ईरान में जारी जंग के कारण कच्चे तेल और एलपीजी की सप्लाई प्रभावित होने की आशंका के बीच भारत में कॉमर्शियल गैस सिलेंडर की कमी की शिकायतें सामने आईं। इस पर सरकार ने तुरंत कदम उठाते हुए IOC, HPCL और BPCL के एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर्स की तीन सदस्यीय कमेटी बनाई है, जो एलपीजी सप्लाई की निगरानी करेगी और जरूरत के अनुसार आपूर्ति को प्राथमिकता देगी।

गैस सिलेंडर को लेकर बड़ा अपडेट (Image Source: Google)
New Delhi: अमेरिका- इजरायल और ईरान में जारी जंग के बाद दुनियाभर में कच्चे तेल और एलपीजी की सप्लाई प्रभावित होने की आशंका जताई जा रही है। इसी बीच भारत में भी कॉमर्शियल गैस सिलेंडर की कमी को लेकर कुछ शिकायतें सामने आईं। खासतौर पर होटल और रेस्तरां संचालकों ने बताया कि उन्हें समय पर कॉमर्शियल सिलेंडर नहीं मिल पा रहे हैं, जिससे उनके कारोबार पर असर पड़ने लगा है।
कुछ जगहों पर स्थिति इतनी गंभीर बताई गई कि रेस्तरां संचालकों को दुकानें बंद करने तक की नौबत आने लगी। इन शिकायतों के सामने आने के बाद केंद्र सरकार तुरंत हरकत में आ गई और समस्या के समाधान के लिए ठोस कदम उठाए गए। सरकार का कहना है कि देश में पेट्रोलियम उत्पादों की सप्लाई को लेकर फिलहाल कोई बड़ा संकट नहीं है और स्थिति को नियंत्रण में रखने के लिए लगातार निगरानी की जा रही है।
कॉमर्शियल एलपीजी सिलेंडर की सप्लाई से जुड़ी समस्याओं को समझने और उनका समाधान निकालने के लिए सरकार ने तीन सदस्यीय कमेटी का गठन किया है। इस कमेटी में इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन (IOC), हिंदुस्तान पेट्रोलियम (HPCL) और भारत पेट्रोलियम (BPCL) के एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर्स शामिल हैं।
सूत्रों के अनुसार यह कमेटी अलग-अलग रेस्तरां एसोसिएशनों और अन्य व्यावसायिक उपभोक्ताओं से बातचीत करेगी, ताकि उन्हें हो रही दिक्कतों को समझा जा सके। इसके आधार पर एलपीजी सप्लाई की प्राथमिकताओं को तय किया जाएगा।
जरूरत पड़ने पर कमेटी सप्लाई को रीप्रायोरिटाइज भी करेगी, जिससे जिन क्षेत्रों में ज्यादा जरूरत है वहां पहले सिलेंडर उपलब्ध कराए जा सकें। सरकार का मानना है कि इस कदम से होटल और रेस्तरां कारोबारियों को काफी राहत मिलेगी।
सरकार के मुताबिक एलपीजी की उपलब्धता बनाए रखने के लिए कई कदम उठाए जा रहे हैं। सप्लाई को प्राथमिकता देने की नीति के तहत पिछले कुछ दिनों में घरेलू एलपीजी उत्पादन में करीब 10 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी की गई है। इसके अलावा एलपीजी और एलएनजी के कंसाइनमेंट अलग-अलग स्रोतों से मंगाए जा रहे हैं। अधिकारियों का कहना है कि जल्द ही कुछ नए कंसाइनमेंट भारत पहुंचने की उम्मीद है, जिससे सप्लाई और बेहतर हो जाएगी।
सरकार का यह भी दावा है कि देश में पेट्रोलियम उत्पादों को लेकर किसी तरह का संकट नहीं है। भारतीय रिफाइनरियां अपनी पूरी क्षमता के साथ काम कर रही हैं, ठीक वैसे ही जैसे ईरान-इजराइल संघर्ष से पहले कर रही थीं। सूत्रों के अनुसार भारत अपनी लगभग 70 प्रतिशत कच्चे तेल की सप्लाई स्ट्रेट ऑफ होर्मुज़ के अलावा अन्य स्रोतों से भी प्राप्त कर रहा है। इसके साथ ही रिफाइंड तेल के निर्यात पर रोक लगाने का फिलहाल कोई फैसला नहीं लिया गया है। सरकार का कहना है कि देश में ईंधन और गैस की सप्लाई को स्थिर बनाए रखने के लिए सभी आवश्यक कदम उठाए जा रहे हैं।