
एल. खियांग्ते की गिरफ्तारी से झारखंड में भूचाल (सोर्स- डाइनामाइट न्यूज़)
New Delhi: झारखंड में छात्र आंदोलन अब एक नए मोड़ पर पहुंच गया है। JPSC के पूर्व चेयरमैन एल. खियांग्ते को CID ने गिरफ्तार कर लिया है। सवाल है कि आखिर एक रिटायर्ड IAS अधिकारी, जो झारखंड के मुख्य सचिव जैसे बड़े पद पर रह चुके हैं, उन पर ऐसे कौन से आरोप लगे कि जांच एजेंसी को गिरफ्तारी करनी पड़ी? क्या मामला सिर्फ परीक्षा में गड़बड़ी तक सीमित है या फिर इसके पीछे परीक्षा कराने वाली कंपनी और भर्ती प्रक्रिया से जुड़ा बड़ा नेटवर्क है? इस पूरे मामले को विस्तार से समझने की जरुरत है
वरिष्ठ पत्रकार मनोज टिबड़ेवाल आकाश ने अपने चर्चित शो The MTA Speaks में झारखंड के छात्र आंदोलन और JPSC के पूर्व चेयरमैन एल. खियांग्ते की गिरफ्तारी पर सटीक विश्लेषण किया।
झारखंड में JPSC सहित विभिन्न भर्ती परीक्षाओं को लेकर विवाद कई दिनों से चल रहा है। छात्र लगातार प्रदर्शन कर रहे हैं और भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता की मांग कर रहे हैं। इसी बीच अब इस मामले में बड़ी कार्रवाई सामने आई है। झारखंड CID ने JPSC के पूर्व चेयरमैन एल. खियांग्ते को गिरफ्तार कर लिया है। यह गिरफ्तारी ऐसे समय हुई है जब JPSC की 14वीं संयुक्त सिविल सेवा परीक्षा को लेकर पहले से ही सवाल उठ रहे हैं। CID इस पूरे मामले की जांच कर रही है और जांच के दौरान कई लोगों की गिरफ्तारी पहले ही हो चुकी है।
अब सबसे पहले समझते हैं कि आखिर एल. खियांग्ते कौन हैं? एल. खियांग्ते कोई सामान्य अधिकारी नहीं हैं। वह 1988 बैच के रिटायर्ड IAS अधिकारी हैं। प्रशासनिक सेवा में उन्होंने झारखंड सरकार के कई महत्वपूर्ण पदों पर काम किया और बाद में राज्य के मुख्य सचिव भी रहे। रिटायरमेंट के बाद फरवरी 2025 में उन्हें झारखंड लोक सेवा आयोग यानी JPSC का चेयरमैन बनाया गया था। JPSC झारखंड में राज्य सरकार की अलग-अलग सरकारी नौकरियों के लिए प्रतियोगी परीक्षाएं आयोजित करता है। इसलिए आयोग के चेयरमैन की भूमिका काफी महत्वपूर्ण होती है। चेयरमैन के तौर पर खियांग्ते के कार्यकाल में कई भर्ती परीक्षाएं हुईं। लेकिन अब उन्हीं में से कुछ परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं को लेकर जांच चल रही है।
विवाद सबसे ज्यादा 14वीं JPSC सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा को लेकर सामने आया। परीक्षा के रिजल्ट के बाद अभ्यर्थियों और छात्र संगठनों ने कई सवाल उठाए। आरोप लगाए गए कि परीक्षा प्रक्रिया में गड़बड़ी हुई है और कुछ अभ्यर्थियों को अनुचित तरीके से फायदा पहुंचाया गया। इन आरोपों के बाद मामला बढ़ा और झारखंड CID ने जांच शुरू की। जांच आगे बढ़ी तो JPSC कार्यालय में छापेमारी हुई। CID ने JPSC से जुड़े कई दस्तावेज और इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य जब्त किए। जांच के दौरान OMR शीट, एडमिट कार्ड, मार्कशीट, कंप्यूटर और मोबाइल जैसे सामान भी जांच के दायरे में आए।
इसके बाद जांच सिर्फ परीक्षा के रिजल्ट तक सीमित नहीं रही। CID यह पता लगाने की कोशिश करने लगी कि परीक्षा कराने की जिम्मेदारी किस एजेंसी को दी गई, किस प्रक्रिया से दी गई और इस पूरी प्रक्रिया में किन अधिकारियों और लोगों की भूमिका रही। यहीं से एक कंपनी का नाम सामने आया TSR Data Processing Private Limited यानी TDPL, आरोप है कि 14वीं JPSC परीक्षा की प्रक्रिया में इस कंपनी को महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां दी गईं। लेकिन इस कंपनी को लेकर भी सवाल खड़े हुए।
रिपोर्टों के मुताबिक TDPL को पहले झारखंड में परीक्षा से जुड़े मामलों में ब्लैकलिस्ट किया गया था। इसके बावजूद बाद में उसे JPSC की परीक्षा से जुड़ा काम दिए जाने को लेकर सवाल उठे। यही मामला अब जांच का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। CID यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि आखिर जिस एजेंसी पर पहले से सवाल उठ चुके थे, उसे परीक्षा का काम किस प्रक्रिया के तहत दिया गया? क्या इसके लिए सामान्य टेंडर प्रक्रिया अपनाई गई थी? या फिर किसी दूसरे तरीके से काम सौंपा गया? और सबसे बड़ा सवाल इस फैसले में किस-किस की भूमिका थी?
