अगर आपके पास कोई आए और कहे कि हम ईरान युद्ध के नाम पर पैसा जुटा रहे हैं, तो आप जरा सावधान हो जाइएगा, क्योंकि यह लोग फर्जी हैं। इस बारे में खुद आईबी अधिकारी ने सामने आकर लोगों को आगाह किया है।

New Delhi: अगर आपके पास कोई आए और कहे कि आप हमें थोड़ी-सी आर्थिक मदद कीजिए। यह मदद हम अपने लिए नहीं, बल्कि ईरान के युद्ध प्रभावित लोगों के लिए मांग रहे हैं, तो हमारी आपको यही हिदायत रहेगी कि आप थोड़ा सावधान हो जाइएगा।
जी हां... सावधान इसलिए, क्योंकि ये वो लोग हैं, जिनका उदय युद्ध जैसी आपातकालीन स्थिति में ही होता है। ऐसी स्थिति में ये लोग लोगों को भावनात्मक रूप से अपने झांसे में लेते हैं और उनसे युद्ध के नाम पर अच्छा खासा पैसा जुटाकर इसके बाद नदारद हो जाते हैं। कभी-कभी ऐसे लोग संस्था की भी शक्ल अख्तियार कर लेते हैं, ताकि लोग प्रणालीगत तरीके से अपने कामों को अंजाम दे सके।
अब ऐसे ही गिरोह की बढ़ती तादाद को देखते हुए इंटेलिजेंस ब्यूरो को सामने आना पड़ा है। आईबी ने खुद लोगों को इस बारे में आगाह किया और लोगों से अपील की है कि वो इस तरह के लोगों से बचके रहे, चूंकि ये लोग फर्जी हैं।
आईबी के एक अधिकारी के मुताबिक, गौर करने वाली बात है कि युद्ध जैसी विषम परिस्थिति में ही ऐसे लोगों का उदय होता है। इसके बाद यह युद्ध की भयावहता को तस्वीरों में तब्दील करके लोगों को गुमराह करते हैं। उनसे युद्ध के नाम पर चंदा जुटाते हैं। ईरान में चल रहे युद्ध के बाद ऐसे लोगों की संख्या में इजाफा दर्ज किया जा रहा है। जिन पर नकेल कसने की जरूरत है।
आईबी के अधिकारियों का कहना है कि कई बार लोग इस कदर भावुक हो जाते हैं कि वो पैसों के इतर सोना चांदी भी दे जाते हैं। ईरान युद्ध के समय में ऐसे लोग जम्मू-कश्मीर में बड़े पैमाने पर सक्रिए हो गए हैं। ये गिरोह जम्मू-कश्मीर में जाकर उनसे पैसे ले रहे हैं।
प्राप्त जानकारी के मुताबिक, यह गिरोह सबसे ज्यादा शिया समुदाय के लोगों को ही निशाना बना रहा है। वजह यह है कि भारत में रह रहे शिया समुदाय के लोग ईरान से भावनात्मक रूप से जुड़े हुए हैं। यही वजह है कि सबसे ज्यादा शिया समुदाय के लोगों को निशाना बनाने की कोशिश की जा रही है।
इतना ही नहीं, दावा किया जा रहा है कि जम्मू-कश्मीर में सक्रिय कुछ लोग युद्ध के नाम पर लोगों से पैसा जुटाकर उसका इस्तेमाल अलगाववादी समूहों को फलीभूत करने के लिए किया जा रहा है।
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अधिकारियों के मुताबिक, देशभर में ऐसे लोगों को चिन्हित करने की कवायद जारी है, ताकि ये लोग अपने अनैतिक कामों को विस्तारित नहीं कर सके। गौर करने वाली बात है कि ये गिरोह ऑनलाइन नहीं, बल्कि ऑफलाइन तरीके से लोगों को अप्रोच करता है। इसके बाद उनसे ईरान युद्ध के नाम पर पैसे जुटाता है। लोगों से पैसे लेने के बाद उन्हें बाकायदा रसीद भी दी जा रही है। बताया जा रहा है कि इन लोगों ने पकड़े जाने के डर से पैसे जुटाने के लिए किसी भी प्रकार के ऑनलाइन प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल नहीं किया है।
अब इस पूरे प्रकरण के प्रकाश में आने के बाद जांच एजेंसियों के सामने सबसे बड़ी चुनौती यह पता करने की हो चुकी है कि आखिर इन पैसों का इस्तेमाल कहां किया जा रहा है? बहरहाल, अब पर्दे के पीछे की पूरी सच्चाई क्या है? इसकी तस्वीर तो जांच के बाद ही साफ हो पाएगी।
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