
रावण दहन
NEW DELHI: एक बार फिर दशहरा आया। पूरे शहर में खुशी का माहौल था। जगह-जगह रावण के पुतले लगाए गए थे। शाम होते ही हजारों लोग रावण को देखने के लिए इकट्ठा हो गए। जैसे ही पुतले में आग लगी , तो लोग खुश हुए कि बुराई पर अच्छाई की जीत हुई।
" लेकिन भीड़ में खड़ा एक छोटा बच्चा अपने पिता से सवाल करता,'' पापा अगर रावण हर साल रावण को जला दिया जाता है तो वह अगले साल जिंदा कैसे हो जाता है?''
बच्चे का सवाल सुनकर उसके पिता ने जवाब दिया, बेटा रावण सिर्फ कागज और लकड़ी का बना पुतला ही नहीं है। असली रावण तो हमारे अंदर छिपा है जो हर दिन जिंदा होता है। पिता ने कहा जब हम किसी की सफलता देखकर जलते है, तो हमारे अंदर नफरत का रावण जन्म लेता है। जब हम किसी गरीब या कमजोर को देखकर उसका मजाक उड़ाते है, तो उसके अंदर घमंड का रावण खड़ा होता है। जब हम दूसरों को धोखा देते है, उनकी बुराई करते है, झूठ बोलते है तब हमारे अंदर बुराई का रावण जिंदा हो जाता है।
उन्होंने बच्चे को एक उदाहरण देकर समझाया सोचो एक व्यक्ति ने मेहनत करके नया घर बनाया। उसके आस-पास के लोग उसकी खुशी में शामिल होने की बजाय उससे जलने लगे। वे उसकी बुराई करने लगे और उससे चिढ़ने लगे। उन्होंने हर साल रावण को तो जलाया लेकिन अपने अंदर की जलन को कभी खत्म नहीं किया।
बेटा यही सबसे बड़ी परेशानी है ,हम हर साल रावण को तो जलाते है, लेकिन अपने अंदर का गुस्सा, लालच, घमंड, जलन, नफरत को बचाकर रखते है। जब तक ये बुराइयां हमारे अंदर रहेगी रावण बार-बार जन्म लेता रहेगा।
बच्चे ने मासूमियत से पूछा, '' तो पापा असली रावण को कैसे जलाए?
पिता ने जवाब दिया," दूसरों की खुशी में शामिल होकर, जरूरतमंद की मदद करके, सच बोलकर और अपने घमंड को छोड़कर। जब हम अपने अंदर की बुराइयों को खत्म करेंगे तभी असली मायनों में रावण का अंत होगा।
रावण का पुतला जलाना एक परंपरा है, लेकिन अपने अंदर की बुराइयों को खत्म करना हमारा कर्तव्य है। रावण हर साल इसलिए जिंदा नहीं होता क्योंकि वह अमर था, बल्कि इसलिए कि इंसान आज भी अपने अंदर की बुराइयों को नहीं खत्म कर पाया है। इस दशहरा पर केवल रावण का पुतला नहीं बल्कि अपने अंदर की नफरत, जलन को भी जलाना है, तभी असली मायनों में बुराई पर अच्छाई की जीत होगी।
Location : New Delhi
Published : 19 October 2026, 1:32 PM IST
Topics : dashahra 2026 Navratri rama Ravana