इसी कड़ी में अब पूर्व JPSC चेयरमैन एल. खियांग्ते की गिरफ्तारी हुई है लेकिन यहां यह समझना भी जरूरी है कि गिरफ्तारी का मतलब यह नहीं होता कि अदालत ने किसी व्यक्ति को दोषी घोषित कर दिया है। गिरफ्तारी जांच का हिस्सा है और अदालत में आरोप साबित होना अलग कानूनी प्रक्रिया है। खियांग्ते से CID पहले भी कई बार पूछताछ कर चुकी थी। अलग-अलग दौर में उनसे करीब 30 घंटे तक पूछताछ किए जाने की खबर सामने आई है। उनसे परीक्षा कराने वाली एजेंसी के चयन, परीक्षा प्रक्रिया और दूसरे संबंधित मामलों के बारे में सवाल पूछे गए। जांच के दौरान उनके आवास और उनसे जुड़े दूसरे स्थानों पर भी तलाशी ली गई थी।
इसके बाद खियांग्ते ने JPSC चेयरमैन के पद से इस्तीफा दे दिया था। उन्होंने उस समय कहा था कि उन्होंने निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करने के लिए खुद पद छोड़ा है, ताकि उनके पद पर रहते हुए जांच को लेकर किसी तरह का सवाल न उठे। उन्होंने यह भी कहा था कि वह जांच में सहयोग करेंगे। लेकिन अब जांच आगे बढ़ते हुए गिरफ्तारी तक पहुंच गई है।
तो आखिर CID को ऐसा क्या मिला जिसके आधार पर गिरफ्तारी हुई? खबरों के मुताबिक, जांच एजेंसी का फोकस इस बात पर है कि TDPL जैसी कंपनी को परीक्षा संचालन का काम किस प्रक्रिया के तहत दिया गया और क्या इसमें नियमों की अनदेखी हुई। आरोप यह भी है कि परीक्षा का काम सामान्य निविदा प्रक्रिया के बजाय नामांकन के आधार पर दिया गया। इसके अलावा परीक्षा से जुड़े दस्तावेज और इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस भी जांच में सामने आए हैं। CID ने TDPL के रांची और लखनऊ स्थित कार्यालयों को भी सील किया है।
यानी जांच अब सिर्फ एक अधिकारी या एक परीक्षा तक सीमित नहीं दिखाई दे रही है। CID यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि परीक्षा की पूरी प्रक्रिया में कहीं कोई संगठित गड़बड़ी तो नहीं हुई। इसी मामले में पहले भी कई लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है। इनमें JPSC की डिप्टी कंट्रोलर ऑफ एग्जामिनेशन श्वेता गुप्ता और परीक्षा कराने वाली एजेंसी से जुड़े लोग शामिल हैं। जांच में कुछ अभ्यर्थियों और दूसरे लोगों की भूमिका भी सामने आई है। इससे मामला और गंभीर हो गया।
अब सवाल है कि क्या खियांग्ते अकेले जिम्मेदार हैं? इसका जवाब फिलहाल जांच पूरा होने से पहले देना सही नहीं होगा। CID की जांच अभी जारी है और एजेंसी यह पता लगा रही है कि परीक्षा प्रक्रिया में किस स्तर पर गड़बड़ी हुई और उसमें कौन-कौन लोग शामिल थे। जांच में अगर किसी और अधिकारी या व्यक्ति की भूमिका सामने आती है तो उसके खिलाफ भी कार्रवाई हो सकती है। यानी खियांग्ते की गिरफ्तारी को जांच का अंतिम पड़ाव नहीं, बल्कि एक महत्वपूर्ण पड़ाव माना जा रहा है।
अब इसका सीधा असर छात्रों के आंदोलन पर भी पड़ सकता है। झारखंड में हजारों छात्र JPSC और JSSC की परीक्षाओं में कथित गड़बड़ियों के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे हैं। छात्रों की मांग है कि जिन परीक्षाओं पर सवाल उठे हैं, उनकी निष्पक्ष जांच हो और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की जाए। छात्र यह भी चाहते हैं कि परीक्षा प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी हो।
