं। दोनों केस क्राइम ब्रांच को ट्रांसफर कर दिए गए हैं। हिरासत बढ़ाने के आदेश को चुनौती देने वाली याचिका पर दिल्ली हाईकोर्ट में 21 अक्टूबर को सुनवाई होनी है...

Post Published By: Suresh Prajapati
Updated : 21 October 2026, 11:40 AM IST
New Delhi: दिल्ली के जंतर-मंतर पर प्रदर्शन के बाद कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के नेता सौरव दास और आशुतोष रांका की मुश्किलें बढ़ती नजर आ रही हैं। दोनों नेताओं के खिलाफ दर्ज मामलों की जांच अब दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच करेगी। इससे पहले कनॉट प्लेस से जुड़े मामले को क्राइम ब्रांच के हवाले किया गया था। अब दूसरा केस भी ट्रांसफर कर दिया गया है। इस बीच, दोनों नेताओं ने अपनी हिरासत बढ़ाने के विशेष कार्यकारी मजिस्ट्रेट के फैसले को दिल्ली हाईकोर्ट में चुनौती दी है। उनकी याचिका पर आज सुनवाई होनी है।

दोनों मामलों की जांच करेगी क्राइम ब्रांच

जंतर-मंतर पर हुए प्रदर्शन से जुड़े मामले में दिल्ली पुलिस ने सौरव दास और आशुतोष रांका के खिलाफ दर्ज दूसरे केस को भी क्राइम ब्रांच को सौंप दिया है। इससे पहले कनॉट प्लेस से संबंधित मामला जांच के लिए क्राइम ब्रांच को ट्रांसफर किया गया था। अब दोनों मामलों की जांच इसी शाखा के जिम्मे होगी। हालांकि, मामले की जांच से जुड़े आगे के कदमों को लेकर विस्तृत जानकारी सामने आना बाकी है।

हिरासत बढ़ाने के आदेश को हाईकोर्ट में चुनौती

सौरव दास और आशुतोष रांका ने विशेष कार्यकारी मजिस्ट्रेट के 19 अक्टूबर के आदेश को दिल्ली हाईकोर्ट में चुनौती दी है। इस आदेश के जरिए दोनों की हिरासत बढ़ाई गई थी। उनकी कानूनी टीम का कहना है कि बार-बार जमानतदार पेश करने के बावजूद दोनों नेताओं को रिहा नहीं किया गया।

वकीलों ने हिरासत जारी रखने के फैसले को मनमाना बताते हुए कहा है कि इससे संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत मिले व्यक्तिगत स्वतंत्रता के अधिकार का उल्लंघन होता है। याचिका में 19 अक्टूबर के आदेश को रद्द करने की मांग की गई है।

19 अक्टूबर को जमानतदार पेश करने के बाद भी नहीं मिली राहत

दोनों नेताओं के खिलाफ भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 126 और 170 के तहत एहतियाती कार्रवाई की गई है। ये प्रावधान शांति भंग होने की आशंका और संभावित अपराधों को रोकने से जुड़े हैं।

वकीलों के मुताबिक, 19 अक्टूबर को विशेष कार्यकारी मजिस्ट्रेट के सामने नए जमानतदार पेश किए गए थे, लेकिन उन्हें स्वीकार नहीं किया गया। मजिस्ट्रेट ने दोनों नेताओं से यह स्पष्ट करने को कहा कि उनकी रिहाई से शांति भंग होने की आशंका क्यों नहीं होगी। इसके बाद हिरासत जारी रखने के फैसले को लेकर कानूनी विवाद बढ़ गया।

एयरपोर्ट से हिरासत और फिर जंतर-मंतर पर कार्रवाई

सौरव दास और आशुतोष रांका को 10 अक्टूबर को दिल्ली के इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे के टर्मिनल-3 पर हिरासत में लिया गया था। अगले दिन दोनों के खिलाफ एहतियाती कार्रवाई शुरू हुई। इसके बाद 50-50 हजार रुपये का मुचलका भरने पर उन्हें रिहा कर दिया गया।

हालांकि, तीन दिन बाद 13 अक्टूबर को दोनों नेता राष्ट्रीय ध्वज लेकर जंतर-मंतर पहुंचे, जहां पुलिस ने उन्हें फिर हिरासत में ले लिया। 14 अक्टूबर को दोनों के खिलाफ BNSS की धारा 126 और 170 के तहत औपचारिक गिरफ्तारी दिखाई गई।

दिल्ली हाईकोर्ट के फैसले पर टिकी नजरें

अब दोनों नेताओं की याचिका पर दिल्ली हाईकोर्ट में सुनवाई होनी है। उनकी कानूनी टीम का तर्क है कि जरूरी शर्तें पूरी करने और जमानतदार पेश करने के बावजूद हिरासत जारी रखना उचित नहीं है। वहीं, पुलिस ने शांति भंग होने की आशंका के आधार पर हिरासत बढ़ाने का अनुरोध किया था। ऐसे में हाईकोर्ट की सुनवाई अहम मानी जा रही है। अब देखना होगा कि अदालत दोनों नेताओं को राहत देती है या हिरासत जारी रखने के फैसले पर कोई दूसरा निर्देश देती है।

Location :  New Delhi

Published :  21 October 2026, 11:40 AM IST