लॉरेंस बिश्नोई पर लगी लगाम: 7.5×11 फीट की कोठरी और 24 घंटे निगरानी!

लॉरेंस बिश्नोई को साबरमती सेंट्रल जेल के हाई-सिक्योरिटी ब्लॉक ‘दो सौ खोली’ में शिफ्ट किए जाने की खबर सामने आई है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, इस ब्लॉक में 200 कैदियों की क्षमता है और सुरक्षा के विशेष इंतजाम किए गए हैं। जानिए ब्लॉक 200 की व्यवस्था और बिश्नोई की जेल सुरक्षा से जुड़ी जानकारी...

Post Published By: Suresh Prajapati
Updated : 27 October 2026, 8:39 AM IST

Ahmedabad News: कुख्यात गैंगस्टर लॉरेंस बिश्नोई की जेल में सुरक्षा व्यवस्था को लेकर एक बार फिर चर्चा तेज हो गई है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, उसे अहमदाबाद की साबरमती सेंट्रल जेल के विशेष हाई-सिक्योरिटी ब्लॉक ‘दो सौ खोली’ (Block 200) में शिफ्ट किया गया है। इस ब्लॉक में आतंकवाद और अन्य गंभीर अपराधों के आरोपियों को रखा जाता है। यहां कैदियों की गतिविधियों और आपसी संपर्क पर नियंत्रण रखने के लिए विशेष व्यवस्था की गई है।

क्या है साबरमती जेल का ‘दो सौ खोली’ ब्लॉक?

रिपोर्ट्स के अनुसार, ब्लॉक 200 की क्षमता करीब 200 कैदियों की है। इसे चार अलग-अलग हिस्सों में बांटा गया है, जिनमें प्रत्येक हिस्से में लगभग 50 कैदियों को रखने की व्यवस्था बताई जाती है। इसका उद्देश्य कैदियों की आवाजाही सीमित करना और उनके बीच संपर्क को नियंत्रित रखना है।

बताया जा रहा है कि लॉरेंस बिश्नोई की कोठरी का आकार करीब 7.5×11 फीट है। इस हाई-सिक्योरिटी ब्लॉक में कैदियों की निगरानी और सुरक्षा को प्राथमिकता दी जाती है। हालांकि, बिश्नोई की मौजूदा व्यवस्था और कोठरी के सटीक आकार की आधिकारिक पुष्टि की जानी बाकी है।

लॉरेंस बिश्नोई

24 घंटे निगरानी और अलग रखने की चर्चा

मीडिया रिपोर्ट्स में दावा किया गया है कि लॉरेंस बिश्नोई को दूसरे कैदियों से अलग रखते हुए उस पर 24 घंटे नजर रखी जा रही है। रिपोर्ट्स में यह भी कहा गया है कि जेल में शिफ्ट होने के बाद वह मौन व्रत पर है और इशारों के जरिए बातचीत कर रहा है। हालांकि, मौन व्रत से जुड़ी जानकारी की स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध नहीं है।

गृह मंत्रालय के आदेश और वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से पेशी

लॉरेंस बिश्नोई साबरमती सेंट्रल जेल में बंद है। उसके जेल से बाहर ले जाने पर रोक से संबंधित केंद्रीय गृह मंत्रालय के आदेशों का जिक्र भी मीडिया रिपोर्ट्स में किया जाता रहा है। इन प्रतिबंधों के चलते उसकी अदालत में पेशी वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए कराए जाने की व्यवस्था की गई है।

हालांकि, इन आदेशों का दायरा और अन्य जांच एजेंसियों द्वारा पूछताछ की अनुमति से जुड़े नियमों को सटीक रूप से समझने के लिए संबंधित आधिकारिक आदेशों और न्यायिक प्रक्रिया की पुष्टि जरूरी है।

हाई-सिक्योरिटी में रखने के पीछे क्या है मकसद?

लॉरेंस बिश्नोई पर कई गंभीर आपराधिक मामलों में आरोप हैं और उसके गिरोह से जुड़े मामलों की जांच विभिन्न राज्यों की एजेंसियां करती रही हैं। हाई-सिक्योरिटी व्यवस्था का उद्देश्य जेल के भीतर सुरक्षा जोखिमों को कम करना, कैदियों की गतिविधियों पर नजर रखना और अनधिकृत संपर्क को सीमित करना होता है। फिलहाल ब्लॉक 200 में शिफ्टिंग, कोठरी के आकार और मौन व्रत से जुड़े दावों की आधिकारिक पुष्टि जरूरी है। ऐसे में इन जानकारियों को अंतिम तथ्य के बजाय मीडिया रिपोर्ट्स में सामने आए दावों के रूप में ही देखा जाना चाहिए।

Location :  Ahmedabad

Published :  27 October 2026, 8:39 AM IST