यानी छात्रों के आंदोलन के बीच अब एक बड़ी कार्रवाई जरूर हुई है। लेकिन छात्रों की कई दूसरी मांगों पर अभी फैसला होना बाकी है। सबसे बड़ा सवाल 14वीं JPSC परीक्षा को लेकर है। क्या परीक्षा रद्द होगी, क्या दोबारा परीक्षा होगी? क्या पहले से जारी रिजल्ट पर कोई फैसला होगा? इन सवालों का जवाब अभी सामने नहीं आया है। JPSC ने विवाद के बीच मुख्य परीक्षा को भी स्थगित किया था। इसके अलावा आयोग की कुछ दूसरी परीक्षाओं पर भी असर पड़ा है।
यानी एक तरफ CID की जांच चल रही है और दूसरी तरफ छात्रों का भविष्य भी इससे जुड़ा हुआ है। अगर जांच में गंभीर अनियमितता साबित होती है तो प्रशासन और आयोग के सामने आगे की परीक्षा प्रक्रिया को लेकर बड़ा फैसला लेने की चुनौती होगी। लेकिन अगर किसी परीक्षा को रद्द किया जाता है तो हजारों अभ्यर्थियों को फिर से परीक्षा देनी पड़ेगी। इससे उन छात्रों को भी परेशानी होगी जिन्होंने पहले ही परीक्षा में मेहनत की है। इसलिए सरकार और आयोग के लिए सबसे बड़ी चुनौती यही है कि जांच और भर्ती प्रक्रिया दोनों को संतुलित तरीके से आगे बढ़ाया जाए।
अब बात करते हैं कि आगे क्या होगा? सबसे पहले CID अपनी जांच आगे बढ़ाएगी। गिरफ्तार किए गए पूर्व चेयरमैन और दूसरे आरोपियों से पूछताछ की जाएगी। जांच एजेंसी दस्तावेज, इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस और परीक्षा प्रक्रिया से जुड़े रिकॉर्ड को खंगालेगी। इसके बाद अगर जांच में पर्याप्त सबूत मिलते हैं तो आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की जा सकती है। मामला अदालत में जाएगा और वहां आरोपों की कानूनी जांच होगी। दूसरी तरफ JPSC को भी परीक्षा प्रक्रिया को लेकर फैसला लेना होगा। अगर किसी परीक्षा को लेकर जांच में गंभीर गड़बड़ी साबित होती है तो उसके रिजल्ट या परीक्षा को लेकर सरकार और आयोग को आगे का रास्ता तय करना होगा। तीसरी चीज छात्रों के आंदोलन से जुड़ी है। फिलहाल इतना जरूर है कि JPSC विवाद अब सिर्फ छात्रों के प्रदर्शन तक सीमित नहीं रहा। मामला जांच, छापेमारी, गिरफ्तारियों और अब पूर्व चेयरमैन की गिरफ्तारी तक पहुंच गया है।
एल. खियांग्ते, जो कभी झारखंड के मुख्य सचिव रह चुके हैं और बाद में JPSC के चेयरमैन बने, अब उसी आयोग से जुड़ी कथित परीक्षा अनियमितताओं की जांच में गिरफ्तार किए गए हैं। लेकिन इस पूरे मामले में अंतिम सच जांच और अदालत की प्रक्रिया के बाद ही सामने आएगा।अब देखना होगा कि CID की जांच आगे किन लोगों तक पहुंचती है, क्या और गिरफ्तारियां होती हैं, क्या 14वीं JPSC परीक्षा को लेकर कोई बड़ा फैसला लिया जाता है और क्या छात्रों की बाकी मांगों पर सरकार कोई ठोस कदम उठाती है।
क्योंकि छात्रों के लिए असली सवाल यही है कि उन्हें एक ऐसी भर्ती व्यवस्था कब मिलेगी जिस पर वे बिना किसी शक के भरोसा कर सकें। और अब जब पूर्व चेयरमैन की गिरफ्तारी हो चुकी है, तो छात्रों की नजर सिर्फ गिरफ्तारी पर नहीं, बल्कि अगली कार्रवाई और परीक्षा के भविष्य पर भी होगी। यानी कहानी अभी खत्म नहीं हुई है। बल्कि खियांग्ते की गिरफ्तारी के बाद JPSC विवाद की जांच अब एक और महत्वपूर्ण चरण में पहुंच गई है। अब देखना होगा कि जांच से कौन-कौन से नाम सामने आते हैं, परीक्षा को लेकर क्या फैसला होता है और क्या सरकार छात्रों के भरोसे को दोबारा कायम कर पाती है।
Location : New Delhi
Published : 11 August 2026, 8:13 AM IST