आवारा कुत्तों पर सुनवाई के दौरान SC का बड़ा बयान, डॉग लवर्स को भी टोका; जानें क्या कहा

आवारा कुत्तों के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई के दौरान अहम टिप्पणी की है। कोर्ट ने कहा कि कुत्ते अक्सर उन लोगों पर हमला करते हैं, जो उनसे डरते हैं। डॉग बाइट और सुरक्षा को लेकर पालतू व आवारा कुत्तों में फर्क पर जोर दिया गया।

Post Published By: Asmita Patel
Updated : 8 January 2026, 4:16 PM IST

New Delhi: आवारा कुत्तों की बढ़ती समस्या और डॉग बाइट के मामलों को लेकर सुप्रीम कोर्ट में चल रही सुनवाई के दौरान गुरुवार (8 जनवरी, 2026) को एक अहम टिप्पणी सामने आई। सर्वोच्च न्यायालय ने कहा कि कुत्ते अक्सर उन्हीं लोगों पर हमला करते हैं, जो उनसे डरते हैं। कोर्ट ने यह बात किसी सिद्धांत या रिपोर्ट के आधार पर नहीं, बल्कि निजी अनुभव के आधार पर कही। न्यायालय की इस टिप्पणी ने न सिर्फ अदालत में मौजूद लोगों का ध्यान खींचा, बल्कि देशभर में आवारा कुत्तों और इंसानों के बीच बढ़ते टकराव पर नई बहस को जन्म दे दिया है।

तीन जजों की बेंच कर रही है सुनवाई

इस मामले की सुनवाई जस्टिस विक्रम नाथ, जस्टिस संदीप मेहता और जस्टिस एन वी अंजारिया की पीठ कर रही है। यह बेंच डॉग लवर्स और उन याचिकाकर्ताओं की अर्जियों पर सुनवाई कर रही है, जिन्होंने आवारा कुत्तों से संबंधित पूर्व आदेशों में संशोधन की मांग की है। इन याचिकाओं में एक ओर पशु प्रेमियों की भावनाएं हैं, तो दूसरी ओर आम नागरिकों की सुरक्षा से जुड़ी गंभीर चिंताएं।

“डर पहचान लेता है कुत्ता”

सुनवाई के दौरान जस्टिस विक्रम नाथ ने कहा, “कुत्ता हमेशा उन लोगों को पहचान जाता है, जो उससे डरते हैं। जब भी उसे यह महसूस होता है कि कोई व्यक्ति उससे डरा हुआ है, तो वह उस पर हमला कर देता है।” जज ने यह भी स्पष्ट किया कि यह टिप्पणी उनके व्यक्तिगत अनुभव पर आधारित है। इस दौरान अदालत में मौजूद कई डॉग लवर्स सहमति में सिर हिलाते नजर आए।

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डॉग लवर्स को बेंच की सख्त टिप्पणी

जब डॉग लवर्स ने जज की बात पर सहमति जताते हुए सिर हिलाया, तो बेंच ने उन्हें टोकते हुए कहा, “अपना सिर मत हिलाओ।” इसके बाद कोर्ट ने और स्पष्ट शब्दों में कहा कि अगर कुत्तों को यह आभास हो जाए कि आप उनसे डर रहे हैं, तो उनके हमला करने की संभावना बहुत अधिक हो जाती है। यहां तक कि आपका पालतू कुत्ता भी ऐसा व्यवहार कर सकता है।

पालतू और आवारा कुत्तों में फर्क की जरूरत

सुनवाई के दौरान एक वकील ने दलील दी कि यदि किसी कुत्ते ने एक बार काट लिया हो, तो उसे खुले में नहीं छोड़ा जाना चाहिए। उन्होंने यह भी बताया कि आरडब्ल्यूए की हेल्पलाइन पर डॉग बाइट से जुड़ी करीब 20 हजार शिकायतें दर्ज की गई हैं। वकील ने जोर देकर कहा कि पालतू और आवारा कुत्तों के बीच अंतर समझना बेहद जरूरी है।

आवारा कुत्तों को लेकर मुश्किलें

वकील ने अदालत के सामने यह तर्क भी रखा कि आवारा कुत्तों को पालतू बनाया जा सकता है, लेकिन यह हर किसी के लिए आसान नहीं है। खासतौर पर उन लोगों के लिए यह एक बड़ी समस्या बन जाती है, जो डॉग लवर नहीं हैं या जिनके बच्चे और बुजुर्ग कुत्तों से डरते हैं। उन्होंने कहा कि पशु प्रेम और आम नागरिकों की सुरक्षा के बीच संतुलन बनाना बेहद जरूरी है।

कुत्तों की क्षेत्रीय प्रवृत्ति बनी बड़ी चुनौती

सुनवाई के दौरान यह मुद्दा भी उठाया गया कि कुत्ते अपने क्षेत्र को लेकर बेहद संवेदनशील होते हैं। वकील ने बताया कि हर 200 से 300 मीटर के बाद कुत्तों का इलाका बदल जाता है। यदि किसी इलाके में चारागाह या भोजन का केंद्र 500 मीटर की दूरी पर है, तो किसी एक कुत्ते को वहां पहुंचने के लिए दूसरे इलाकों के कुत्तों से लड़ना पड़ता है।

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चारागाह और भोजन केंद्रों से बढ़ती समस्या

वकील ने कहा कि जहां चारागाह या भोजन केंद्र होते हैं, वहां आवारा कुत्तों की संख्या तेजी से बढ़ जाती है। इसका सीधा असर वहां रहने वाले लोगों पर पड़ता है, क्योंकि कुत्तों के बीच क्षेत्र को लेकर संघर्ष बढ़ता है और हमले की घटनाएं भी ज्यादा होती हैं। ऐसे में स्थानीय निवासियों के लिए यह स्थिति असहनीय हो जाती है।

सुरक्षा बनाम संवेदना की बहस

सुप्रीम कोर्ट की इस सुनवाई ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि आवारा कुत्तों के मुद्दे पर नीति क्या होनी चाहिए। एक ओर पशु प्रेमियों का तर्क है कि कुत्तों को संरक्षण और भोजन मिलना चाहिए, वहीं दूसरी ओर आम लोगों की सुरक्षा और भय भी उतना ही वास्तविक है। कोर्ट की टिप्पणियों से यह साफ है कि समस्या को केवल भावनाओं के आधार पर नहीं, बल्कि व्यवहारिक और वैज्ञानिक दृष्टिकोण से देखने की जरूरत है।

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  • New Delhi

Published : 
  • 8 January 2026, 4:16 PM IST