गहरे समुद्र में छिपे तेल-गैस के खजाने की खोज: जानिए क्या है ‘समुद्र मंथन योजना’ और कैसे बदलेगी भारत की ऊर्जा सुरक्षा?

समुद्र मंथन योजना के तहत भारत गहरे और अति-गहरे समुद्री क्षेत्रों में तेल और प्राकृतिक गैस के नए भंडारों की खोज करेगा। 84,084 करोड़ की इस योजना के पहले चरण को 2030-31 तक लागू किया जाएगा। करीब 60 खोजी कुओं की ड्रिलिंग, सिस्मिक सर्वे और आधुनिक ऑफशोर इंफ्रास्ट्रक्चर विकसित किया जाएगा।

Post Published By: Suresh Prajapati
Updated : 15 August 2026, 9:54 AM IST

New Delhi: भारत को ऊर्जा के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने के लिए केंद्र सरकार ने ‘समुद्र मंथन योजना’ (राष्ट्रीय अपतटीय अन्वेषण योजना) को मंजूरी दी है। यह देश की बड़ी डीप-सी परियोजनाओं में से एक है। केंद्रीय मंत्रिमंडल ने 31 जुलाई 2026 को योजना के पहले चरण के लिए 84,084 करोड़ के बजट को मंजूरी दी है। योजना का उद्देश्य गहरे समुद्र में छिपे तेल और प्राकृतिक गैस के भंडारों की खोज करना और आयात पर निर्भरता कम करना है।

क्या है समुद्र मंथन योजना?

‘समुद्र मंथन योजना’ के तहत देश के गहरे और अति-गहरे समुद्री क्षेत्रों में तेल और प्राकृतिक गैस के संभावित भंडारों की तलाश की जाएगी। योजना का पहला चरण 2030-31 तक चलेगा।

भारत अपनी कच्चे तेल की जरूरत का करीब 88-89 फीसदी हिस्सा आयात करता है। ऐसे में घरेलू तेल और गैस संसाधनों की खोज बढ़ाकर आयात पर निर्भरता कम करना सरकार की प्रमुख प्राथमिकताओं में शामिल है।

योजना के क्या हैं प्रमुख उद्देश्य?

समुद्र मंथन योजना के जरिए सरकार का लक्ष्य गहरे समुद्र में नए हाइड्रोकार्बन भंडारों की खोज करना है। इसके अलावा ऑफशोर अन्वेषण से जुड़े वित्तीय जोखिम को कम कर निजी और वैश्विक निवेश को आकर्षित करने पर भी जोर दिया जाएगा।

योजना से आत्मनिर्भर भारत और मेक इन इंडिया को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है। घरेलू स्तर पर तेल और गैस की उपलब्धता बढ़ने से देश की ऊर्जा सुरक्षा मजबूत हो सकती है और विदेशी मुद्रा की बचत में भी मदद मिल सकती है।

Independence Day 2026: पीएम मोदी, अखिलेश यादव और CM योगी समेत कई दिग्गजों ने देशवासियों को खास अंदाज में दी बधाई

कैसे होगी गहरे समुद्र में तेल-गैस की खोज?

योजना के तहत आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल करते हुए समुद्र की तलहटी का अध्ययन किया जाएगा। इसके लिए 2D और 3D सिस्मिक सर्वे किए जाएंगे। इन सर्वेक्षणों के जरिए समुद्र के नीचे मौजूद संभावित तेल और गैस संरचनाओं का पता लगाया जाएगा।
इसके बाद संभावित क्षेत्रों में खोजी कुओं की ड्रिलिंग की जाएगी। योजना के तहत गहरे और अति-गहरे समुद्री क्षेत्रों में करीब 60 खोजी कुएं खोदे जाने की योजना है।

बनेगा आधुनिक ऑफशोर इंफ्रास्ट्रक्चर

समुद्र मंथन योजना के तहत साझा ऑफशोर उत्पादन और निकासी के लिए आधुनिक बुनियादी ढांचे को विकसित किया जाएगा। इसके साथ ही ड्रिलिंग उपकरण और समुद्री इंजीनियरिंग से जुड़े उद्योगों को बढ़ावा देने के लिए ऑयल एंड गैस मैन्युफैक्चरिंग एंड सर्विसेज जोन विकसित करने की योजना है।

इससे घरेलू विनिर्माण क्षमता मजबूत होने के साथ तेल और गैस क्षेत्र में रोजगार तथा निवेश के नए अवसर पैदा हो सकते हैं।

80th Independence Day 2026: 12 अफसरों को मिलेगा वीरता पदक, जानिए यूपी पुलिस के इन जांबाजों की पूरी लिस्ट

भारत को क्या होगा फायदा?

समुद्र मंथन योजना से भारत को लंबे समय में कई फायदे मिलने की उम्मीद है। घरेलू तेल और गैस उत्पादन बढ़ने पर आयात पर निर्भरता कम हो सकती है। इससे ऊर्जा सुरक्षा मजबूत होगी और विदेशी मुद्रा की बचत हो सकती है।

इसके अलावा डीप-सी तकनीक, समुद्री इंजीनियरिंग और तेल-गैस क्षेत्र में देश की तकनीकी क्षमता बढ़ेगी। निजी और विदेशी निवेश आने से इस क्षेत्र में आर्थिक गतिविधियों को भी गति मिलने की संभावना है।

कुल मिलाकर, समुद्र मंथन योजना भारत की ऊर्जा सुरक्षा और आत्मनिर्भरता की दिशा में एक बड़ी पहल मानी जा रही है। हालांकि, योजना से मिलने वाला वास्तविक लाभ समुद्री क्षेत्रों में तेल और गैस भंडार की खोज और उनके व्यावसायिक उत्पादन पर निर्भर करेगा।

Location :  New Delhi

Published :  15 August 2026, 9:54 AM IST