100 से ज्यादा कमरों वाले होटल रेड कैटेगरी में क्यों आते थे? जुलाई तक लागू था यह नियम

क्या 100 से ज्यादा कमरों वाला होटल भी प्रदूषण के मामले में टेनरी और केमिकल फैक्ट्री की श्रेणी में आता था? इस साल जुलाई तक लागू नियमों के तहत बड़े होटलों को रेड कैटेगरी में रखा जाता था। आखिर इस वर्गीकरण का होटल कारोबार पर क्या असर पड़ रहा था और अब नियमों में क्या बदलाव हुआ है?

Post Published By: Suresh Prajapati
Updated : 1 November 2026, 5:11 PM IST

New Delhi: आमतौर पर होटल को ठहरने, शादी समारोह और पर्यटन से जुड़ी व्यावसायिक गतिविधियों के लिए जाना जाता है, लेकिन प्रदूषण नियंत्रण के पुराने नियमों के तहत 100 से ज्यादा कमरों वाले होटल को रेड कैटेगरी में रखा जाता था। यह वही श्रेणी है, जिसमें अधिक प्रदूषण फैलाने वाले उद्योगों को शामिल किया जाता है। इस सूची में चमड़ा बनाने वाली टेनरी और केमिकल फैक्ट्री जैसे उद्योग भी आते हैं।

100 से ज्यादा कमरे होने पर रेड कैटेगरी में शामिल होते थे होटल

पहले के नियमों के मुताबिक, 100 से अधिक कमरों वाले होटल को सीधे रेड कैटेगरी में रखा जाता था। प्रदूषण नियंत्रण के लिहाज से यह सबसे सख्त श्रेणियों में से एक है। इसके तहत उद्योगों और व्यावसायिक इकाइयों पर पर्यावरण से जुड़े कड़े नियम लागू होते हैं। इस वर्गीकरण में होटल को शामिल करने का प्रमुख आधार उसके कमरों की संख्या थी। यानी होटल में 100 से ज्यादा कमरे होने पर उसे रेड कैटेगरी में रखा जाता था।

Symbolic Photo (Image: Pinterest)

टेनरी और केमिकल फैक्ट्री के समान श्रेणी में होटल

इस नियम को लेकर सवाल उठते रहे कि क्या किसी होटल से होने वाला पर्यावरणीय प्रभाव चमड़ा बनाने वाली टेनरी या केमिकल फैक्ट्री के बराबर हो सकता है? होटल और औद्योगिक इकाइयों की गतिविधियां अलग-अलग होती हैं, ऐसे में केवल कमरों की संख्या के आधार पर उन्हें एक ही श्रेणी में रखना चर्चा का विषय बना।

जुलाई तक लागू था पुराना प्रावधान

बताया गया है कि इस साल जुलाई तक 100 से ज्यादा कमरों वाले होटलों को रेड कैटेगरी में रखने का प्रावधान था। इसके बाद नियमों में बदलाव से जुड़ा मामला सामने आया है। हालांकि, नए वर्गीकरण, उसकी शर्तों और होटल कारोबार पर पड़ने वाले प्रभाव की विस्तृत जानकारी के लिए संबंधित सरकारी अधिसूचना का अध्ययन जरूरी है।

Location :  New Delhi

Published :  1 November 2026, 5:11 PM IST