Deoghar: अंतरराष्ट्रीय स्तर पर देश और झारखंड का नाम रोशन किया, उसके बाद भी रोहित कुमार बेच रहे है चाय

अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मेडल जीतने वाले दिव्यांग खिलाड़ी Rohit Kumar आज देवघर में परिवार का खर्च चलाने के लिए चाय बेच रहे हैं। सीमित संसाधनों के बावजूद उन्होंने खेल में उपलब्धियां हासिल कीं। बिहार में सम्मान मिलने के बाद अब Rohit Kumar को झारखंड में सरकारी सहायता, प्रशिक्षण और खेल संसाधनों का इंतजार है।

Post Published By: Poonam Rajput
Updated : 12 September 2026, 2:47 PM IST

Deoghar: जिस खिलाड़ी ने शॉट पुट में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर देश और झारखंड का नाम रोशन किया, आज वही Rohit Kumar परिवार का खर्च चलाने के लिए चाय बेच रहे हैं। वर्ष 2024 में ताइक्वांडो में राष्ट्रीय स्तर पर अपनी प्रतिभा दिखा चुके दिव्यांग खिलाड़ी Rohit Kumar अब सरकारी सम्मान, खेल संसाधन और आर्थिक सहायता की उम्मीद लगाए बैठे हैं।

मेडल जीतने के बाद भी नहीं बदली जिंदगी

Rohit Kumar ने सीमित संसाधनों के बीच खेल की तैयारी की और ऑनलाइन माध्यम से प्रशिक्षण तथा खेल से जुड़ी जानकारी हासिल की। इसके बावजूद उन्होंने हार नहीं मानी और राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन किया।

उम्मीद थी कि उपलब्धियों के बाद सरकार और खेल विभाग की ओर से उन्हें बेहतर प्रशिक्षण और आर्थिक सहायता मिलेगी, लेकिन उनकी आर्थिक स्थिति में अपेक्षित बदलाव नहीं आया।

परिवार का सहारा बनने के लिए बेच रहे चाय

Rohit Kumar के परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत नहीं है। उनकी मां छोटी दुकान चलाती हैं, जबकि पिता स्टैंड पर काम करते हैं। सीमित आमदनी में परिवार की जरूरतें पूरी करना मुश्किल होने के कारण रोहित ने चाय की दुकान शुरू की।

विडंबना यह है कि जिस खिलाड़ी को खेल के मैदान में अपनी प्रतिभा दिखानी चाहिए थी, वह आज रोजी-रोटी के लिए चाय बेच रहा है। हालांकि आर्थिक संघर्ष के बावजूद रोहित के भीतर खेल में आगे बढ़ने की इच्छा अब भी कायम है।

अंतरराष्ट्रीय स्तर पर देश और झारखंड का नाम रोहित ने किया रोशन (Source: Dynamite News)

बिहार में मिला सम्मान, झारखंड में मदद का इंतजार

रोहित के मुताबिक, हाल ही में बिहार खेल प्राधिकरण की ओर से उन्हें सम्मानित किया गया। वहीं अपने राज्य झारखंड में वह अब भी सरकारी सहायता और उचित सम्मान की उम्मीद कर रहे हैं।

उनकी मांग बेहतर प्रशिक्षण, खेल संसाधन और भविष्य को सुरक्षित करने के लिए सरकारी सहयोग की है।

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ओलंपिक संघ ने मदद का भरोसा दिया

देवघर ओलंपिक संघ के अध्यक्ष सुनील खवाड़े ने कहा कि संघ खिलाड़ियों के हित में हमेशा खड़ा रहा है। उन्होंने Rohit Kumar से मुलाकात कर उनकी योग्यता के अनुसार हरसंभव सुविधा दिलाने का प्रयास करने की बात कही।

अब देखना यह है कि यह भरोसा कब ठोस मदद में बदलता है।

खेल विभाग ने भी मदद का भरोसा दिलाया

जिला खेल पदाधिकारी संतोष कुमार ने बताया कि विभाग को Rohit Kumar के बारे में जानकारी है। उनके मुताबिक पैरा ओलंपिक खिलाड़ियों को लेकर राज्य सरकार की स्पष्ट नियमावली नहीं होने के कारण उन्हें उच्च स्तर का लाभ नहीं मिल पाया।

उन्होंने बताया कि दिव्यांग खिलाड़ियों के लिए सरकारी स्तर पर 2 प्रतिशत आरक्षण का प्रावधान है। सरकारी वैकेंसी आने पर रोहित को प्राथमिकता के साथ आवेदन कराने का प्रयास किया जाएगा। उन्होंने यह भी कहा कि रोहित का आवेदन कार्यालय तक पहुंच चुका है और उनकी स्थिति की जानकारी मिलने के बाद कैश प्राइज व अन्य सरकारी सहायता दिलाने का प्रयास किया जाएगा।

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मेडल से चाय की दुकान तक पहुंची कहानी

Rohit Kumar की कहानी सिर्फ आर्थिक संघर्ष की कहानी नहीं है, बल्कि यह सवाल भी उठाती है कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उपलब्धि हासिल करने वाले खिलाड़ियों को उनकी प्रतिभा के अनुरूप संसाधन और सहयोग कितनी जल्दी मिलता है।

आज रोहित चाय बेचकर परिवार संभाल रहे हैं, लेकिन खेल में लौटने का सपना अब भी उनके भीतर जिंदा है। जरूरत है कि सरकारी आश्वासन ठोस मदद में बदले, ताकि उनकी पहचान चाय बेचने वाले खिलाड़ी के रूप में नहीं, बल्कि मैदान पर मेडल जीतने वाले खिलाड़ी के रूप में हो।

Location :  Deoghar

Published :  12 September 2026, 2:43 PM IST