भोजशाला को लेकर आज सुप्रीम कोर्ट में एक अहम सुनवाई होने जा रही है, जिस पर पूरे प्रदेश की नजरें टिकी हुई हैं। यह मामला बसंत पंचमी के दिन भोजशाला परिसर में मां सरस्वती की पूरे दिन पूजा की अनुमति से जुड़ा हुआ है। पढ़ें पूरी रिपोर्ट

भोजशाला को लेकर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई
New Delhi/Dhar: भोजशाला को लेकर आज सुप्रीम कोर्ट में एक अहम सुनवाई होने जा रही है, जिस पर पूरे प्रदेश की नजरें टिकी हुई हैं। यह मामला बसंत पंचमी के दिन भोजशाला परिसर में वाग्देवी (मां सरस्वती) की पूरे दिन पूजा की अनुमति से जुड़ा हुआ है। हिंदू फ्रंट फॉर जस्टिस की ओर से इस संबंध में शीर्ष अदालत में याचिका दायर की गई है, जिस पर आज सुनवाई होगी। मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए प्रशासन और सुरक्षा एजेंसियां पूरी तरह अलर्ट मोड पर हैं।
धार जिले में सुरक्षा के कड़े इंतजाम
सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई से पहले ही मध्य प्रदेश के धार जिले में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है। भोजशाला परिसर सहित पूरे शहर में करीब 8,000 से अधिक पुलिसकर्मी और अर्धसैनिक बल तैनात किए गए हैं। किसी भी तरह की अप्रिय घटना को रोकने के लिए संवेदनशील इलाकों में अतिरिक्त फोर्स लगाई गई है। प्रशासन का कहना है कि कानून-व्यवस्था बनाए रखना सर्वोच्च प्राथमिकता है और किसी भी हाल में शांति भंग नहीं होने दी जाएगी।
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सीसीटीवी से कड़ी निगरानी, नो-फ्लाइंग जोन घोषित
सुरक्षा के मद्देनजर भोजशाला और आसपास के इलाकों में सीसीटीवी कैमरों के जरिए 24 घंटे निगरानी की जा रही है। इसके साथ ही भोजशाला के 300 मीटर के दायरे को नो-फ्लाइंग जोन घोषित किया गया है। प्रशासन ने ड्रोन या किसी भी तरह की हवाई गतिविधि पर पूरी तरह रोक लगा दी है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में कोई चूक न हो। अधिकारी लगातार हालात की समीक्षा कर रहे हैं और सभी फील्ड अफसरों को अलर्ट रहने के निर्देश दिए गए हैं।
सुप्रीम कोर्ट में दोनों पक्ष पूरी तरह तैयार
आज होने वाली सुनवाई को लेकर दोनों पक्षों की तैयारियां पूरी हैं। हिंदू फ्रंट फॉर जस्टिस की ओर से बसंत पंचमी के दिन पूरे समय पूजा की अनुमति देने की मांग की गई है। वहीं मुस्लिम पक्ष की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता सलमान खुर्शीद सुप्रीम कोर्ट में अपना पक्ष रखेंगे। दोनों ही पक्षों की दलीलों को देखते हुए यह सुनवाई बेहद अहम मानी जा रही है।
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फैसले पर टिकीं श्रद्धालुओं की निगाहें
बसंत पंचमी का पर्व श्रद्धालुओं के लिए आस्था से जुड़ा हुआ है, ऐसे में प्रशासन किसी भी तरह का जोखिम नहीं उठाना चाहता। सुप्रीम कोर्ट का फैसला न सिर्फ भोजशाला, बल्कि पूरे प्रदेश के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है। फैसले के बाद ही यह स्पष्ट हो पाएगा कि बसंत पंचमी के दिन भोजशाला में पूजा किस रूप में और कितनी अवधि तक की जा सकेगी। फिलहाल, सभी की निगाहें सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई और उसके फैसले पर टिकी हुई हैं।