पश्चिम एशिया में जारी तनाव के बीच भारत के लिए राहत भरी खबर सामने आई है। भारतीय ध्वज वाला एलपीजी टैंकर शिवालिक एलपीजी करियर (Shivalik LPG Carrier) होर्मुज से गुजरात के मुंद्रा पोर्ट पर पहुंच गया है।

होर्मुज से इंडिया पहुंचा शिवालिक जहाज
New Delhi: पश्चिम एशिया में जारी तनाव के बीच सोमवार को भारत के लिए राहत भरी खबर सामने आई है। भारतीय ध्वज वाला एलपीजी टैंकर शिवालिक एलपीजी करियर (Shivalik LPG Carrier) होर्मुज से गुजरात के मुंद्रा पोर्ट पर पहुंच गया है। बता दें कि यह जहाज 4400 MT LPG लेकर गुजरात के मुंद्रा पोर्ट पहुंचा।
जानकारी के अनुासार क्षेत्र में Iran–Israel Conflict के कारण स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में कई जहाज फंसे हुए थे। भारत सरकार के लगातार कूटनीतिक प्रयासों के बाद दो भारतीय एलपीजी जहाजों को वहां से निकलने की अनुमति मिली। इनमें से पहला जहाज ‘शिवालिक’ अब मुंद्रा बंदरगाह पहुंच गया है। वहीं दूसरा जहाज नंदा देवी कल यानि 17 मार्च को कांडला बंदरगाह पर पहुंचेगा।
पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के बीच देश में रसोई गैस की आपूर्ति सुनिश्चित करने की दिशा में सरकार सक्रिय है। भारत की राष्ट्रीय ऊर्जा सुरक्षा और मैरीटाइम लॉजिस्टिक्स के मोर्चे पर महत्वपूर्ण गतिविधियां दर्ज की गई हैं। एक तरफ जहां भारी मात्रा में एलपीजी गैस लेकर विशाल टैंकर भारतीय बंदरगाहों की ओर बढ़ रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ घरेलू बाजार में आपूर्ति शृंखला को बाधित करने वालों के खिलाफ एजेंसियों ने सख्त रुख अपना लिया है।
जहाजरानी मंत्रालय ने बताया कि तय योजना के मुताबिक, ये वाणिज्यिक जहाज पश्चिमी तट पर स्थित प्रमुख बंदरगाहों- मुंद्रा पोर्ट और कांडला पोर्ट पर एंकर करेंगे। शेड्यूलिंग के अनुसार ये शिपमेंट 16 और 17 मार्च को भारत पहुंच जाएंगे। इतनी बड़ी मात्रा में गैस की आवक से घरेलू बाजार में ऊर्जा की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित होगी और औद्योगिक व घरेलू मांग को सुचारू रूप से पूरा किया जा सकेगा।
पेट्रोलियम मंत्रालय की संयुक्त सचिव सुजाता शर्मा ने कहा कि घबराहट के कारण गैस बुकिंग के मामले बढ़े हैं हालांकि, अभी तक किसी भी प्रकार की स्टॉक की कमी की सूचना नहीं मिली है। उन्होंने कहा कि हमें विभिन्न स्थानों और स्रोतों से शिकायतें मिल रही हैं कि गैस सिलेंडर बुक नहीं हो पा रहे हैं।
मैं इस अवसर पर एक बार फिर स्पष्ट करना चाहूंगी कि शहरी क्षेत्रों में पिछली डिलीवरी और अगली बुकिंग के बीच कम से कम 25 दिनों का अनिवार्य अंतराल है और ग्रामीण क्षेत्रों में यह अंतराल 45 दिनों का है। यदि आप इस अवधि के समाप्त होने से पहले सिलेंडर बुक करने का प्रयास करते हैं, तो बुकिंग सफल नहीं होगी।