चंद्रशेखरन के पद छोड़ने के बाद टाटा और मिस्त्री परिवार में क्या होगी डील? टाटा की कुछ लिस्टेड कंपनियों के शेयर होंगे ट्रांसफर

टाटा समूह और मिस्त्री परिवार से जुड़ा पुराना विवाद एक बार फिर चर्चा में है। बदलते कॉरपोरेट समीकरणों के बीच कुछ ऐसा सामने आया है, जिसने दोनों पक्षों के बीच संभावित समझौते की अटकलों को हवा दी है। आखिर पर्दे के पीछे क्या बातचीत चल रही है और मामला किस मोड़ पर है?

Post Published By: Suresh Prajapati
Updated : 29 August 2026, 12:17 PM IST

New Delhi: टाटा संस और साइरस मिस्त्री परिवार के बीच वर्षों से चला आ रहा कॉरपोरेट विवाद अब एक नए मोड़ पर पहुंचता दिखाई दे रहा है। लंबे समय से चले आ रहे मतभेदों के बीच शापूरजी पलोनजी (SP) समूह पर बढ़ते कर्ज के दबाव ने संभावित वित्तीय समाधान की चर्चाओं को तेज कर दिया है।

सूत्रों के मुताबिक, टाटा संस में मिस्त्री परिवार की करीब 18.4 फीसदी हिस्सेदारी को लेकर विभिन्न विकल्पों पर विचार किया जा रहा है। इनमें हिस्सेदारी के बदले टाटा समूह की कुछ लिस्टेड कंपनियों के शेयर ट्रांसफर करने का विकल्प भी चर्चा में बताया जा रहा है।

नोएल टाटा की भूमिका से बढ़ी हलचल

टाटा ट्रस्ट्स के चेयरमैन नोएल टाटा की भूमिका इस पूरे घटनाक्रम को खास बना रही है। टाटा संस में टाटा ट्रस्ट्स की करीब 66 फीसदी हिस्सेदारी है। वहीं, एन चंद्रशेखरन के फरवरी में पद छोड़ने की घोषणा के बाद कॉरपोरेट समीकरणों में बदलाव की चर्चा भी तेज हुई है।

इस मामले में दोनों परिवारों के बीच रिश्तेदारी भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है। नोएल टाटा की शादी शापूर मिस्त्री की बहन आलू मिस्त्री से हुई है। ऐसे में वर्षों पुराने कानूनी विवाद की जगह किसी वित्तीय समझौते की संभावना को लेकर चर्चाएं बढ़ी हैं।

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SP Group पर कर्ज का दबाव

मिस्त्री परिवार के लिए टाटा संस में हिस्सेदारी लंबे समय से बड़ी संपत्ति रही है। लेकिन SP Group पर भारी कर्ज का दबाव बढ़ने के कारण इस हिस्सेदारी से पूंजी जुटाने की जरूरत बढ़ी है।

हाल ही में समूह की इकाई इक्विजेन इनवेस्टमेंट ने 18.95 फीसदी की ब्याज दर पर 36 महीने के बॉन्ड जारी किए हैं। इस कर्ज का बड़ा भुगतान जुलाई 2028 तक होना है। ऐसे में समूह के सामने महंगे कर्ज को संभालने के लिए पूंजी जुटाने की चुनौती है।

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सबसे बड़ा सवाल: Tata Sons की कीमत कितनी?

संभावित समझौते में सबसे बड़ी चुनौती Tata Sons के वैल्यूएशन को लेकर हो सकती है। टाटा संस टाटा समूह की नियंत्रक कंपनी है और इसके जरिए 100 से अधिक ऑपरेटिंग कंपनियों पर नियंत्रण है।

टाटा पावर जैसी लिस्टेड कंपनियों की बाजार कीमत आसानी से तय की जा सकती है, लेकिन Tata Sons के पास कई बड़ी अनलिस्टेड कंपनियों में भी हिस्सेदारी है। इनमें एयर इंडिया और टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स जैसी कंपनियां शामिल हैं।

इन कंपनियों की वास्तविक कीमत तय करना किसी भी संभावित सौदे का सबसे अहम हिस्सा होगा। यही कारण है कि यदि दोनों पक्ष समझौते की दिशा में आगे बढ़ते हैं तो वैल्यूएशन पर बातचीत निर्णायक हो सकती है।

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क्या अब बदल रहा है पूरा समीकरण?

साइरस मिस्त्री के टाटा संस के चेयरमैन पद से हटने के बाद शुरू हुआ विवाद लंबे समय तक कानूनी लड़ाई का हिस्सा रहा। अब बदलते वित्तीय दबाव और नेतृत्व समीकरणों के बीच संभावित समझौते की चर्चा ने इस पुराने विवाद को फिर सुर्खियों में ला दिया है।

हालांकि, संभावित सौदे को लेकर अभी अंतिम समझौते की पुष्टि नहीं हुई है। ऐसे में आने वाले समय में यह देखना अहम होगा कि टाटा संस और मिस्त्री परिवार के बीच बातचीत किस दिशा में आगे बढ़ती है और 18.4 फीसदी हिस्सेदारी को लेकर आखिर क्या रास्ता निकलता है।

Location :  New Delhi

Published :  29 August 2026, 12:17 PM IST