गणतंत्र दिवस 2026 पर कर्तव्य पथ में उत्तर प्रदेश की झांकी ‘विरासत से विकास’ थीम पर आधारित रही। कालिंजर दुर्ग, एकमुख लिंग, ओडीओपी योजना, लोकनृत्य और आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर के माध्यम से बुंदेलखंड की सांस्कृतिक विरासत को प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया गया।

गणतंत्र दिवस पर निकली उत्तर प्रदेश की झांकी
New Delhi: 77वें गणतंत्र दिवस के अवसर पर कर्तव्य पथ पर आयोजित राष्ट्रीय परेड में उत्तर प्रदेश की झांकी ने दर्शकों का ध्यान अपनी ओर खींच लिया। ‘विरासत से विकास’ की थीम पर आधारित इस झांकी के माध्यम से बुंदेलखंड की शाश्वत भव्यता, ऐतिहासिक गौरव और आधुनिक उत्तर प्रदेश के विकासशील स्वरूप को एक साथ प्रस्तुत किया गया।
झांकी का केंद्रीय आकर्षण बांदा जिले का ऐतिहासिक कालिंजर किला रहा, जिसने प्रदेश की प्राचीन सभ्यता और सांस्कृतिक गहराई को जीवंत रूप में उकेरा।
झांकी के अग्रभाग में कालिंजर किले की प्रसिद्ध एकमुख लिंग की शैल-कृति को दर्शाया गया, जो बुंदेलखंड की आध्यात्मिक परंपरा और वास्तुकला कौशल का प्रतीक है। कालिंजर न केवल सैन्य दृष्टि से महत्वपूर्ण रहा है, बल्कि यहां स्थित भगवान नीलकंठ महादेव का मंदिर भी आस्था का बड़ा केंद्र माना जाता है। इस प्रस्तुति ने दर्शकों को बुंदेलखंड की हजारों वर्ष पुरानी धार्मिक और सांस्कृतिक विरासत से परिचित कराया।
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झांकी के मध्य भाग में बुंदेलखंड क्षेत्र की हस्तशिल्प परंपरा और स्थानीय उत्पादों को प्रमुखता से दिखाया गया। यहां ‘एक जनपद एक उत्पाद’ (ODOP) योजना के अंतर्गत आने वाले हस्तनिर्मित सामानों को प्रदर्शित कर यह संदेश दिया गया कि कैसे पारंपरिक कला आधुनिक अर्थव्यवस्था को मजबूती दे रही है। यह हिस्सा मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में प्रदेश में आत्मनिर्भरता और स्थानीय रोजगार को बढ़ावा देने के प्रयासों को दर्शाता है।
झांकी के पिछले हिस्से में बुंदेलखंड को उभरते पर्यटन केंद्र के रूप में प्रस्तुत किया गया। कालिंजर दुर्ग के ऐतिहासिक गलियारों में घूमते पर्यटकों के दृश्य और बुंदेली कलाकारों द्वारा प्रस्तुत पारंपरिक लोकनृत्य ने झांकी को जीवंत बना दिया।
झांकी के अंतिम भाग में आधुनिक उत्तर प्रदेश की तेजी से आगे बढ़ती विकास गाथा को दर्शाया गया। इसमें ब्रह्मोस मिसाइल, विस्तृत एक्सप्रेसवे नेटवर्क, औद्योगिक कॉरिडोर और मजबूत बुनियादी ढांचे की झलक शामिल रही।